सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) ने सुप्रीम कोर्ट में पेश की रिपोर्ट में नेशनल चंबल वाइल्डलाइफ सेंक्चुअरी में अवैध खनन पर रोक के लिए टास्क फोर्स बनाने की सिफारिश की गई है। इससे तीनों ही राज्यों उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्यप्रदेश के वन, खनन और पुलिस विभाग में बेहतर समन्वय भी स्थापित हो सकेगा।
सेंक्चुअरी की सीमा का डिफरेंशियल ग्लोबल पाजिशनिंग सिस्टम (डीजीपीएस) आधारित सर्वे और भूमि का सीमांकन होगा। इसमें जियो-आधारित मैप तैयार करने के साथ खंभे लगाए जाएंगे।
चंबल सेंक्चुअरी में अवैध खनन का सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में स्वत: संज्ञान लेते हुए सीईसी से रिपोर्ट मांगी थी। 30 मार्च को सीईसी ने रिपोर्ट दाखिल की। इसमें अवैध खनन को सेंक्चुअरी और नदी के इको-सिस्टम के लिए गंभीर मानते हुए कई सिफारिशें की गईं हैं।
चंबल सेंक्चुअरी में अवैध खनन रोकने को बनाएं तीन राज्यों की टास्क फोर्स
उप्र, मप्र और राजस्थान के सेंक्चुअरी और इको-सिस्टम जोन में रेत के खनन, उसके परिवहन व भंडारण के सभी तरीकों पर तुरंत रोक लगाने को कहा है। नदी किनारे एक्सकेवेटर, जेसीबी और ट्रैक्टर ट्राली के इस्तेमाल पर प्रभावी रोक रहेगी। तीनों राज्य सरकारें चंबल सेंक्चुअरी की सीमाओं के संबंध में यथास्थिति बनाए रखेंगी।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी की रिपोर्ट में की गई सिफारिश
सुप्रीम कोर्ट की पूर्व अनुमति के बिना सेंक्चुअरी क्षेत्र में कोई बदलाव नहीं होगा। अवैध खनन और परिवहन पर रोक के लिए ड्रोन से निगरानी होगी। ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस)-इनेबल्ड गाड़ी ट्रैकिंग, इलेक्ट्रानिक ट्रांजिट परमिट और खनन के पट्टे की जियो-टैगिंग सहित एक तकनीक आधारित निगरानी और सर्विलांस सिस्टम स्थापित किया जाएगा।
उप्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश को मिलकर करना होगा डीजीपीएस सर्वे
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय यह सुनिश्चित करेगा कि सेंक्चुअरी के राजस्थान वाले भाग के लिए इको-सेंसिटिव जोन को शीघ्र अधिसूचित किया जाए। घड़ियालों के संरक्षण और सेंक्चुअरी के बेहतर प्रबंधन के लिए संस्थागत समन्वय प्रणाली विकसित करनी होगी। तीनों राज्यों को सीईसी में जांच के लिए मासिक अनुपालन आख्या जमा करनी होगी।
स्थलीय निरीक्षण करेगी सीईसी
सीईसी ने मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए संबंधित राज्यों में फील्ड विजिट करने का निर्णय लिया है। राज्य सरकारों, संबंधित विभागों के अधिकारियों से सलाह-मशविरा और स्थानीय हितधारकों से बातचीत की जाएगी। खनन से जुड़े रिकार्ड और अधिसूचना की जांच की जाएगी। विस्तृत जांच रिपोर्ट के लिए सीईसी ने चार सप्ताह का समय मांगा है।
नेशनल चंबल सेंक्चुअरी
नेशनल चंबल सेंक्चुअरी उप्र, राजस्थान व मप्र में संरक्षित क्षेत्र है। यह घड़ियाल, इंडियन स्किमर, लाल तिलकधारी कछुए और गांगेय डाल्फिन का घर है। मप्र ने इसे 1978, उत्तर प्रदेश में 1979 और राजस्थान ने 1983 में अधिसूचित किया था। उप्र में 635 वर्ग किमी, मप्र में 435 वर्ग किमी और राजस्थान में 635 वर्ग किमी का क्षेत्र सेंक्चुअरी में आता है।
चंबल नदी मप्र के महू जिले के पास जानापाव पहाड़ी के पास विंध्य रेंज से निकली है। तीनों राज्यों में बहते हुए यह इटावा के पास यमुना में मिलती है।
