केमिकल से पका हुआ आम होता है ‘मीठा जहर’, लिवर और किडनी खराब होने का खतरा; ऐसे पहचाने कार्बाइड से पका है या नहीं

डाल पर पकने वाले आम से पहले ही शहर से लेकर कस्बों की सड़कों के किनारे आम की बहार दिखने लगी है। इस आम की मिठास के पीछे सेहत बिगड़ने वाला धीमा जहर छिपा है।

बाजार में कैल्शियम कार्बाइड जैसे प्रतिबंधित रसायनों से आम पका कर बेचा जा रहा है। इस आम के सेवन से लिवर और किडनी के खराब होने का खतरा है।

कार्बाइड से पके आम की धड़ल्ले से हो रही बिक्री के बावजूद इसकी रोकथाम को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग के जिम्मेदार उदासीन बने हैं।

जिले में बड़ी मात्रा में आम की आवक दूसरे जिलों से होती है। इसके अलावा जिले में भी आम पैदा होता है, लेकिन बड़ी मात्रा में आवक ही होती है।

बागवान की माने तो आम की परिपक्वता में 12 से 16 सप्ताह का समय लगता है, लेकिन मुनाफे की होड़ में व्यापारी इन्हें दो से तीन हफ्ते पहले तोड़कर तेजी से पकाने के लिए प्रतिबंधित कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल कर रहे हैं। बारिश से पहले ही डाल के आम के नाम पर केमिकल से पकाकर तैयार आम को बेचा जा रहा है।

जिला अस्पताल के फिजिशियन डाक्टर अलंकार सिंह सोलंकी ने बताया कि कार्बाइड व अन्य रसायनों से पकाए गए आम के अलावा अन्य फलों के प्रयोग से पेट में अल्सर, गैस, जलन, किडनी और लिवर पर दुष्प्रभाव पड़ता है।

लंबे समय तक ऐसे आम खाने से कैंसर और तंत्रिका रोग का खतरा भी बढ़ जाता है। केमिकल से पकाए गए आम में नेचुरल मिठास और पोषण की मात्रा भी कम होती है।

क्या है कार्बाइड

कार्बाइड को आमतौर पर मसाला के नाम से जाना जाता है। इसका रासायनिक फार्मूला सीएसीटू है। इसका इस्तेमाल एसिटिलीन के स्रोत के तौर पर ब्लोटार्च और वेल्डिंग आदि कार्य में किया जाता है।

पानी के संपर्क में आकर कैल्शियम कार्बाइड एसिटिलीन गैस का निर्माण करता है, जो कि आम को पकाने के लिए कारगर होती है। कैल्शियम कार्बाइड में सूक्ष्म मात्रा में आर्सेनिक और फास्फोरस हाईड्राइड पाए जाते हैं जो कैंसर कारक हैं।

कार्बाइड से आम पकाना घातक

चिकित्सक ने बताया कैल्शियम कार्बाइड एक बार पानी में घुलने पर एसिटिलीन का उत्पादन करता है, जो एक कृत्रिम पकाने वाले आम के रूप में कार्य करता है।

माना जाता है एसिटिलीन मस्तिष्क को आक्सीजन की आपूर्ति को कम कर तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। कार्बाइड से पके आम के सेवन से लिवर, पेट की अन्य समस्या भी हो सकती है। आम को कार्बोहाइड्रेट नहीं इथलीन से पकाना चाहिए।

इस तरह पहचानें केमिकल से पके आम

आम को पानी में भर किसी बाल्टी में डालने पर यदि वह तैरने लगे तो समझ लेना चाहिए कि इन्हें रसायनों की मदद से पकाया गया है। मगर हल्का हरापन लिए हो और झुर्रियां भी दिखाई दे तो समझ लेना चाहिए। इसे पेड़ पर पकने से पहले ही तोड़कर रसायन से पकाया गया है।

केमिकल से पका आम ज्यादा चमकदार और अस्वाभिक रूप से पीला होता है। सफेद या धूल जैसा पाउडर भी दिखता है। केमिकल से पके आम को काटने पर तेज गंध अंदर से अधपका या सफेद गूदा भी मिलता है।

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