केरलम में त्रिकोणीय मुकाबला, भाजपा-एलडीएफ-यूडीएफ में कांटे की टक्कर के आसार

 केरलम विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी का प्रवेश द्वार माने जाने वाले निमोम विधानसभा क्षेत्र में 2026 के चुनावों में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ), संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) और भाजपा नीत राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के बीच त्रिकोणीय मुकाबले का गवाह बनने के लिए तैयार है।

निमोम भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्र बना रहेगा, क्योंकि वह राज्य में अपने प्रभाव का विस्तार करने का प्रयास कर रही है। केरलम के शिक्षा मंत्री व माकपा के नेता वी. शिवांकुट्टी ने निमोम सीट को बनाए रखने का प्रयास किया है। शिवांकुट्टी ने पहले 2016 में भाजपा नेता ओ. राजगोपाल के खिलाफ यह सीट खो दी थी, जो राज्य में भाजपा की पहली विधानसभा जीत थी।

भाजपा का मजबूत प्रदर्शन

शिवांकुट्टी ने 2021 के चुनावों में यह सीट पुन: प्राप्त की और अब उन्हें केरलम भाजपा के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर से मजबूत चुनौती मिल रही है। माकपा 2021 में सीट पर पुन: काबिज हुई, लेकिन भाजपा ने दो विधानसभा चुनावों में मजबूत प्रदर्शन किया है।

वहीं, राजीव चंद्रशेखर ने कई मौकों पर एलडीएफ पर वादे नहीं निभाने का आरोप लगाया। भाजपा उम्मीदवार ने सबरीमाला सोने की चोरी मामले में एलडीएफ और यूडीएफ पर ”अनुष्ठानों में बाधा डालने” का आरोप लगाकर पार्टी के ¨हदुत्व एजेंडे को आगे बढ़ाया है।

पिछले साल नगर निगम चुनाव जीतने के बाद भाजपा तिरुअनंतपुरम जिले में निमोम सीट पर जीत की गंभीर संभावनाओं पर विचार कर रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी केरलम में एक महत्वपूर्ण कारक है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी निमोम में रैली करने वाले हैं, जो चंद्रशेखर के अभियान को बढ़ावा देगी।

शशि थरूर पर निर्भर कांग्रेस

यूडीएफ ने पूर्व कांग्रेस नेता और केरलम के मंत्री जी.कार्तिकेयन के बेटे केएस सबरीनाथन को मैदान में उतारा है। उन्होंने पिछले चुनावों में अरुविकारा सीट से हार का सामना किया था। कांग्रेस तिरुअनंतपुरम के सांसद शशि थरूर की जीत पर निर्भर करेगी। थरूर ने केएस सबरीनाथन के लिए भी प्रचार किया है।

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