बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप रही थी 67 साल पुरानी फिल्म, बाद में मिला Cult Classic का दर्जा

बॉलीवुड हमेशा से बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों पर ही टिका रहा है। कोई भी एक्टर सुपरस्टार तभी बनता है, जब बॉक्स ऑफिस पर उसकी 3-4 फिल्में हिट हों या कोई एक फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हो। अक्सर फिल्म की कमर्शियल सफलता ही उसकी क्वालिटी तय करती है। बदलते समय के साथ, दर्शकों ने भी फिल्म की कलात्मक बारीकियों पर ध्यान देना शुरू कर दिया है।

फिल्ममेकर्स ने भी अपनी फिल्मों के ज़रिए समाज के उन विषयों को दिखाना शुरू कर दिया है, जिन्हें अब तक ‘टैबू’ या संवेदनशील माना जाता रहा है। कुछ फिल्में अपने समय से काफी आगे होती हैं। शुरुआत में, बॉक्स ऑफिस पर उन्हें ‘फ्लॉप’ करार दे दिया जाता है, लेकिन जैसे-जैसे दर्शकों की सोच विकसित होती है, वे फिल्में आगे चलकर ‘कल्ट क्लासिक’ बन जाती हैं।

कौन सी है यह फिल्म?

आज हम एक ऐसी ही फिल्म के बारे में बात करने जा रहे हैं जो रिलीज के वक्त थिएटर्स में असफल रही थी लेकिन बाद में कल्ट क्लासिक बन गई। इस फिल्म का नाम है कागज के फूल (Kaagaz Ke Phool) जो 1959 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म का निर्देशन गुरु दत्त ने किया था, इसमें गुरु दत्त, मीना कुमारी और वहीदा रहमान (Waheeda Rehman) ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं।

क्या है फिल्म की कहानी

19वीं सदी में ब्रिटिश राज के दौर की पृष्ठभूमि पर आधारित, यह फिल्म गुरु दत्त की कहानी बताती है, जो एक अमीर ज़मींदार रहमान की अकेली पत्नी मीना कुमारी से मिलते हैं। बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म कमर्शियल रूप से असफल रही थी, लेकिन बाद में फिल्म में कलाकारों के अभिनय के लिए समीक्षकों से इसे काफी तारीफ मिली।कागज के फूल’ (Kaagaz Ke Phool) को ‘कल्ट क्लासिक्स’ फिल्मों में गिना जाता है। वहीं आज भी लोग इसे काफी पसंद करते हैं खासकर गुरुदत्त ,मीना कुमारी और वहीदा रहमान के फैंस। यह सिनेमास्कोप में बनी पहली भारतीय फिल्म थी और दत्त द्वारा आधिकारिक तौर पर डायरेक्ट की गई आखिरी फिल्म थी। इसने भारतीय सिनेमैटोग्राफी में एक तकनीकी क्रांति ला दी थी और इसे व्यापक रूप से अपने समय से आगे की फिल्म माना जाता है।

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