हाउस टैक्स हो या फिर सीवर और वाटर टैक्स। हर साल नगर निगम और जलकल विभाग को करोड़ों रुपये का राजस्व मिलता है। जनता की कमाई को ठीक तरीके से खर्च करना चाहिए। अगर स्टडी टूर पर जाना भी है तो पार्षद नया कुछ सीख कर आएंगे। इस बात का ध्यान भी रखना चाहिए।
मगर, दो स्टडी टूर को लिया जाए तो एक भी पार्षद ने टूर में क्या सीखा और शहर में उसका असर दिखना चाहिए। इसकी कोई भी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की। यह गैर बात है कि स्टडी रिपोर्ट देने के बदले पार्षदों ने एजेंसी की कमियों की शिकायत की।
नगर निगम में 100 पार्षद हैं। 28 मार्च को पार्षदों का स्टडी टूर बेंगलुरु, मैसूर ऊटी जा रहा है। सात दिवसीय टूर के लिए अब तक 76 पार्षदों ने पंजीकरण कराया है। आने वाले एक से दो दिन में पार्षदों की संख्या और भी बढ़ सकती है। पार्षद फ्लाइट से आएंगे और यहां से जाएंगे। ऐसे में ओवरऑल 55 लाख रुपये खर्च होंगे।
अगर वर्ष 2021 के टूर की बात की जाए तो 83 पार्षदों के सैर सपाटे पर 34.89 लाख रुपये खर्च हुए थे। पार्षदों का टूर अंडमान और निकोबार द्वीप गया था। वहां से लौटकर आए एक भी पार्षद ने अपनी रिपोर्ट निगम कार्यालय में जमा नहीं की। कुछ यही स्थिति 2024 में मुंबई गए टूर में रही। टूर में 74 पार्षद गए थे।
इसमें 31.77 लाख रुपये खर्च हुए थे। नाम न छापने की शर्त पर भाजपा पार्षद ने बताया कि वर्ष 2021 के टूर में काफी विवाद हुआ था। इसके चलते तीन साल तक टूर नहीं गया। कई पार्षदों ने ड्रामा किया था।
बसपा पार्षद ने बताया कि टूर की मंशा ठीक है। मगर, उसका लाभ शहर को कितना मिला, यह सोचने की जरूरत है। मेयर हेमलता दिवाकर ने बताया कि इस साल 28 मार्च को टूर प्रस्तावित है।
यह है टूर का उद्देश्य
पार्षदों को स्टडी टूर पर ले जाने का उद्देश्य संबंधित शहर के नगर निगम या फिर स्थानीय निकाय में हो रहे अच्छे कार्य की जानकारी करना है। इन कार्यों को आगरा में कितना लागू किया जा सकता है। इस पर बिंदुवार रिपोर्ट तैयार करनी होती है। बैठक में अपने अनुभवों को साझा करना पड़ता है। इससे प्लानिंग में मदद मिलती है।
