वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंजरवेशन प्रोजेक्ट्स बैजूराज एमवी ने बताया नाचने वाले भालू की प्रथा को सालों पहले खत्म कर दिया गया था। लेकिन ऐसे मामले बताते हैं अभी भी भालू को एक व्यापार करने उद्देश्य से प्रयोग किया जा रहा है।