गैस बचाने के चक्कर में सेहत से न करें खिलवाड़, ‘रेडी-टू-ईट’ फूड्स को इन तरीकों से बनाएं हेल्दी

क्या आप भी एलपीजी गैस की किल्लत से परेशान होकर हर महीने आने वाले राशन की सूची में रेडी-टू-ईट और इंस्टेंट फूड पैकेटों की संख्या बढ़ाने की सोच रहे हैं? बता दें कि ऐसे झटपट बनने वाले फूड भले ही ईंधन की बचत करने में सहायक होते हैं, पर इन पर अत्यधिक निर्भरता सेहत को जोखिम में डाल सकती है।

हमें समझना होगा कि इनमें मौजूद प्रिजर्वेटिव, नमक और चीनी की अधिकता पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकती है। पैकेटबंद खानपान के अधिक प्रयोग से मोटापा, फैटी लिवर, हृदयरोग, टाइप-2 डायबिटीज, यहां तक कि

ऐसे फूड में पोषक तत्वों की मात्रा अपेक्षाकृत कम होता है। यदि घर पर इन्हें तैयार करने और खरीदने से पूर्व ही थोड़ी सजगता बरतें तो इनसे होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं।

ऐसे बढ़ाएं अपने भोजन की गुणवत्ता

बाजार से लाकर सीधे खाने के बजाय आप कुछ तरीकों का उपयोग कर अपने भोजन को स्वादिष्ट और पोषणयुक्त बना सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, नूडल्स या पास्ता की बात करें तो आप इनमें बाजार से लाने वाले फ्रोजन या माइक्रोवेव की हुई सब्जियां जैसे ब्रोकली, मटर या गाजर को मिलाकर बनाएं।

इसी प्रकार उबले हुए अंडे, पनीर या टोफू के टुकड़े भी इनमें मिला सकते हैं। इनकी मदद से दैनिक प्रोटीन की भरपाई कर सकते हैं। साथ ही ऐसे पैकेट में आने वाले मसालों के प्रयोग में सावधानी बरतें। जैसे पैकेट के साथ मिले टेस्ट मेकर, जिनमें नमक की मात्रा अधिक होती है, इसलिए उसका कम या आधा ही प्रयोग करें। आप स्वाद और पोषण के लिए हर्ब्स या नींबू का रस या हरा-ताजा धनिया डाल सकते हैं।

सबके लिए उपयुक्त फ्रीजर मील

बाजार से फ्रीज में रखे जाने वाले फूड को लाकर प्रयोग करने बजाय, उन्हें खुद से तैयार करिए, इससे आप कुछ समय के लिए भोजन बनाने की झंझट से मुक्ति पा सकते हैं। हालांकि, हमेशा याद रखें कि यह ईंधन और समय की बचत का तात्कालिक समाधान है।

इन्हें बनाने के लिए भी आवश्यक सावधानी बरतें, अन्यथा कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों जैसे, बुजुर्गों, बच्चे या गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों के लिए यह अधिक नुकसानदेह साबित हो सकता है। दाल तड़का या टमाटर प्याज की ग्रेवी को गाढ़ा बनाकर तैयार करें और एक आइस ट्रे या छोटे कंटेनर में रखकर फ्रीज में रख दें। इसके साथ ही छोले, राजमा या लोबिया को उबालकर उसके अतिरिक्त पानी को सुखाकर जिपलाक बैग में फ्रीज किया जा सकता है।

बच्चों के लिए होममेड नूडल्स सूप

आमतौर पर नूडल्स हर घर की रसोई का अनिवार्य अंग बनता जा रहा है। एलपीजी की कमी के कारण ऐसे उत्पादों की मांग तेज हो गई है। आप चाहें तो नूडल्स को घर में ही तैयार कर सकते हैं। इन्हें कांच की एक जार में रख सकते हैं। इसके लिए पहले एक कांच का जार लें और उसमें थोड़ा सोया सॉस और अदरक लहसुन का पेस्ट डालें।

उसके ऊपर से उबले हुए नूडल्स डालें। आप इन्हें पोषण से भरपूर बनाने के लिए बाजरा या होल व्हीट नूडल्स डाल सकते हैं। इसके बाद में बारीक कटी सब्जियां व पनीर डालें। इसे आप बच्चों को बस ऊपर से गर्म उबलता पानी डालकर तुरंत तैयार कर खिला सकते हैं। आप चाहें तो आफिस में भी कैरी कर सकते हैं।

पोषण से भरे इंस्टेंट मिक्स

बाजार से लाए गए इंस्टेंट मिक्स जैसे, सूप, उपमा या सत्तू आदि को आप घर में ही तैयार कर सकते हैं। इन्हें एक एयरटाइट डिब्बे में रख दें तो 3-4 हफ्ते चल सकते हैं। जैसे, इंस्टेंट उपमा तैयार करना है तो सूजी को राई, करी पत्ता, मूंगफली व सूखी सब्जियों के साथ भूनने के बाद ठंडा करके रख लें।

जब खाना हो तो इसमें गर्म पानी डालें पांच मिनट ढंककर रखें और उनका सेवन करें। इसी तरह आप बहुत आसानी से सत्तू ड्रिंक्स भी बना सकते हैं। इसके लिए भूने हुए चने के सत्तू में जीरा पाउडर व काला नमक मिलाकर रख लें। यह एक बेहतरीन प्रोटीन पेय है। जब पीने का मन हो आपको इसे बस पानी में घोलना है।

स्मार्ट उपभोक्ता और सेहत

इस समय बाजार से रेडी-टू-ईट खाद्य पदार्थ खरीदने के लिए थोड़ा अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। पैकेट पर लिखे न्यूट्रिशन लेबल को ध्यान से पढ़ें। उसमें सोडियम, सेचुरेटेड फैट की मात्रा और चीनी की मात्रा की जांच करें। प्रयास करें कि साबुत अनाज की मात्रा अधिक हो ताकि आपको प्रोटीन व फाइबर मिल सके।

पैकेट पर सामग्री घटते क्रम में सूचीबद्ध होती है। साबुत अनाज, सब्जियां या लीन प्रोटीन यदि पहले तीन अवयव हैं, तो उस पैकेट का चुनें। मैदे के बजाय होल ग्रेन जैसे कि बाजरा का चयन अच्छा है। इसी तरह कई इंस्टेंट फूड में नमक की मात्रा अधिक होती है। इससे बचना है, रेडी टू मील में सोडियम की मात्रा कम होनी चाहिए।

कई जगह चीनी भी अनेक नामों से लिखी होती है, जैसे कार्न सिरप, सुक्रोज, डेक्सट्रोज, इनकी मात्रा का भी ध्यान रखें, यह भी सीमित मात्रा में होनी चाहिए। इसी तरह ट्रांस फैट व हाइड्राजनेटेड तेल वाले उत्पाद भी खरीदने से बचना चाहिए। प्रयास करें कि जैतून के तेल या एवोकाडोवाले तेल वाले खाद्य विकल्प खरीदें।

इन बातों का रहे ध्यान-

  • पैकेट पर एफएसएसएआइ का लोगो और लाइसेंस नंबर की जांच करें।
  • डिब्बा या पाउच से कोई रिसाव या बर्फ के छोटे छोटे कण दिख रहे हैं तो उसे न खरीदें।
  • यदि घर पर आहार स्टोर करना है तो कांच के जार या बीपीए मुक्त कंटेनर में करें।
  • फ्रीजर में रखने से पूर्व उसमें तारीख का लेबल लगा दें, ताकि आप उन्हें समय पर खत्म कर सकें।

चुनौती को ऐसे बनाएं आसान

डॉ. रोहिणी पाटिल, पोषण विशेषज्ञ, मुंबई बताते हैं कि यह सही है कि ईंधन की बचत के लिए लोग वैकल्पिक ईंधन के माध्यमों और बाजार में मिलने वाले तुरंत बनने वाले आहार पर निर्भर होने लगे हैं। पर थोड़ी सी सजगता रहे तो आप इंडक्शन पर दाल-चावल झटपट बना सकते हैं।

भोजन में कार्बहाइड्रेट की मात्रा को नियंत्रित रखना जरूरी है। यह हमारे भोजन का बस 45 प्रतिशत ही होना चाहिए। आपकी थाली में 15 प्रतिशत दालें होनी चाहिए, 10-15 प्रतिशत हेल्दी फैट हों जिन्हें आप बादाम, अखरोट, घी, आलिव आयल से प्राप्त कर सकते हैं।

यह भी अवश्य देखें कि आपके भोजन में 30 से 40 प्रतिशत सब्जियां और फल हैं या नहीं। यदि नहीं हैं तो आप मौसमी फलों का सेवन कर इसकी कमी दूर सकते हैं। ईंधन की कमी को देखते हुए आप इस तरह से आहार प्रबंधन करें तो सामने दिख रही चुनौतियां अधिक जटिल नहीं दिखायी देंगी।

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