ईरान युद्ध के कारण वर्तमान में प्राकृतिक गैस की मांग में कमी आ रही है, क्योंकि सरकारें संकट को कम करने के उपाय लागू कर रही हैं। यदि संघर्ष जारी रहता है, तो यह संरचनात्मक रूप ले सकता है, गैस निर्यातक देशों के फोरम के प्रमुख ने बुधवार को कहा।
पश्चिम एशिया संकट के फरवरी के अंत में शुरू होने के बाद की स्थितियों पर केप्लर डेटा के अनुसार वैश्विक बाजार से 50 करोड़ बैरल से अधिक कच्चे तेल और कंडेन्सेट हटा दिए गए हैं, जो आधुनिक इतिहास में ऊर्जा आपूर्ति की सबसे बड़ी बाधा है।
दुनिया को कितना नुकसान?
खाड़ी देशों की आपूर्ति पर निर्भर देशों ने कोयला जलाने की ओर रुख किया है और वैकल्पिक ऊर्जा साधनों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। पेरिस में अफ्रीकी ऊर्जा में निवेश सम्मेलन में बोलते हुए 70 प्रतिशत गैस भंडार वाले देशों का प्रतिनिधत्व करने वाली संस्था कैप्लर के महासचिव फिलिप म्शेलबिला ने कहा, यदि ईरान युद्ध आज समाप्त हो जाता है तो छह महीने से एक वर्ष के भीतर दुनिया को युद्ध पूर्व की स्थिति प्राप्त हो जाएगी। लेकिन यह युद्ध छह महीने तक चलता है तो जो परिवर्तन का रुख हम देख रहे हैं, वे स्थायी भाव ले सकते हैं।
उन्होंने कहा कि 2026 गैस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण वर्ष होने वाला था, इसमें वैश्विक बाजार में गैस आपूर्ति मांग से अधिक होने वाली थी और इसका लाभ सभी को होना था। लेकिन युद्ध में जिस तरह के वार-प्रतिवार हुए उसने स्थितियों को बदल दिया और अब यह स्थिति लंबे समय तक नहीं आ पाएगी।
बच्चों के खिलौने भी हुए महंगे
ईरान युद्ध ने इस्तेमाल में आने वाली ज्यादातर वस्तुओं को प्रभावित किया है और उनके मूल्यों को बढ़ाया है। बच्चों के खिलौनों में शुमार स्नूगल ग्लोव, बिजिकिंस और वुबलीज के मूल्य भी बढ़ गए हैं। पेट्रोलियम उत्पादों से तैयार होने वाले सिंथेटिक फाइबर, एक्रिलिक और पोलिएस्टर से बनने वाले साफ्ट टाय और अन्य उत्पाद भी महंगे हो गए हैं।
ये खिलौने और उत्पाद अमेरिका, चीन, भारत समेत विश्व के कई देशों में बनते हैं। चूंकि अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरानी तेल-गैस संयंत्रों को नुकसान हुआ है और ईरान के हमलों से पश्चिम एशिया के कई देशों के तेल ठिकानों पर हमले कर उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया है।
