फोन की लत सिर्फ नींद नहीं, आपकी डाइट भी कर रही है बर्बाद; युवाओं में बढ़ रहा ‘ईटिंग डिसऑर्डर’ का खतरा

हम सभी अक्सर यही मानते हैं कि मोबाइल फोन का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल सिर्फ हमारी आंखों को थकाता है या नींद खराब करता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आपके खान-पान की आदतों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है?

हाल ही में ‘जर्नल ऑफ मेडिकल इंटरनेट रिसर्च’ में छपी एक बड़ी रिसर्च ने एक बेहद चिंताजनक खतरे की ओर इशारा किया है। इस अध्ययन के मुताबिक, स्मार्टफोन से चिपके रहने वाले युवाओं में ‘ईटिंग डिसऑर्डर’ के लक्षण तेजी से बढ़ रहे हैं।

किंग्स कॉलेज लंदन का चौंकाने वाला खुलासा

किंग्स कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने अपनी स्टडी में पाया है कि जो लोग दिन के कई घंटे फोन की स्क्रीन पर बिताते हैं, वे मानसिक रूप से ज्यादा परेशान रहते हैं। ऐसे युवाओं में अपने ही शरीर को लेकर असंतोष पैदा होने लगता है। इसके नतीजे में वे अक्सर तनाव में आकर जरूरत से ज्यादा खाने लगते हैं और अपने खान-पान पर से उनका नियंत्रण पूरी तरह खत्म हो जाता है।

हालांकि, विशेषज्ञों ने साफ किया है कि स्मार्टफोन सीधे तौर पर इस बीमारी की वजह नहीं है, लेकिन यह इसे ट्रिगर करने वाला एक बहुत बड़ा ‘जोखिम कारक’ जरूर बन गया है।

7 घंटे से ज्यादा फोन चलाना है खतरे की घंटी

यह अध्ययन काफी बड़े पैमाने पर किया गया था, जिसमें 52 हजार से भी ज्यादा लोगों को शामिल किया गया। आंकड़ों से पता चला कि जो लोग रोजाना 7 घंटे से ज्यादा स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं, उनमें ईटिंग डिसऑर्डर का खतरा सबसे अधिक होता है। इन लोगों में भावनाओं में बहकर बहुत ज्यादा खाना, खाने पर काबू न रख पाना और खाने की लत जैसी गंभीर समस्याएं बहुत आम पाई गईं।

आखिर ऐसा क्यों हो रहा है?

शोधकर्ताओं ने इसके पीछे की मुख्य वजह सोशल मीडिया को बताया है। जब युवा इंटरनेट पर बार-बार दूसरों की ‘परफेक्ट’ या आदर्श शरीर वाली तस्वीरें देखते हैं, तो वे अनजाने में ही अपने शरीर की तुलना उन तस्वीरों से करने लगते हैं। यह बेवजह की तुलना उनके मन में अपने शरीर के प्रति हीन भावना और भारी मानसिक तनाव पैदा करती है। धीरे-धीरे यही तनाव उनकी डाइट और खान-पान की गलत आदतों में बदल जाता है।

किशोरों पर पड़ रहा है सबसे बुरा असर

स्टडी में यह बात भी सामने आई कि इस पूरी समस्या का सबसे खतरनाक प्रभाव टीनएज बच्चों पर पड़ रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह उम्र जीवन का वह अहम पड़ाव है, जब एक इंसान अपनी खुद की पहचान और अपनी सेल्फ-इमेज बना रहा होता है। ऐसे नाजुक समय में लगातार फोन का इस्तेमाल और दूसरों से तुलना उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बन रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *