दुनिया भर में कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। आंकड़ों के अनुसार, 2023 में भारत में कैंसर के लगभग 15 लाख मामले दर्ज हुए थे, जिनमें थ्रोट कैंसर के मरीजों की संख्या भी काफी देखी गई।
हैरान करने वाली बात यह है कि दुनिया भर में ओरल कैविटी कैंसर के सबसे ज्यादा मामले भारत में ही देखने को मिलते हैं।आमतौर पर माना जाता है कि तंबाकू और शराब के कारण गले या मुंह का कैंसर होता है, लेकिन इसका एक कारण एचपीवी (HPV) भी है।
क्या है एचपीवी और यह कैसे फैलता है?
एचपीवी एक ऐसा वायरस है जिसके 200 से ज्यादा प्रकार होते हैं। इनमें से लगभग 40 प्रकार सीधे सेक्शुअल कॉन्टेक्ट के जरिए जेनिटल ऑर्गन्स, गले और मुंह तक फैल सकते हैं। ओरल सेक्स या किसी भी तरह के इंटिमेट फिजिकल कॉन्टेक्ट के जरिए यह वायरस मुंह और गले में प्रवेश कर जाता है।
सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, थ्रोट कैंसर के 60-70% मामलों के पीछे एचपीवी ही जिम्मेदार है। यह वायरस लगभग 10% पुरुषों और 3.6% महिलाओं को प्रभावित करता है। बुजुर्गों में यह इन्फेक्शन और ज्यादा देखने को मिलता है।
हॉलीवुड स्टार का खुलासा
मशहूर अभिनेता माइकल डगलस ने साल 2013 में एक इंटरव्यू के दौरान अपनी बीमारी को लेकर बेबाक खुलासा किया था। साल 2010 में जब उन्हें गले के कैंसर का पता चला, तो उनकी स्थिति जानलेवा थी। बायोप्सी में उनकी जीभ के निचले हिस्से में ट्यूमर मिला, जो स्टेज-4 थ्रोट कैंसर था।
हैरानी की बात यह थी कि डगलस ने अपनी इस स्थिति के लिए धूम्रपान या शराब को जिम्मेदार नहीं ठहराया। उन्होंने बताया कि उनका कैंसर एचपीवी के कारण हुआ था, जो ओरल सेक्स के जरिए फैलता है।
पहचानें थ्रोट कैंसर के लक्षण
- कान में लगातार दर्द होना।
- गले में खराश या गर्दन में गांठ महसूस होना।
- खाना निगलने में दर्द या कठिनाई।
- आवाज में बदलाव और लगातार खांसी।
- बिना किसी कारण के वजन कम होना।
बचाव के लिए क्या करें?
एचपीवी वैक्सीन इस वायरस से सुरक्षा देने में कारगर है। यह सिर्फ महिलाओं के लिए ही नहीं, बल्कि पुरुषों के लिए भी जरूरी है। यह सर्वाइकल कैंसर के साथ-साथ एचपीवी के कारण होने वाले ओरल और थ्रोट कैंसर से भी सुरक्षा देता है। साथ ही, थ्रोट कैंसर का अलग जल्दी पता चल जाए, तो इलाज सफल होने की संभावना बढ़ जाती है।
