क्या है IRGC, जिसके दम पर अमेरिका-इजरायल के सामने नहीं झुक रहा ईरान?

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच 20 दिनों से युद्ध चल रहा है।  इस जंग में ईरान की सबसे मजबूत ढाल इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) है।

IRGC, ईरानी सेना की कोई टुकड़ी नहीं, बल्कि इससे कहीं ज्यादा है। आईआरजीसी के पास सीधे ईरान के सुप्रीम लीडर को रिपोर्ट करने का अधिकार है।

ईरान के पास दो सेनाएं

ईरान के पास दो मुख्य सशस्त्र बल हैं। एक ‘आर्टेश’ (Artesh) जो कि नियमित सेना है। दूसरी ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC), जिसे 1979 की ईरान क्रांति के बाद बनाया गया था।

ईरान की ये दोनों सेनाएं अलग-अलग वर्दी पहनती हैं, अलग-अलग कमांड चेन के तहत काम करती हैं और इनके उद्देश्य भी अलग-अलग होते हैं। आर्टेश और IRGC, दोनों ही सेनाओं के काम करने का तरीका अलग-अलग है।

Artesh के होते हुए क्यों बनी IRGC?

शाह मोहम्मद रजा पहलवी को जब सत्ता से हटाया गया, तो ईरान के नए नेताओं को मौजूदा सेना पर पूरी तरह भरोसा नहीं था। नियमित सेना ने राजशाही की सेवा की थी।

शाह मोहम्मद रजा पहलवी को नाजुक दौर में, परंपरा से ज्यादा वफादारी मायने रखती थी। सरकार की वफादारी के लिए IRGC का गठन किया गया।

शुरुआत में, यह एक छोटा-सा रक्षक बल था। 1980 के दशक में जब ईरान-इराक युद्ध छिड़ गया, तो इस संघर्ष ने संगठन को और मजबूत बनाया। IRGC के सदस्यों की संख्या बढ़ाई और उसे नए इस्लामिक गणराज्य का एक मुख्य स्तंभ बना दिया गया।

IRGC का क्या है मिशन?

  • IRGC के पास इस्लामिक व्यवस्था की सुरक्षा का जिम्मा है।
  • IRGC ही ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम की देखरेख करता है।
  • यह ‘कुद्स फ़ोर्स’ (Quds Force) को नियंत्रित करता है, जो ईरान की सीमाओं के बाहर होने वाले अभियानों का प्रबंधन करती है।
  • ईरान की ये आर्मी ‘बसीज’ (Basij) की भी कमान संभालती है, जो देश के भीतर सक्रिय स्वयंसेवकों का एक अर्धसैनिक नेटवर्क है।
  • IRGC की सबसे अहम बात यह है कि यह सीधे ईरान के सुप्रीम लीडर को रिपोर्ट करते हैं।

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