लाल सिलेंडर वाली LPG और पीले पाइप वाली PNG में क्या है फर्क? गैस संकट के बीच दूर करें हर कन्फ्यूजन

 पूरी दुनिया में इन दिनों ईरान-इजरायल के बीच जारी युद्ध चर्चा में है। दोनों देशों के बीच जारी इस युद्ध का भले ही हम पर सीधा असर नहीं पड़ रहा है, लेकिन यह हालात हमारी रसोई को काफी प्रभावित कर रही है

दरअसल, इस युद्ध के चलते पूरी दुनिया के एनर्जी मार्केट की रफ्तार धीमी हो रही है। युद्ध के कारण कच्चे तेल और गैस की किल्लत होने लगी है। खुद भारत में हालात चिंताजनक बने हुए है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी (LPG) आयातक है, ऐसे में गैस की किल्लत के चलते लोगों का घबराना लाजमी है।

बात जब भी गैस की आती है, जो अक्सर कई तरह के नाम सुनने को मिलते हैं। LPG, CNG, PNG और LNG, सब गैसें ही हैं, लेकिन फिर भी इन सबके काफी अंतर है, जिसके बारे में काफी कम लोगों को ही पता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे क्या है इन चारों का मतलब और कौन-सी गैस किस काम आती है।

LPG (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस)

इस गैस के बारे में, तो लगभग सभी ने सुना होगा। यह हमारे घरों में इस्तेमाल होने वाली रसोई गैस है, जो लाल रंग के सिलेंडरों में आती है। यह कच्चे तेल को रिफाइन करने के दौरान बनती है। साथ ही जब नेचुरल गैस को प्रोसेस किया जाता है, तो इस दौरान भी LPG निकलती है।

LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस)

जब नेचुरल गैस को बहुत ज्यादा ठंडा (लगभग -162°C) किया जाता है, तो वह पानी की तरह लिक्विड बन जाती है। ऐसा इसलिए किया जाता है, ताकि इसे बड़े जहाजों में भरकर आसानी से एक देश से दूसरे देश भेजा जा सके। भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एलएनजी आयातक है। हालांकि यह गैस सीधे हमारे घरों में नहीं आती, लेकिन यह पाइपलाइनों और उद्योगों को चलाने का मुख्य आधार है।

PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस)

पिछले कुछ समय से इस गैस का इस्तेमाल भी कई घरों में होने लगा है। यह वही पीले पाइप वाली गैस है, जो कई घरों में सिलेंडर की जगह ले चुकी है। यह मीथेन गैस है, जो बिना सिलेंडर के, सीधे पाइपलाइन के जरिए हमारी रसोई तक पहुंचती है। इसका बिल बिजली के बिल की तरह मीटर से आता है। सरकार देश भर में इसका नेटवर्क तेजी से बढ़ा रही है।

CNG (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस)

यह गैस पेट्रोल और डीजल का एक सस्ता और साफ-सुथरा विकल्प है, जो गाड़ियों में इस्तेमाल होती है। जैसा कि नाम से पता चलता है, इसे हाई प्रेशर में कंप्रेस्ड किया जाता है, जिससे वाहन के ईंधन टैंक में कम जगह में इसकी ज्यादा मात्रा स्टोर की जा सके।

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