बातचीत का तरीका बदलेंगे, तो अपने आप सुधर जाएगी इमेज; 10 बातें अपनी डिक्शनरी से आज ही करें डिलीट

क्या कभी आपको ऐसा महसूस होता है कि लोग आपसे बात करने से कतराने लगे हैं या आपके मैसेज का जवाब देने में देर करते हैं? अक्सर हम सोचते हैं कि हम तो सब सही कर रहे हैं, लेकिन अनजाने में हमारी बातचीत का तरीका ही हमारी ‘इमेज’ का दुश्मन बन जाता है।

अच्छी पर्सनालिटी सिर्फ बढ़िया ड्रेसिंग सेंस से ही नहीं, बल्कि सुलझी हुई बातचीत से बनती है। अगर आप चाहते हैं कि हर कोई आपकी कंपनी पसंद करे, तो अपनी ‘लाइफ की डिक्शनरी’ से नीचे दी गई इन 10 बातों को आज ही हमेशा के लिए डिलीट कर दें (Communication Mistakes To Avoid)।

दूसरों की परेशानियों को छोटा समझना

जब कोई अपनी परेशानी आपसे शेयर करे, तो उसे कम करके न आंकें। दूसरों की समस्याओं को छोटा बताने से सामने वाले को लगता है कि आपको उनकी परवाह नहीं है। एक अच्छे श्रोता बनें और उनकी भावनाओं की कद्र करें।

दोस्तों को मैसेज के जाल में फंसाना

अपने दोस्तों को ऐसे मैसेज भेजना बंद करें जिससे वे फंस जाएं या उन्हें जवाब देने में अनकम्फर्टेबल फील हो। बातचीत को सिंपल और क्लियर रखें, ताकि आपके दोस्त आपसे बात करने में खुशी महसूस करें, न कि दबाव।

विवाद की गलत वजह निकालना

अक्सर हम झगड़े या बहस की असली वजह को नहीं समझ पाते और गलत चीजों पर फोकस करने लगते हैं। किसी भी विवाद को सुलझाने के लिए जरूरी है कि आप पहले यह समझें कि असल समस्या क्या है, न कि हवा में तीर चलाएं।

अलग विचारों को स्वीकार न कर पाना

हर किसी की सोच अलग होती है। अगर कोई आपसे सहमत नहीं है, तो उससे लड़ना या परेशान होना छोड़ें। मतभेदों को सहजता से स्वीकार करना एक सुलझे हुए इंसान की पहचान है।

झूठी उम्मीदें देना

रिश्तों में ‘ब्रेडक्रंबिंग’ यानी किसी को थोड़ी-थोड़ी अटेंशन देकर अटकाए रखना बहुत बुरी आदत है। अगर आप किसी रिश्ते या काम में दिलचस्पी नहीं रखते, तो स्पष्ट रहें। किसी को झूठी उम्मीदों में न रखें।

पब्लिक में वीडियो कॉल करना

सार्वजनिक जगहों पर जोर-जोर से वीडियो कॉल पर बात करना न केवल दूसरों को परेशान करता है, बल्कि आपकी इमेज को भी ‘नॉन-सीरियस’ बनाता है। इसलिए, हमेशा अपनी बातचीत को पर्सनल ही रखें।

कड़वी बातों को ‘ईमानदारी’ का नाम देना

कई लोग बहुत कड़वा बोलते हैं और कहते हैं, “मैं तो बस ईमानदार हूं।” याद रखें, ईमानदारी और बदतमीजी में फर्क होता है। अपनी बात रखें, लेकिन शब्दों का चयन ऐसा हो जिससे दूसरों का दिल न दुखे।

एआई पर हद से ज्यादा निर्भर होना

आजकल लोग बातचीत या काम में आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) का बहुत इस्तेमाल करने लगे हैं, लेकिन जब इंसानी रिश्तों और जज्बातों की बात हो, तो अपने शब्दों और दिमाग का इस्तेमाल करें, मशीन का नहीं।

मैसेज देखकर जवाब न देना

किसी का मैसेज पढ़ लेना और फिर जानबूझकर जवाब न देना, सामने वाले का अपमान करने जैसा है। अगर आप बिजी हैं, तो बाद में जवाब दें, लेकिन इग्नोर करने की आदत छोड़ें।

हर खामोशी को भरने की कोशिश करना

बातचीत के दौरान बीच में आने वाली चुप्पी हमेशा बुरी नहीं होती। हर खामोशी को शब्दों से भरने की कोशिश न करें। कभी-कभी शांत रहना भी बातचीत को गहरा और अर्थपूर्ण बनाता है। वरना फिजूल की बातों से रिश्ते और बिगड़ जाते हैं।

इन छोटी-छोटी आदतों को सुधारकर आप न केवल एक बेहतर कम्युनिकेटर बन सकते हैं, बल्कि लोगों के दिलों में अपने लिए खास जगह भी बना सकते हैं।

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