बिना सात फेरों के भी हुई रश्मिका-विजय की शादी! जानिए कोडवा और तेलुगु वेडिंग की ये अनोखी रस्में

 इंटरनेट पर हर जगह मशहूर सेलिब्रिटी कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा की तस्वीरें छाई हुई हैं। कपल ने अपने आठ साल लंबे रिलेशन के बाद 26 फरवरी को सात फेरे लिए। सोशल मीडिया पर उनकी शादी की तस्वीरें सामने आते ही वायरल हो गईं।

इन तस्वीरों को देख हर कोई उनके आउटफिट्स, जूलरी और लुक्स की बात कर रहे थे, लेकिन इसके अलावा जिस चीज ने सबका ध्यान अपनी तरफ खींचा, वह था शादी के दौरान हुई सांस्कृतिक परंपराएं। रश्मिका और विजय ने अपने-अपने ट्रेडिशनल के मुताबिक दो अलग-अलग रीति-रिवाजों से शादी की। आज इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे क्या है ‘तेलुगु’ और ‘कोडवा’ रीति-रिवाजों के बारे में।

क्या है पारंपरिक तेलुगु शादी?

पारंपरिक तेलुगु शादी में मुख्य रूप से दिन में सभी रस्में निभाई जाती है।  यह मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की परंपराओं से जुड़ी शादी है, जो पूरी तरह से वैदिक रीति-रिवाजों पर आधारित होती है। इसे आमतौर पर पंडित जी संस्कृत मंत्रों के साथ सुबह के शुभ मुहूर्त में संपन्न कराते हैं। इसमें मंडप को आम के पत्तों और फूलों से सजाया जाता है।

तेलुगु शादी की मुख्य रस्में

  • जीलाकर्रा बेल्लम (जीरा और गुड़): इस रस्म के दौरान दूल्हा-दुल्हन एक-दूसरे के सिर पर जीरा और गुड़ का लेप लगाते हैं। यह रस्म इस बात का प्रतीक होती है कपल जीवन के सुख-दुख के पलों में एक साथ रहेंगे।
  • मंगलसूत्र: इसमें दूल्हा, दुल्हन के गले में तीन गांठों वाला मंगलसूत्र बांधता है, जो उम्र भर साथ निभाने का वादा होता है।
  • तालम्ब्रालु: इस रस्म में कपल एक-दूसरे के सिर पर हल्दी वाले चावल डालते हैं। इसे खुशहाली और संपन्नता का प्रतीक माना जाता है।
  • सप्तपदी यानी सात फेरे: इसमें पवित्र अग्नि को साक्षी मानकर दोनों एक साथ सात कदम चलते हैं और जीवन भर साथ निभाने के सात वचन लेते हैं

कोडवा शादी की रस्में?

कर्नाटक के कूर्ग (Coorg) इलाके में होने वाली कोडवा शादियां वैदिक शादियों से बिल्कुल अलग होती हैं। इन शादियों में पंडितों या मंत्रों की बजाय परिवार और समुदाय की अहम भूमिका होती है। यह शादी अक्सर शाम के समय होती है।

कोडवा शादी की मुख्य विशेषताएं

  • फेरे नहीं होते: इस शादी में पवित्र अग्नि या फेरे नहीं होते। यह समारोह परिवार और बुजुर्गों की मौजूदगी में ही संपन्न माना जाता है।
  • वरमाला: दूल्हा और दुल्हन बस एक-दूसरे को माला पहनाते हैं, जो आपसी सहमति का प्रतीक है।
  • कूर्गी पहनावा: इसमें दुल्हन का पहनावा बहुत खास होता है। वह कूर्गी स्टाइल में साड़ी पहनती है, जिसकी प्लीट्स पीछे की तरफ होती हैं और पल्लू कंधे पर पिन किया जाता है।
  • बुजुर्गों का आशीर्वाद (ओक्का): इसमें ‘ओक्का’ यानी परिवार के कुल या कुनबे की भूमिका सबसे बड़ी होती है। बुजुर्ग ही जोड़े को आशीर्वाद देकर परंपरा को आगे बढ़ाते हैं।
  • पूर्वजों का सम्मान: कोडवा एक योद्धा समुदाय रहा है, इसलिए शादी में कई बार पारंपरिक हथियारों को प्रदर्शित किया जाता है ताकि पूर्वजों के गौरव को याद किया जा सके। 

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