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इंडिया-न्यूजीलैंड के बीच FTA पर हस्ताक्षर… भारत के कई सामानों पर ड्यूटी घटकर हुई जीरो; क्या सस्ता और क्या महंगा हुआ?

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भारत और न्यूजीलैंड के बीच सोमवार को मुक्त व्यापार समझौता (FTA) पर मुहर लग दी गई। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले की मौजूदगी में FTA पर हस्ताक्षर किया गया। इस समझौते से दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों के काफी मजबूत होने की उम्मीद है।

इसका मकसद द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना, भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच देना और अगले 15 सालों में 20 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित करना है। इसके साथ ही इस डील से उन बाकी रुकावटों को भी कम करना है, जो इन दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश पर असर डाल सकती हैं।

मालूम हो कि, मुक्त व्यापार समझौता दो या ज्यादा देशों के बीच एक समझौता होता है, जिसके तहत वे व्यापार की जाने वाली चीजों की एक बड़ी रेंज पर सीमा शुल्क को खत्म करने या काफी कम करने पर सहमत होते हैं।

चमड़ा उद्योग को मिलेगा बढ़ावा

वहीं, हस्ताक्षर से पहले गोयल ने रविवार को कहा था कि, न्यूजीलैंड के साथ मुक्त व्यापार समझौता भारतीय व्यवसायों के लिए, जिसमें आगरा में मौजूद चमड़ा निर्यातक भी शामिल हैं; उनके लिए बड़े मौके खोलेगा। गोयल ने आगे कहा कि, भारत से न्यूजीलैंड भेजी जाने वाली चीजें बिना किसी आयात शुल्क के बाजार में पहुंचेंगी, जिससे आगरा के चमड़ा उद्योग जैसे क्षेत्रों के लिए विकास के बड़े मौके पैदा होंगे।

उन्होंने आगे कहा कि यह समझौता दोनों तरफ के व्यापार को और बढ़ाएगा, जो अभी लगभग 2.4 अरब डॉलर का है। इस दौरान वह न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले के साथ आगरा में थे। अपनी यात्रा के दौरान, दोनों मंत्रियों ने चमड़ा और खेल के सामान सहित कई क्षेत्रों के उद्योग प्रतिनिधियों से बातचीत की।

भारत-न्यूजीलैंड FTA की मुख्य बातें

भारत-न्यूजीलैंड व्यापार समझौते के लिए बातचीत असल में 2010 में शुरू हुई थी। चर्चा के नौ दौर के बाद, 2015 में बातचीत रोक दी गई थी। इसके बाद, मार्च 2025 में फिर से बात शुरू हुई। जो इस प्रक्रिया की एक नई शुरुआत थी। बातचीत के सफल नतीजे का एलान 22 दिसंबर 2025 को किया गया।

इस समझौते में 20 अध्याय हैं, जिनमें चीजों का व्यापार, मूल के नियम, सेवाएं, सीमा शुल्क प्रक्रियाएं और व्यापार में आसानी, स्वच्छता और व्यापार में तकनीकी रुकावटें, व्यापार उपचार, विवाद समाधान और कानूनी ढांचे जैसे मुख्य क्षेत्र शामिल हैं।

भारत के लिए, यह समझौता काफी फायदेमंद हो सकता है। न्यूजीलैंड को होने वाले सभी भारतीय निर्यात, जिनमें कपड़ा, प्लास्टिक, चमड़ा और इंजीनियरिंग के सामान जैसे ज्यादा मजदूरी वाले उद्योगों की चीजें भी शामिल हैं, उसको शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। न्यूजीलैंड का औसत आयात शुल्क (import tariff) अभी सिर्फ 2.3 प्रतिशत है। न्यूजीलैंड ने अगले 15 सालों में भारत में 20 अरब डॉलर का निवेश करने का भी वादा किया है।

न्यूजीलैंड में काम करने के मिलेंगे अवसर

सेवाओं के क्षेत्र में, भारत ने कई ज़्यादा कीमत वाले सेक्टरों में बाज़ार तक पहुंचने की गारंटी हासिल की है, जिनमें सूचना प्रौद्योगिकी और IT-आधारित सेवाएं, पेशेवर सेवाएं, शिक्षा, वित्तीय सेवाएं, पर्यटन, निर्माण और कई दूसरी व्यावसायिक सेवाएं शामिल हैं।

यह समझौता अस्थायी रोजगार प्रवेश वीजा (Temporary Employment Entry Visa) के जरिए कुशल भारतीय पेशेवरों के लिए नए अवसर भी पैदा करता है। इस रास्ते से कुशल पेशों में लगे 5,000 तक भारतीय पेशेवर एक समय में तीन साल तक न्यूजीलैंड में रह और काम कर सकेंगे।

इसके अलावा, भारत से निर्यात होने वाली वाइन और स्पिरिट को न्यूजीलैंड के बाजार में बिना किसी शुल्क के पहुंच मिलेगी। साथ ही, न्यूजीलैंड से आयात होने वाली वाइन भारत में रियायती शुल्क दरों पर आएगी, और इन शुल्कों को 10 साल की अवधि में धीरे-धीरे कम किया जाएगा। न्यूजीलैंड के लिए, यह समझौता भारतीय बाजार तक काफी हद तक पहुंच देता है।

कृषि उत्पादों पर भी मिलेंगी रियायतें

ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत के व्यापार समझौते में अपनाए गए तरीके के आधार पर, भारत ने न्यूजीलैंड के लिए अपनी 70 प्रतिशत शुल्क श्रेणियां (tariff lines) खोल दी हैं। भारत ने सेब, कीवी फल, मानुका शहद और एल्ब्यूमिन (दूध एल्ब्यूमिन सहित) जैसे कृषि उत्पादों पर भी शुल्क में रियायतें दी हैं।

हालांकि, ये फायदे कोटा सीमा और न्यूनतम आयात मूल्य की शर्तों के अधीन होंगे। इसके अलावा, लोहा, स्टील और स्क्रैप एल्युमीनियम के कई उत्पादों पर शुल्क को 10 साल तक की अवधि में धीरे-धीरे खत्म कर दिया जाएगा। साथ ही, भारत ने कई संवेदनशील सेक्टरों में शुल्क में रियायतें न देकर अपने घरेलू हितों की रक्षा की है।

बाहर रखी गई चीजों की सूची में दूध, क्रीम, दही और चीज जैसे डेयरी उत्पाद हैं, भेड़ के मांस के अलावा अन्य पशु उत्पाद; और प्याज, चना, मटर, मक्का और बादाम सहित कई तरह के वनस्पति उत्पाद शामिल हैं। चीनी, कृत्रिम शहद, और पशु, वनस्पति या सूक्ष्मजीवों से मिलने वाले वसा और तेल भी इस सूची से बाहर हैं।

इसके अलावा इन चीजों की सूची में हथियार और गोला-बारूद, रत्न और आभूषण, तांबा और तांबे के उत्पाद जैसे कैथोड, कारतूस, रॉड, बार और कॉइल, साथ ही एल्युमीनियम और उससे जुड़े उत्पाद जैसे इंगट, बिलेट और वायर बार भी शामिल हैं।

दोनों देशों के बीच माल का व्यापार 2024-25 में 1.3 अरब डॉलर का था। भारत ने 711.1 मिलियन डॉलर मूल्य का सामान निर्यात किया, जबकि इसी अवधि के दौरान न्यूजीलैंड से आयात 587.13 मिलियन डॉलर रहा।

क्या है ‘टेक्स्ट नेक’ और ‘पिंकी फिंगर’ सिंड्रोम? बिना ब्रेक फोन चलाने वालों को डॉक्टर दे रहे चेतावनी

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आज की डिजिटल दुनिया में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा बन गया है। सुबह उठकर नोटिफिकेशन देखने से लेकर रात को सोने से पहले सोशल मीडिया स्क्रॉल करने तक, हमारी नजरें स्क्रीन पर ही टिकी रहती हैं।

हालांकि, क्या आप जानते हैं कि आपकी यह आदत आपके शरीर को धीरे-धीरे कितना नुकसान पहुंचा रही है? जी हां, पीएसआरआई अस्पताल, दिल्ली के हेड फिजियोथेरेपी, लक्ष्य भक्तियानी के मुताबिक, गलत तरीके से फोन के इस्तेमाल के कारण आजकल दो नई समस्याएं तेजी से फैल रही हैं- “टेक्स्ट नेक सिंड्रोम” और “पिंकी फिंगर सिंड्रोम”।

क्यों होता है ‘टेक्स्ट नेक सिंड्रोम’?

यह समस्या तब शुरू होती है जब हम अपना सिर नीचे झुकाकर लगातार फोन चलाते हैं। सामान्य तौर पर हमारे सिर का वजन 4 से 5 किलो होता है, लेकिन जब हम स्क्रीन देखने के लिए अपनी गर्दन झुकाते हैं, तो हमारी गर्दन पर यह दबाव कई गुना बढ़कर 20 से 25 किलो तक पहुंच जाता है।

इस भारी दबाव की वजह से गर्दन में जकड़न, दर्द, सिरदर्द और यहां तक कि रीढ़ की हड्डी पर भी बुरा असर पड़ता है। अगर आप अपनी इस आदत को नहीं सुधारते, तो भविष्य में यह साधारण दर्द एक गंभीर ‘क्रॉनिक पेन’ में बदल सकता है।

क्या है ‘पिंकी फिंगर सिंड्रोम’?

अक्सर हम एक हाथ से फोन चलाते समय मोबाइल का पूरा वजन अपनी सबसे छोटी उंगली यानी पिंकी फिंगर पर टिका देते हैं। लंबे समय तक ऐसा करने से उंगली में सुन्नपन, दर्द या हल्का टेढ़ापन आ सकता है। कुछ मामलों में यह हाथ की नसों और मांसपेशियों पर भी गहरा दबाव डालता है, जिससे काफी असहजता महसूस होती है।

क्या है इन समस्याओं की मुख्य वजह?

इन दोनों समस्याओं का सबसे बड़ा कारण है- लगातार गलत पोश्चर में फोन का इस्तेमाल करना। बिना कोई ब्रेक लिए घंटों तक एक ही पोजीशन में बैठकर स्क्रीन देखना शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक है। खासकर युवाओं और नौकरीपेशा लोगों में यह समस्या सबसे ज्यादा देखी जा रही है, क्योंकि उनका ‘स्क्रीन टाइम’ सामान्य से काफी ज्यादा होता है।

बचाव के आसान और असरदार तरीके

इन समस्याओं से बचने के लिए आपको अपनी आदतों में कुछ छोटे बदलाव करने होंगे:

  • फोन को आंखों के सामने रखें: कोशिश करें कि फोन चलाते समय आपकी गर्दन ज्यादा न झुके। फोन को हमेशा अपने आई-लेवल पर रखकर इस्तेमाल करें।
  • छोटे ब्रेक और स्ट्रेचिंग: घंटों तक लगातार फोन न चलाएं। हर 20 से 30 मिनट में एक छोटा ब्रेक लें और अपनी गर्दन व कंधों की हल्की स्ट्रेचिंग करें।
  • फोन पकड़ने का तरीका बदलें: मोबाइल का पूरा वजन अपनी छोटी उंगली पर न डालें। फोन पकड़ने के लिए अपने दोनों हाथों का इस्तेमाल करें या ‘फोन होल्डर’ की मदद लें।
  • अपनाएं डिजिटल डिटॉक्स: सबसे जरूरी है कि आप अपना स्क्रीन टाइम कम करें और ‘डिजिटल डिटॉक्स’ को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।

हॉलीवुड फिल्म नहीं, ये है हकीकत: समंदर के बीचों-बीच पैदल चलते हैं लोग, साल में 2 बार ही मिलता है मौका

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जरा सोचिए, आप लहरों से भरे विशाल समुद्र के बीचों-बीच टहल रहे हों। पढ़ने में यह किसी हॉलीवुड फिल्म का सीन लग सकता है, लेकिन साउथ कोरिया में कुदरत सच में कुछ ऐसा ही कमाल दिखाती है।

जी हां, यहां के जिंदो द्वीप पर समुद्र का पानी अचानक से पीछे खिसक जाता है और लहरों के बीच से एक लंबी, सूखी राह उभर आती है। ‘Jindo Miracle’ के नाम से मशहूर यह रास्ता जिंदो द्वीप को पास के मोटो और सेओडो द्वीपों से जोड़ देता है।

सिर्फ 40 मिनट का मेहमान है यह रास्ता

प्रकृति का यह जादुई शो हमेशा के लिए नहीं रुकता। समंदर के बीच बनी यह सड़क महज 40 से 60 मिनट तक ही दिखाई देती है। एक घंटे से भी कम समय में पानी की लहरें दोबारा लौट आती हैं और यह रास्ता हमेशा-हमेशा के लिए गायब हो जाता है। इसलिए, इस रोमांचक पल का गवाह बनने के लिए सही समय पर वहां मौजूद होना बहुत जरूरी है, और यही वजह है कि इसे देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ती है।

कोई जादू नहीं, विज्ञान का है खेल

भले ही लोग इसे चमत्कार मानते हों, लेकिन असल में इसके पीछे पूरी तरह से विज्ञान छिपा है। यह सब समुद्र के ज्वार-भाटे के कारण होता है। जब सूरज और चांद एक विशेष स्थिति में आते हैं, तो उनके खिंचाव से पानी तेजी से पीछे की तरफ चला जाता है। इसके साथ ही, जिंदो द्वीप की भौगोलिक बनावट भी कुछ इस तरह की है कि पानी के हटते ही समुद्र की सतह एक सड़क की तरह ऊपर उभर कर आ जाती है।

साल में 2 बार जमता है मेले का रंग

यह अनोखी घटना दुनिया में बहुत कम देखने को मिलती है और साल में सिर्फ दो बार ही होती है- एक बार वसंत (मार्च-अप्रैल) में और दूसरी बार पतझड़ यानी सितंबर-अक्तूबर के महीने में। इस दौरान पूरा इलाका एक उत्सव में बदल जाता है और यहां ‘जिंदो मिरेकल फेस्टिवल’ मनाया जाता है।

समुद्र के बीच चलते हुए लोग अपने कैमरों में इस नजारे को कैद करते हैं। रास्ते में आम दिनों में पानी के नीचे छिपे रहने वाले शंख, सीपियां और समुद्री जीव भी देखने को मिलते हैं। स्थानीय नाच-गाने और लजीज पकवान इस एक्सपीरिएंस को और भी खास बना देते हैं।

कैसे पहुंचें समुद्र के बीच बने इस अनोखे रास्ते तक?

यहां तक पहुंचना अब पर्यटकों के लिए काफी आसान है। आप ग्वांगजू शहर से सड़क मार्ग से सीधे यहां आ सकते हैं या फिर मोकपो तक ट्रेन का सफर करके आगे नाव से द्वीप तक पहुंच सकते हैं। यहां पहुंचने पर भीड़ और साइनबोर्ड आपको खुद-ब-खुद उस जगह तक ले जाते हैं।

समुद्र के इस रहस्य के अलावा, जिंदो द्वीप अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी मशहूर है। शांत किनारे, हरियाली से ढके पहाड़ और बेहतरीन ट्रेकिंग रूट्स सैलानियों को खूब लुभाते हैं। इसके अलावा, यह जगह अपनी बहादुरी के लिए पहचाने जाने वाले ‘जिंदो डॉग्स’ का भी घर है, जहां इन कुत्तों से जुड़ा एक खास म्यूजियम भी मौजूद है। कुल मिलाकर, यह एक ऐसा अनुभव है जो हमें बताता है कि हमारी दुनिया कितने अनसुलझे और खूबसूरत रहस्यों से भरी है।

सिर्फ 40 मिनट का मेहमान है यह रास्ता

प्रकृति का यह जादुई शो हमेशा के लिए नहीं रुकता। समंदर के बीच बनी यह सड़क महज 40 से 60 मिनट तक ही दिखाई देती है। एक घंटे से भी कम समय में पानी की लहरें दोबारा लौट आती हैं और यह रास्ता हमेशा-हमेशा के लिए गायब हो जाता है। इसलिए, इस रोमांचक पल का गवाह बनने के लिए सही समय पर वहां मौजूद होना बहुत जरूरी है, और यही वजह है कि इसे देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ती है।

कोई जादू नहीं, विज्ञान का है खेल

भले ही लोग इसे चमत्कार मानते हों, लेकिन असल में इसके पीछे पूरी तरह से विज्ञान छिपा है। यह सब समुद्र के ज्वार-भाटे के कारण होता है। जब सूरज और चांद एक विशेष स्थिति में आते हैं, तो उनके खिंचाव से पानी तेजी से पीछे की तरफ चला जाता है। इसके साथ ही, जिंदो द्वीप की भौगोलिक बनावट भी कुछ इस तरह की है कि पानी के हटते ही समुद्र की सतह एक सड़क की तरह ऊपर उभर कर आ जाती है।

साल में 2 बार जमता है मेले का रंग

यह अनोखी घटना दुनिया में बहुत कम देखने को मिलती है और साल में सिर्फ दो बार ही होती है- एक बार वसंत (मार्च-अप्रैल) में और दूसरी बार पतझड़ यानी सितंबर-अक्तूबर के महीने में। इस दौरान पूरा इलाका एक उत्सव में बदल जाता है और यहां ‘जिंदो मिरेकल फेस्टिवल’ मनाया जाता है।

समुद्र के बीच चलते हुए लोग अपने कैमरों में इस नजारे को कैद करते हैं। रास्ते में आम दिनों में पानी के नीचे छिपे रहने वाले शंख, सीपियां और समुद्री जीव भी देखने को मिलते हैं। स्थानीय नाच-गाने और लजीज पकवान इस एक्सपीरिएंस को और भी खास बना देते हैं।

कैसे पहुंचें समुद्र के बीच बने इस अनोखे रास्ते तक?

यहां तक पहुंचना अब पर्यटकों के लिए काफी आसान है। आप ग्वांगजू शहर से सड़क मार्ग से सीधे यहां आ सकते हैं या फिर मोकपो तक ट्रेन का सफर करके आगे नाव से द्वीप तक पहुंच सकते हैं। यहां पहुंचने पर भीड़ और साइनबोर्ड आपको खुद-ब-खुद उस जगह तक ले जाते हैं।

समुद्र के इस रहस्य के अलावा, जिंदो द्वीप अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी मशहूर है। शांत किनारे, हरियाली से ढके पहाड़ और बेहतरीन ट्रेकिंग रूट्स सैलानियों को खूब लुभाते हैं। इसके अलावा, यह जगह अपनी बहादुरी के लिए पहचाने जाने वाले ‘जिंदो डॉग्स’ का भी घर है, जहां इन कुत्तों से जुड़ा एक खास म्यूजियम भी मौजूद है। कुल मिलाकर, यह एक ऐसा अनुभव है जो हमें बताता है कि हमारी दुनिया कितने अनसुलझे और खूबसूरत रहस्यों से भरी है।

क्रिस्टी को हराकर गफ प्री क्वार्टर फाइनल में पहुंची, तबीयत बिगड़ने के बावजूद दिखाया शानदार खेल

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विश्व नंबर-3 कोको गफ ने शानदार वापसी करते हुए रोमानिया की सोराना क्रिस्टी को हराकर मैड्रिड ओपन के प्री क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। पिछले साल इस टूर्नामेंट की उपविजेता रहीं 22 वर्षीय अमेरिकी खिलाड़ी ने एक सेट और ब्रेक से पिछड़ने के बाद जबरदस्त जुझारूपन दिखाते हुए 4-6, 7-5, 6-1 से जीत दर्ज की।

अब उनका मुकाबला 13वीं वरीयता प्राप्त लिंडा नोस्कोवा से होगा। 25वीं वरीयता प्राप्त क्रिस्टी ने मुकाबले की शानदार शुरुआत की। उन्होंने पहले सेट में शुरुआती ब्रेक लिया और गफ के 4-4 की बराबरी करने के बावजूद नियंत्रण बनाए रखा। रोमानियाई खिलाड़ी ने फिर दोबारा ब्रेक लेकर 6-4 से पहला सेट अपने नाम किया।

दूसरे सेट में भी रहा क्रिस्टी का दबदबा

दूसरे सेट में भी क्रिस्टी का दबदबा जारी रहा। उन्होंने जल्दी ही 2-0 की बढ़त बना ली और बाद में 4-3 से आगे निकल गईं। लेकिन गफ ने हार नहीं मानी। मैच के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें मेडिकल सहायता लेनी पड़ी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने शानदार वापसी करते हुए स्कोर बराबर कर दिया। दबाव के क्षणों में बेहतरीन संयम दिखाते हुए गफ ने दूसरे सेट के 12वें गेम में ब्रेक हासिल किया और मुकाबले को निर्णायक सेट तक पहुंचा दिया।

तीसरे सेट में लय पूरी तरह उनके पक्ष में थी। 1-1 की बराबरी के बाद उन्होंने लगातार पांच गेम जीतकर दो घंटे 21 मिनट में मैच अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ गफ ने क्रिस्टी के विरुद्ध अपना हेड-टू-हेड रिकार्ड 3-0 कर लिया और खास बात यह रही कि तीनों जीत तीन सेटों में आई हैं।

एथलेटिक्‍स की दुनिया में चमत्‍कार! केन्‍या के Sebastian Sawe ने 2 घंटे के अंदर पूरी की मैरानथन, वर्ल्‍ड रिकॉर्ड बनाया

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 केन्‍या के सेबास्टियन सावे ने लंदन मैराथन में इतिहास रच दिया। सावे दुनिया के पहले धावक बने, जिन्‍होंने आधिकारिक रेस परिस्थितियों में दो घंटे की बाधा को तोड़ दिया। उन्‍होंने 1:59:30 के समय में मैराथन की दौड़ पूरी करते हुए वर्ल्‍ड रिकॉर्ड बनाया।

सावे से पहले केन्‍या के केल्विन किपटुम के नाम यह रिकॉर्ड दर्ज था, जिन्‍होंने 2023 में शिकागो में 2:30:35 के समय में मैराथन पूरी की थी। सावे कानूनन दो घंटे के अंदर मैराथन की दौड़ पूरी करने वाले पहले धावक बने। उन्‍होंने 2019 में इलियुड किपचोगे के प्रदर्शनी मार्क 1:59:41 को पीछे छोड़ा।

केजेलचा और किप्‍लीमो ने ऐतिहासिक रेस में दिया योगदान

बता दें कि सेबास्टियन सावे अकेले नहीं, जिन्‍होंने लंदन मैराथन में इतिहास रचा। इथोपिया के योमिफ केजेलचा ने लंदन मैराथन में दूसरा स्‍थान हासिल किया। उन्‍होंने इथोपिया का रिकॉर्ड बनाया और इतिहास में दूसरे सबसे तेज मैराथन दौड़ने वाले धावक बने। योमिफ ने 1:59:41 के समय में दौड़ पूरी की।

युगांडा के जैकब किप्‍लीमो तीसरे स्‍थान पर रहे, जिन्‍होंने 2:00:28 के समय में रेस पूरी की। उन्‍होंने लंदन में पिछले वर्ल्‍ड रिकॉर्ड से पहले रेस पूरी की। यह इतिहास की पहली मैराथन बनी, जिसमें तीन लोगों ने एक के बाद एक पुराने रिकॉर्ड को तोड़ा।

पुरुष रेस में गति की गहराई का इससे पता चलता है। अमोस किपरुतु ने निजी सर्वश्रेष्‍ठ प्रदर्शन करते हुए 2:01:39 के समय में मैराथन दौड़ पूरी की और चौथा स्‍थान हासिल किया। ओलंपिक चैंपियन तमिरात टोला 2:02:59 के समय के साथ पांचवें और डेरेसा गेलेटा 2:03:23 के समय के साथ छठे स्‍थान पर रहे।

तेज शुरुआत के कारण बना इतिहास

धावकों ने मैराथन की शुरुआत में तेज गति अपनाकर अपने इरादे जाहिर कर दिए। सावे, केजेलचा, किप्‍लीमो, टोला, किपरुतु और गेलेटा ने 5 किमी का सफर 14:14 समय में तय किया। यह नियंत्रित गति भी थी, लेकिन संकेत मिल चुके थे कि कुछ विशेष होने वाला है। इन धावकों ने 10 किमी का सफर 28:34 और 15 किमी का सफर 43:10 समय में पूरा किया। मैराथन का आधा हिस्‍सा 1:00:29 के समय में पूरा हुआ।

अगले 10 किमी में बढ़त लेने का सिलसिला आगे-पीछे होता रहा, लेकिन जब 30 किमी के पार रेस पहुंची तब गति बनाने का भार एथलीट्स पर दिखने लगा।

सावे ने आखिर में लगाया जोर

निर्णायक मोड़ 30 किमी और 35 किमी के बीच देखने को मिला, जब सावे ने और केजेलचा ने तेज गति अपनाई और किप्‍लीमो को पीछे छोड़ते हुए 21 सेकंड का अंतर बना दिया। अगले 5 किमी में इन दोनों ने दोबारा गति बढ़ाई और हर कदम के साथ लग रहा था कि मैराथन में अविश्‍वसनीय रिकॉर्ड बनने वाला है।

सावे ने जब एक मील की दूरी बची तब केजेलचा को भी पीछे छोड़ दिया और तेजी से अपनी मैराथन दौड़ पूरी करते हुए इतिहास रच दिया। केन्‍याई धावक ने दूसरे हाफ की दौड़ 59:01 के समय में पूरी की और लंदन मैराथन को यादगार बना दिया।

नन्ही Dua की पहली आउटिंग, बेटी को लाइव शो दिखाने पहुंचे Dhurandhar एक्टर रणवीर सिंह

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दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह, अपनी डेढ़ साल की बेटी दुआ को पहली बार आउटिंग पर लेकर गए। इस खुशी भरे दौर के बीच, यह जोड़ा परिवार के साथ बिताए पलों का पूरा आनंद ले रहा है, और हाल ही में वे अपनी बेटी दुआ की जिंदगी के एक खास मौके के लिए बाहर निकले थे। ‘धुरंधर’ स्टार रणवीर सिंह को मुंबई के नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर (NMACC) में छोटी दुआ को उसके पहले लाइव शो में ले जाते हुए देखा गया, जहां ‘CoComelon Sing-A-Long LIVE’ इवेंट चल रहा था।

रणवीर सिंह ने की खुशी जाहिर

शो के बाद, रणवीर ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह पल उनके लिए बेहद खास था, खासकर इसलिए क्योंकि यह दुआ का पहला लाइव शो था। रणवीर सिंह और दीपिका के फैन पेजों पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें ‘धुरंधर'(Dhurandhar) एक्टर अपने इस अनुभव के बारे में बात करते नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘यह हमारे लिए थोड़ा ज्यादा ही खास है, क्योंकि यह हमारी ‘दुआ बेबी’ का पहला शो है और मैं NMACC की टीम का बहुत शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने दुनिया भर से ऐसे अनुभव हमारे लिए पेश किए और हमें ऐसी यादें बनाने का मौका दिया जो जिंदगी भर हमारे साथ रहेंगी’।

रणवीर और दीपिका ने अक्टूबर 2018 में अपनी शादी के प्लान की घोषणा की और एक महीने बाद इटली की खूबसूरत शादी रचाई थी। 8 सितंबर 2024 को, इस कपल के घर उनका पहला बच्चा, बेटी दुआ आई।

जल्द आएगा नन्हा मेहमान

पिछले हफ्ते दीपिका ने रणवीर सिंह के साथ अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी की घोषणा की। एक्ट्रेस ने अपनी बेटी दुआ के साथ एक पर्सनल पोस्ट शेयर करके यह खबर दी, जिससे यह पल और भी खास बन गया। दीपिका ने इंस्टाग्राम पर एक सीधे-सादे लेकिन इमोशनल तरीके से यह खबर शेयर की। इस पोस्ट में उनकी बेटी दुआ सिंह पादुकोण की एक झलक थी, जो प्रेग्नेंसी टेस्ट पकड़े हुए नजर आ रही थीं।

रणवीर सिंह का वर्कफ्रंट

रणवीर सिंह इस वक्त अपनी स्पाई थ्रिलर ‘धुरंधर 2’ का आनंद ले रहे हैं। फिल्म भारतीय बॉक्स ऑफिस के साथ-साथ दुनियाभर में तहलका मचा रही है। इस फिल्म में उनके साथ अर्जुन रामपाल, संजय दत्त, आर माधवन, राकेश बेदी, सारा अर्जुन जैसे कलाकार शामिल हैं।

Kishore Kumar का 51 साल पुराना गीत है जख्मी दिल की आवाज, सुनकर याद आ जाएगी EX गर्लफ्रेंड

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 हिंदी सिनेमा के पुराने सबसे उम्दा गीतों के बारे में बात की जाए तो उसमें ज्यादातर गाने गायक किशोर कुमार के शामिल होंगे। किशोर दा ने अपने सिंगिंग करियर के दौरान हर किस्म के गीत गाए थे, फिर चाहे वे रोमांटिक और सैड सॉन्ग्स क्यों न हो।

इसी आधार पर आज हम आपको किशोर कुमार के एक ऐसे यादगार सैड सॉन्ग के बारे में आपको बताने जा रहे हैं, जो 51 साल पहले रिलीज किया गया था। आज भी इस गाने को सुनकर श्रोताओं का दिल भर आता है। आइए जानते हैं कि वह कौन सा गीत है।

किशोर कुमार का यादगार सैड सॉन्ग

यूं तो किशोर कुमार ने एक से बढ़कर एक गीत गाए। लेकिन जिस गाने के बारे में इस लेख में जिक्र किया जा रहा है, वह वाकई सबसे हटकर है। सैड सॉन्ग्स के मामले में मानों ऐसा होता था कि किशोर दा अपने दिल का दर्द आवाज में उतार देते थे। इसका अंदाजा आप साल 1975 में सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली फिल्म आंधी के दर्दभरे गीत तेरे बिना जिंदगी से… (Tere Bina Zindagi Se ) को सुनकर आसानी से लगा सकते हैं। किशोर कुमार का ये गाना पिछले 5 दशकों से हिंदी सिनेमा का सबसे कल्ट सैड सॉन्ग बना हुआ। इस गाने में सुरों की कोकिला लता मंगेशकर ने किशोर दा का बखूबी साथ दिया और आंधी फिल्म का ये आईकॉनिक गीत गाया। इस गाने को अभिनेता संजीव कुमार और अभिनेत्री सुचित्रा सेन पर फिल्माया गया है। कुल मिलाकर कहा जाए तो तेरे बिना जिंदगी से… सुनने के बाद लड़कों को अपनी एक्स याद जाएगी।

गौर किया जाए आंधी के तेरे बिना जिंदगी से… की मेकिंग की तरफ तो गायक किशोर कुमार और लता मंगेशकर के अलावा संगीतकार आर डी बर्मन ने इस गीत में अपने संगीत का जादू चलाया था। इसके अलावा गाने के बोल को गुलजार साहब ने लिखा था।

फिल्म से बड़ा हिट रहा गाना

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि संजीव कुमार स्टारर आंधी से ज्यादा बड़ा हिट किशोर कुमार का तेरे बिना जिंदगी से… गीत रहा था। इस गाने की वजह से ही फिल्म आंधी को आज भी याद किया जाता है।

‘तुम एक जगह हमला करोगे तो हम चार जगह करेंगे’, ट्रंप की धमकियों के बाद खाड़ी देशों को ईरान की चेतावनी

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अमेरिका और ईरान के बीच शांति-वार्ता को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। दोनों देशों के बीच कोई हल निकलता नजर नहीं आ रहा है।

ऐसे में अमेरिका ने ईरान की तेल पाइपलाइनों पर अटैक करने की धमकी दी थी। वहीं अब ईरान की तरफ से भी इस पर चार गुना वार करने की चेतावनी दी गई है।

ईरान का कहना है कि अगर अमेरिका उसके एक पावर प्लांट को निशाना बनाएगा तो ईरान उन खाड़ी देशों के पावर प्लांट पर हमला करेगा, जो अमेरिका को इस युद्ध में सपोर्ट कर रहे हैं। ईरान ने यहां तक कहा है कि एक पावर प्लांट के बदले चार प्लांट पर हमले होंगे।

ईरान की खाड़ी देशों को चेतावनी

ईरान ने पड़ोसी खाड़ी देशों को अमेरिका का साथ देने के खिलाफ चेतावनी दी है। ईरान के उपराष्ट्रपति, इस्माइल सघाब इस्फहानी ने कहा कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में चल रही नाकेबंदी के बीच, तेल के कुओं सहित ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जाता है, तो तेहरान की प्रतिक्रिया चार गुना होगी।इस्फहानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘हम युद्ध के किसी भी कृत्य का जवाब देंगे। अगर नाकाबंदी के परिणामस्वरूप हमारे किसी भी बुनियादी ढांचे, जिसमें तेल के कुएं भी शामिल हैं, उन्हें नुकसान पहुंचता है तो हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हमलावर का समर्थन करने वाले देशों को उससे चार गुना ज्यादा नुकसान हो।’

ईरान के उपराष्ट्रपति ने अपनी बात में बताया कि ईरान इस युद्ध में अमेरिका के समर्थकों को किस हद तक नुकसान पहुंचा सकता है। इस्फहानी ने आगे कहा, ‘हमारा हिसाब-किताब करने का तरीका अलग है। एक तेल का कुआं, चार तेल के कुओं के बराबर होता है।’

ट्रंप ने पर हमले की दी थी धमकी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने पिछले हफ्ते ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में लिखा, ‘ईरान आर्थिक रूप से ढह रहा है! वे चाहते हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत खोल दिया जाए वे नकदी के लिए तरस रहे हैं!’

ट्रंप ने आगे लिखा, ‘ईरान को रोजाना 500 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है। सेना और पुलिस शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें वेतन नहीं मिल रहा है।’

फॉक्स न्यूज से बात करते हुए भी ट्रंप ने कहा, ‘अगर इस तरह की पाबंदियां जारी रहीं तो ईरान की तेल पाइपलाइनें कुछ ही दिनों में एक गंभीर स्थिति तक पहुंच सकती हैं।’

10 दिन में 27 हमले… BLA ने मार गिराए पाकिस्तान के 42 सैनिक, कई ठिकानों पर किया कब्जा

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बलूच लिबरेशन आर्मी ने सोमवार को दावा किया कि उसने 15 अप्रैल से 25 अप्रैल के बीच पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के कई जिलों में 27 ऑपरेशन किए। BLA ने यह भी दावा किया कि इन ऑपरेशन के तहत कम से कम 42 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया गया।

BLA ने 27 ऑपरेशन में मारे 42 सैनिक

‘द बलूचिस्तान पोस्ट’ ने BLA के प्रवक्ता जीयांद बलूच के एक बयान का हवाला देते हुए बताया कि BLA के लड़ाकों ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को निशाना बनाते हुए इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) धमाके, घात लगाकर हमले, छापे और ड्रोन हमले किए।

रिपोर्ट में दावा किया गया कि इस दौरान 42 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए साथ ही कई अन्य घायल हुए। इस ऑपरेशन में एक सैनिक को जिंदा पकड़ लिया गया।

कई इलाकों पर किया कब्जा

रिपोर्ट्स में BLA के हवाले से यह भी दावा किया गया कि उसने हथियार जब्त किए और अलग-अलग इलाकों में सुरक्षा बलों की कई चौकियों पर कुछ समय के लिए कब्जा भी किया। ग्रुप ने आगे दावा किया कि इस ऑपरेशन में उसके तीन लड़ाके भी मारे गए।

बयान में कहा गया कि उसके लड़ाकों ने सोहंडा इलाके में आगे बढ़ रहे सैनिकों को रिमोट-कंट्रोल्ड IED से निशाना बनाया, जिसके बाद घात लगाकर हमला किया गया, जिसमें कथित तौर पर कई सैनिक मारे गए।

TBP के मुताबिक, BLA ने यह भी दावा लगाया कि आस-पास के नागरिक इलाकों में बाद में किए गए ऑपरेशनों में 11 लोगों की मौत हो गई।

पाकिस्तान कोस्ट गार्ड को बनाया था निशाना

यह घटना उस घटना के कुछ सप्ताह बाद सामने आई है, जब बलूच लड़ाकों ने ईरान सीमा के पास अरब सागर में गश्त कर रही पाकिस्तान कोस्ट गार्ड की एक नाव पर गोलीबारी की थी, जिसमें तीन जवान मारे गए थे। सुरक्षा अधिकारियों ने इस घटना को समुद्री सुरक्षा पोत पर अपनी तरह का पहला हमला बताया था।

खुफिया और पुलिस अधिकारियों ने बताया कि वह नाव पाकिस्तान-ईरान तटीय सीमा के पास अपनी नियमित गश्त पर थी, तभी उस पर हमला हुआ जिसमें नाव पर सवार तीनों जवान मारे गए।

आगरा में हास्पिटल की लिफ्ट में एक घंटे तक फंसे रहे मरीज और तीमारदार, मदद के लिए चीखते रहे; हालत बिगड़ी

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 आवास विकास के जीवन ज्योति हास्पिटल की लिफ्ट में गुरुवार दोपहर अचानक खराबी आ गई। लिफ्ट में ऊपर से नीचे की ओर आ रहे एक मरीज के साथ पांच तीमारदार लिफ्ट में फंसने के बाद मदद को चीखते रहे।

पहले हास्पिटल के कर्मचारी पहुंचे फिर पुलिस, लेकिन कोई कुछ नहीं कर सका। ग्राइंडर की मदद से पुलिस ने लिफ्ट का दरवाजा कटवाया। इसके बाद उसमें फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका। लिफ्ट में फंसे रहने के कारण मरीज की हालत बिगड़ गई।

आनन-फानन में डाक्टरों ने उसे उपचार दिया। हालत में सुधार होने पर राहत की सांस ली। अंगूठी गांव निवासी रसीद खान को परिवार के ही रहमान खान व हमीद खान सांस लेने में दिक्कत होने पर जीवन ज्योति हास्पिटल लेकर आए थे।

इलाज के दौरान दोनों युवक रसीद को चौथी मंजिल से ग्राउंड फ्लोर पर लिफ्ट से ला रहे थे। लिफ्ट रेनू और कमला भी थीं। दोपहर साढ़े तीन बजे लिफ्ट नीचे आते समय पहली और दूसरी मंजिल के बीच में अचानक रुक गई।

इस पर लिफ्ट में सवार लोगों ने दरवाजा पीटते हुए शोर मचाना शुरू किया। साथ ही अपने स्वजन को फोन किए। लिफ्ट में लोगों के फंसे होने की जानकारी होते ही हास्पिटल में अफरा-तफरी मच गई।

लिफ्ट में फंसे लोगों की सूचना पर जगदीशपुरा थाना पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। लिफ्ट को नीचे लाने का प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद लोहा काटने वालो को मौके पर बुलाया गया। उसने ग्राइंडर की मदद से लिफ्ट का दरवाजा काटा।

इसके बाद उसमें फंसे हुए लोगों को बाहर निकाला गया। लिफ्ट में फंसे रसीद खान की पहले से ही हालत गंभीर थी। अंदर सांस लेने में दिक्कत होने पर उनकी हालत और बिगड़ गई। डाक्टर ने उन्हें तत्काल उपचार दिया। कुछ देर बाद उनकी हालत में सुधार हुआ।

लिफ्ट में फंसे अन्य लोग भी घबरा गए थे। लिफ्ट में फंसे लोगों का कहना था कि गर्मी से बेहाल होने के साथ ही दम घुटने लगा था। गनीमत रही सुरक्षित बाहर निकल आए। हास्पिटल संचालक डा. संजय अग्रवाल ने बताया कि लिफ्ट में तकनीकी खामी आ गई थी।

उसमें फंसे लोगों को तत्काल निकाल लिया गया था। समय-समय पर लिफ्ट की सर्विस होती रहती है। इंस्पेक्टर जगदीशपुरा प्रदीप कुमार ने बताया करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद लिफ्ट में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका। किसी भी पक्ष ने शिकायत नहीं की है।

सार्वजनिक स्थल पर लिफ्ट संचालन के ये हैं नियम

  •  लिफ्ट के संचालन के लिए ऑपरेटर की तैनाती होनी चाहिए।
  • समय-समय पर लिफ्ट की सर्विस होनी चाहिए।
  • आपात स्थिति के लिए अलार्म या काॅल बटन होना चाहिए।
  •  लिफ्ट की निर्धारित क्षमता से अधिक भार न डालें।