Home Blog Page 20

फिरोजाबाद में स्मार्ट मीटर पर भड़का गुस्सा, महिलाओं ने किया हंगामा; कर दिया हाईवे जाम

0

 प्रीपेड मीटर की समस्या को लेकर महिलाओं ने शुक्रवार को विद्युत सब स्टेशन पर जमकर हंगामा किया। सब स्टेशन में तोड़फोड़ के बाद महिलाओं ने कानपुर आगरा हाईवे पर जाम लगा दिया। तेज धूप के बीच फंसे वाहन चालक पसीना छोड़ गए।

वहीं स्कूली बच्चे भी जाम में फंसकर बेहाल हो गए। इस जाम में एंबुलेंस भी फंस गईं। पुलिस ने किसी तरह महिलाओं को समझाकर शांत कराया।

डीवीवीएनएल के प्रीपेड स्मार्ट मीटर की समस्या को लेकर हिमायूंपुर की आक्रोशित महिलाओं ने शुक्रवार दोपहर एक बजे सुहाग नगर स्थित विद्युत सब स्टेशन पर पहुंच कर जमकर हंगामा और तोड़फोड़ कर दी।

इससे विद्युत सब स्टेशन पर काफी देर तक अफरा तफरी का माहौल रहा। इसके बाद महिलाओं ने सुहाग नगर चौराहा पर पहुंच कर हाईवे पर जाम लगा दिया। पुलिस ने काफी प्रयास के बाद दोपहर दो बजे जाम खुलवाया।

तब तक हाईवे पर वाहनों की लंबी कतार लग चुकी थी। महिलाओं ने चेतावनी कि समस्या का निदान न होने पर दोबारा हाईवे जाम किया जाएगा।

उम्र बढ़ने के साथ क्यों जवाब देने लगता है शरीर? डॉक्टर ने बताया कमजोर इम्युनिटी को कैसे मिलेगी नई ताकत

0

क्या आपने कभी गौर किया है कि घर में छोटे बच्चे और बुजुर्ग सबसे जल्दी बीमार क्यों पड़ते हैं, जबकि नौजवानों पर मौसम या बीमारियों का असर आसानी से नहीं होता?

इसका जवाब हमारे शरीर के ‘सुरक्षा चक्र’ यानी हमारी इम्युनिटी में छिपा है। हम अक्सर यह मान लेते हैं कि शरीर की बीमारियों से लड़ने की ताकत जीवन भर एक जैसी रहती है, लेकिन सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है।

दिल्ली के सरिता विहार स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. एस. चटर्जी का कहना है कि शरीर के बाकी हिस्सों की तरह ही हमारी इम्युनिटी भी उम्र के साथ बदलती है। यह बचपन में बेहद नाजुक होती है, जवानी में सबसे मजबूत हो जाती है और उम्र ढलने के साथ धीरे-धीरे अपना दम तोड़ने लगती है।

बचपन से जवानी तक का सफर

जन्म के समय एक शिशु का शरीर बीमारियों और कीटाणुओं से पूरी तरह अनजान होता है। इस वजह से शुरुआती सालों में बच्चे बहुत जल्दी बीमार पड़ते हैं। यहीं पर टीकाकरण एक ढाल बनकर सामने आता है। टीके हमारे शरीर को बिना बीमार किए ही उन कीटाणुओं से लड़ना सिखा देते हैं, जो भविष्य में हमला कर सकते हैं।

जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं और युवावस्था में कदम रखते हैं, हमारी इम्युनिटी अपने सबसे बेहतरीन और ताकतवर स्तर पर आ जाती है। बचपन में लगे टीकों और शरीर के विकास की बदौलत, युवा लोग नई बीमारियों का डटकर सामना कर पाते हैं।

बुढ़ापे में सुस्त पड़ता सुरक्षा तंत्र

जवानी की यह ताकत उम्र भर नहीं टिकती। उम्र बढ़ने के साथ शरीर के अंदर कई प्राकृतिक बदलाव होते हैं। शरीर में हल्की सूजन रहने लगती है और हमारी इम्युनिटी सुस्त पड़ने लगती है। इसका सीधा असर हमारी रक्षक कोशिकाओं पर पड़ता है।

नई बीमारियों के खिलाफ एंटीबॉडी बनाने वाली ‘बी-सेल्स’ कमजोर हो जाती हैं। वहीं, कीटाणुओं को सीधे नष्ट करने वाली ‘टी-सेल्स’ की संख्या और फुर्ती भी कम होने लगती है। यही कारण है कि बुजुर्गों का शरीर हानिकारक कीटाणुओं का आसानी से शिकार हो जाता है।

पुरानी बीमारियां और बढ़ते खतरे

बुढ़ापे में इम्युनिटी तो कमजोर होती ही है, साथ ही डायबिटीज और किडनी जैसी पुरानी बीमारियां शरीर को अंदर से और ज्यादा खोखला कर देती हैं। इन बीमारियों के होने पर एक मामूली सा फ्लू भी खतरनाक रूप ले सकता है। इसके कारण बुजुर्गों को निमोनिया हो सकता है या उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ सकता है।

इसके अलावा, बुजुर्गों में ‘शिंगल्स’ का खतरा भी बहुत ज्यादा होता है। यह कोई नया वायरस नहीं है, बल्कि बचपन के चिकनपॉक्स का ही वायरस होता है जो बुढ़ापे में दोबारा जाग जाता है। शिंगल्स नसों में भयानक दर्द पैदा करता है जो महीनों तक इंसान को तड़पा सकता है और उसकी शांति छीन सकता है।

ताउम्र सुरक्षा का वादा है टीकाकरण

इन सभी खतरों से बचने का सबसे कारगर उपाय है – टीकाकरण। अक्सर लोग यह सोचकर गलती कर बैठते हैं कि टीके सिर्फ बच्चों के लिए होते हैं। जबकि सच यह है कि बुजुर्गों को इसकी उतनी ही सख्त जरूरत है। कमजोर होती इम्युनिटी को सहारा देने और जानलेवा बीमारियों से बचने के लिए वयस्कों का सही समय पर टीकाकरण बहुत जरूरी है।

हमारी इम्युनिटी की जरूरतें उम्र के साथ बदलती हैं, इसलिए हमारी सोच भी बदलनी चाहिए। अपनी और अपनों की सेहत के लिए टीकाकरण को सिर्फ बचपन की जरूरत नहीं, बल्कि ताउम्र चलने वाला सुरक्षा चक्र मानना चाहिए।

‘मैंगो रबड़ी फालूदा’ बनाने का सबसे आसान तरीका: बिना ताम-झाम मिलेगा एकदम परफेक्ट रिजल्ट

0

 चिलचिलाती धूप में अगर कुछ ठंडा, मीठा और रिफ्रेशिंग मिल जाए, तो पूरा दिन बन जाता है। ‘मैंगो रबड़ी फालूदा’ एक ऐसा ही शानदार और रॉयल डेजर्ट है, जिसका नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है।

अक्सर लोग सोचते हैं कि फालूदा घर पर बनाना बहुत मुश्किल और झंझट का काम है, लेकिन आज हम आपके लिए लाए हैं इसे बनाने का सबसे आसान और सटीक तरीका। बिना घंटों किचन में पसीना बहाए, आप घर पर ही एकदम रेस्टोरेंट या ठेले वाले जैसा परफेक्ट फालूदा तैयार कर सकते हैं। आइए जानते हैं इसकी आसान रेसिपी (Mango Rabri Falooda Recipe)।

मैंगो रबड़ी फालूदा बनाने के लिए सामग्री

इस शानदार डेजर्ट को बनाने के लिए आपको इन चीजों की जरूरत होगी:

  • पके हुए मीठे आम – 2 बड़े (एक प्यूरी के लिए, एक छोटे टुकड़ों में कटा हुआ)
  • रबड़ी – 2 कप (आप रेडीमेड या घर की बनी रबड़ी ले सकते हैं)
  • फालूदा सेव – 1 कप (उबली हुई)
  • सब्जा के बीज – 2 छोटे चम्मच (पानी में भीगे हुए)
  • रोज सिरप – 2 बड़े चम्मच
  • ड्राई फ्रूट्स – बारीक कटे हुए बादाम और पिस्ता (गार्निश के लिए)
  • आइसक्रीम – 2 स्कूप (वनीला या मैंगो फ्लेवर)

मैंगो रबड़ी फालूदा बनाने की विधि

इस फालूदा को बनाने की प्रक्रिया बहुत ही आसान है। बस आपको चीजों को सही तरीके से लेयर करना है।

55 साल पहले आया हेलेन का वो गाना, Asha Bhosle की आवाज पर मचा था बवाल; बैन हुआ था कल्ट सॉन्ग

0

आशा भोसले (Asha Bhosle) ‘सुरों की मल्लिका’ कही जाती थीं। 12000 से ज्यादा गानों को आवाज देने वालीं आशा ताई को उनकी वर्सैलिटी के लिए जाना जाता था। उन्होंने हर तरह के गानों को अपनी आवाज दी। वह कई आइटम सॉन्ग्स भी गा चुकी थीं। 55 साल पहले उन्होंने एक गान गाया था, जो बाद में बैन कर दिया गया था।

जी हां, 55 साल पहले आशा भोसले ने एक आइटम सॉन्ग को अपनी आवाज दी थी। गाने के बोल पर इतना ज्यादा बवाल मचा था कि बाद में इसे बैन ही करना पड़ा। कहा जाता है कि गाना सुनने के बाद गीतकार स्टूडियो से ही शर्मिंदा होकर बाहर चले गए थे।

बोल्ड गाने से हेलेन ने मचाया था बवाल

यह किस्सा 1971 में आई फिल्म ‘कारवां’ का है। इस फिल्म में हेलेन ‘पिया तू अब तो आजा’ (Piya Tu Ab To Aaja) गाने में नजर आई थीं। यह गाना खूब पसंद किया गया था। थिएटर्स में जब यह गाना बजता था तो लोग सीटियां बजाने पर मजबूर हो जाते थे। जब आशा भोसले के पास यह गाना आया थो तो वह नाराज हो गई थीं। उनका कहना था कि बार-बार उन्हें ऐसे गाने क्यों मिलते हैं। हालांकि, पंचम दा (आरडी बर्मन) ने उन्हें मना लिया और आखिरकार आशा भोसले ने यह गाना गाया।

गाना सुनकर शर्मिंदा हो गए थे गीतकार

गाने के बोल लिखे थे मजरूह सुल्तानपुरी ने। कहा जाता है कि जब गाने की रिकॉर्डिंग हो रही थी, तब उस वक्त मजरूह भी स्टूडियो में मौजूद थे। वह खुद अपने गाने के बोल सुनकर शर्मिंदा हो गए थे और स्टूडियो के बाहर चले गए थे। आखिरकार, फिल्म रिलीज हुई और गाना भी सुपरहिट हुआ। मगर वही, गाने के बोल पर बवाल मच गया। इसके लिरिक्स को सिडक्टिव बताया गया और फिर बैन लग गया।

बैन लगने के बावजूद गाने को कल्ट का दर्जा मिला। इस गाने की पॉपुलैरिटी आज भी कम नहीं हुई है। पांच दशक के बाद इस गाने की कुछ लाइनों को रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर में लिया गया था जो दर्शकों को खूब पसंद आया।

33 साल पहले ‘बंदर’ ने चटाई थी Sunny Deol को धूल, अनिल-श्रीदेवी को भी चखाया था मजा; ब्लॉकबस्टर हुई थी वो फिल्म

0

90 के दशक में कई ऐसी फिल्में आईं जिनकी खूब चर्चा हुई महंगे बजट में बनीं, लेकिन वह फिल्में बॉक्स ऑफिस पर नहीं चलीं। हालांकि उसी दौर में कुछ ऐसी फिल्में भी आईं, जिनका कोई प्रचार नहीं हुआ और कोई हीरो प्रमोशन करता दिखा पर फिर भी वह फिल्में कमाल कर गई हैं।

आज बात उसी फिल्म की जिसमें एक बंदर ने अनिल कपूर, श्रीदेवी से लेकर सनी देओल जैसे स्टार्स को मजा चखा दिया था।

1993 में आईं तीन शानदार फिल्में

साल 1993 में तीन फिल्में खूब चर्चा में रहीं। बड़ी बात यह थी कि ये फिल्में आसपास ही रिलीज हुईं और बॉक्स ऑफिस पर वो कमाल नहीं दिखा पाईं, लेकिन इनमें से बाजी एक फिल्म मार ले गई। उस साल एक तरफ हिंदी सिनेमा की सबसे महंगी फिल्म थी, दूसरी तरफ सितारों की फौज वाली एक बड़ी फिल्म, और तीसरी तरफ थी एक ‘बिना सिर-पैर’ वाली कॉमेडी फिल्म। इन तीन फिल्मों में पहली फिल्म थी ‘रूप की रानी चोरों का राजा’ (Roop Ki Rani Choron ka raja)।

यह फिल्म उस समय की सबसे बड़ी फिल्म थी। फिल्म पर बोनी कपूर ने पानी की तरह पैसा बहाया था। यह उस दौर की सबसे महंगी फिल्म थी। इसके बाद दूसरी फिल्म सनी देओल (Sunny Deol), संजय दत्त, धर्मेंद्र, विनोद खन्ना, रवीना टंडन और दिव्या भारती जैसे सितारों से सजी थी और फिल्म का नाम था क्षत्रिय। तीसरी फिल्म थी आंखें, जिसमें गोविंदा (Govinda), चंकी पांडे, राज बब्बर और कादर खान जैसे स्टार्स नजर आए थे।

डेविड धवन की फिल्म मार ले गई बाजी

फिल्म आंखें जब आई तो उसके सामने पहले ही दो बड़ी फिल्म क्षत्रिय और रूप की रानी चोरों का राजा थी। इन दोनों फिल्मों में बड़े स्टार्स थे। ऐसे में डेविड धवन की फिल्म से ज्यादा किसी को उम्मीदें थीं नहीं। ऊपर फिल्म आंखें का ना कोई प्रमोशन किया गया था और ना ही कोई बड़े गाने रिलीज किए गए थे।

हाल ही में डेविड धवन का एक इंटरव्यू वायरल हुआ जिसमें उन्होंने इस पर बात की है। बॉलीवुड हंगामा को दिए इंटरव्यू में डेविड धवन ने बताया कि,

‘भय जा रहा, भरोसा आ रहा’, बंगाल मतदान पर पीएम मोदी का बड़ा बयान; भाजपा की जीत का दावा

0

बंगाल में विधानसभा के पहले चरण के मतदान के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को बड़ा दावा किया कि जबसे वे राजनीति में आए हैं, पिछले 50 साल में ये पहला चुनाव ऐसा है, जिसमें यहां कम से कम (न्यूनतम) हिंसा हुई है।

पीएम ने इसका श्रेय चुनाव आयोग को देते हुए कहा कि उन्होंने फिर से एक बार बंगाल की धरती पर लोकतंत्र की प्रतिष्ठा स्थापित की है। नदिया जिले के कृष्णानगर में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि चुनाव में न्यूनतम ङ्क्षहसा और मतदान के आंकड़े सिद्ध करते हैं कि बंगाल से अब भय जा रहा है और भरोसा आ रहा है।

बंगाल में मतदान पुराने सारे रिकार्ड तोड़ रहा है। पीएम ने बंगाल में चुनावी ङ्क्षहसा के इतिहास की ओर इशारा करते हुए कहा कि वरना पहले चुनाव के दौरान हर हफ्ते यहां किसी न किसी को फांसी पर लटका दिया जाता था और बोल देते थे कि आत्महत्या कर ली। एक प्रकार से गुंडाराज चलता था।

चुनाव आयोग का धन्यवाद करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण मतदान कराने में ये सफलता बहुत बड़ी सिद्धि है। देश में जहां-जहां भारी मतदान हुआ है वहां भाजपा को प्रचंड विजय मिली है। भाजपा की जीत का दावा करते हुए कहा कि बंगाल में परिवर्तन की आंधी चल रही है। चार मई को कमल खिलना तय है।

पीएम ने अपने हालिया बंगाल दौरे में झाडग़्राम में एक दुकान से झालमुड़ी खाने पर हुए सियासी विवाद पर टीएमसी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि झालमुड़ी ने भी कुछ लोगों को झन्नाटेदार झटका दिया है। झालमुड़ी मैंने खाई, लेकिन मिर्ची टीएमसी को लगी।

‘मिठाई के साथ झालमुड़ी भी बंटेगी’

मोदी ने कहा कि बंगाल में चार मई को भाजपा की विजय का जश्न होगा और उस दिन मिठाई के साथ झालमुड़ी भी बांटी जाएगी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पीएम के झालमुड़ी खाने को चुनावी नाटक बताया था, जिसके बाद मोदी ने पलटवार किया है। मोदी ने दक्षिण 24 परगना जिले के काकद्वीप में भी जनसभा को संबोधित किया।

कईं जिलों में टीएमसी का खाता तक नहीं खुलेगा

मोदी ने कहा कि बंगाल में इस बार टीएमसी के खिलाफ इतना गुस्सा है कि कईं जिलों में सत्तारूढ़ दल का खाता तक नहीं खुलेगा। तृणमूल की घुसपैठियों को समर्थन देने की नीति को खत्म करना जरूरी है, क्योंकि यह हमारी भूमि के लिए खतरा पैदा करती है। टीएमसी की हर दुकान को बंद करेंगे। 15 साल पहले वाममोर्चा के विरुद्ध जनता ने बिगुल फूंका था। आज टीएमसी के जंगलराज के विरुद्ध जनता हर गली मोहल्ले में शंख फूंक रही है। ये चुनाव न मोदी लड़ रहा है और न ही मेरे साथी। चुनाव जनता जनार्दन लड़ रही है।

‘चार मई को केवल परिणाम नहीं परिवर्तन आएगा’

काकद्वीप की जनसभा में मोदी ने कहा कि चार मई को बंगाल में केवल परिणाम नहीं, परिवर्तन आएगा। बंपर मतदान दर्शा रहा है कि भय हार रहा है और भरोसे की जीत पक्की है। टीएमसी के 15 साल के सिंडिकेट सिस्टम और महाजंगलराज की एक्सपायरी डेट अब आ गई है। यह चार मई है। टीएमसी ने 15 वर्षों में बंगाल को सिर्फ झूठे वादे और धोखा दिया। राज्य के लिए अपनी पूर्व की छह चुनावी गारंटियों के वादों पर आगे बढ़ते हुए, प्रधानमंत्री ने बंगाल की महिलाओं के उत्थान और कल्याण के उद्देश्य से नई 10 मोदी-की-गारंटियों की भी घोषणा की।

महिलाओं को मोदी की 10 गारंटी

– महिलाओं पर अत्याचार करने वालों को कड़ी सजा मिलेगी। हर ब्लाक में महिला थाने बनेंगे।
– पुलिस बल व अन्य सरकारी नौकरियों में बेटियों की होगी भर्ती।
– हर साल 36,000 रुपये सीधे महिलाओं के खातों में दिए जाएंगे।
– बेटियों को ग्रेजुएशन के लिए 50,000 रुपये दिए जाएंगे।
– गर्भवती माताओं को 21,000 रुपये की सहायता।
– बच्चों के पोषण के लिए 36,000 रुपये की अतिरिक्त सहायता।
– सुकन्या समृद्धि योजना के जरिए बेटियों का भविष्य सुरक्षित करना।
– स्वरोजगार के लिए 20 लाख रुपये तक का मुद्रा लोन और लखपति दीदी योजना का विस्तार।
– आयुष्मान योजना के तहत पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज। सर्वाइकल कैंसर का मुफ्त टीका।
– घर की रजिस्ट्री महिलाओं के नाम पर होगी।

मोदी ने बेलूर मठ का भी किया दौरा

दोनों जनसभाओं के बाद मोदी शाम में अचानक हावड़ा के बेलूर मठ पहुंचे, जहां उन्होंने रामकृष्ण मिशन के मुख्य मंदिर में दर्शन किए और आशीर्वाद लिया। बेलूर मठ से मोदी का खास लगाव रहा है और वे पहले भी यहां आते रहे हैं।

हावड़ा में पहली बार पीएम ने किया रोड शो

पीएम ने भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में शाम में हावड़ा शहर में तीन किलोमीटर लंबा रोड शो भी किया। लिलुआ में एमसीकेवी स्कूल से शुरू रोड शो सलकिया चौरास्ता पर समाप्त हुआ। इस दौरान जीटी रोड के दोनों ओर एकत्र भीड़ का पीएम ने अभिवादन किया। पीएम की एक झलक पाने के लिए सड़क के दोनों ओर लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा था। यह पहली बार है जब कोई पीएम ने हावड़ा में रोड शो किया है।

‘बंगाल जीतने के बाद मैं दिल्ली की बागडोर संभालूंगी’, ममता बनर्जी बोलीं-TMC हार नहीं सकती

0

बंगाल विधानसभा चुनाव के गुरुवार को पहले चरण के मतदान के बाद मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी की जीत को लेकर बड़ा दावा किया। ममता ने कहा कि तृणमूल हार नहीं सकती और हमारी जीत तय है।

कोलकाता के बउबाजार और जादवपुर इलाके में पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में दो चुनावी रैलियों को संबोधित करते हुए ममता ने कहा कि मैं लोगों के मन को जितना समझ पाई हूं, उसके हिसाब से अभी तक हुए मतदान को देखते हुए यह कह सकती हूं कि तृणमूल पहले से ही जीत की स्थिति में हैं।

भाजपा व केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए ममता ने कहा कि पहले चरण में हुए मतदान से संकेत मिलता है कि आज ही हम जीतकर बैठे हैं। अगले चरण में और जोरदार तरीके से हम मुकाबला करेंगे। ममता ने कहा कि चुनाव जीतने के बाद वह सभी विपक्षी दलों को साथ लेकर दिल्ली (केंद्र की सत्ता) पर विजय हासिल करेंगी। ममता ने यह भी कहा कि मुझे किसी पद में कोई दिलचस्पी नहीं है। मुझे कुर्सी नहीं चाहिए। मैं सिर्फ दिल्ली में केंद्र की सत्ता से भाजपा सरकार का अंत चाहती हूं।

भवानीपुर में ममता ने किया रोड शो

ममता ने शाम में अपने विधानसभा क्षेत्र भवानीपुर में भी एक लंबा रोड शो किया और लोगों से अपने लिए वोट मांगा। ममता ने इस दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि मतगणना के दिन गड़बड़ी की कोशिश हो सकती है और वोटों के अंतर को कम करके दिखाया जा सकता है।

उन्हें सूचना मिली है कि मतगणना के दिन गड़बड़ी की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि वोट जनता देती है, न पुलिस और न ही सेना। इसलिए मतगणना के समय पूरी तरह सतर्क रहें। ममता ने भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए आरोप लगाया कि बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है और राज्य के लोगों के साथ बाहर अन्य जगहों पर दुर्व्यवहार हो रहा है। ममता ने फिर दोहराया कि अगर बंगाल को टारगेट किया जाएगा, तो हम भी जवाब देना जानते हैं।

चुनाव के दौरान भारी संख्या में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में बूटों की आवाज सुनाई दे रही है। महिलाओं से हल्के अंदाज में कहा कि वे भी इसका जवाब अपने तरीके से दें। मतदाता सूची को लेकर भी मुख्यमंत्री ने सवाल उठाए।

उन्होंने दावा किया कि एसआइआर प्रक्रिया में लाखों लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं, जो लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। साथ ही उन्होंने महिला आरक्षण कानून के लागू होने में देरी को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की।

जीएसटी को समर्थन देना गलती थी

जीएसटी पर भी ममता ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि इसे समर्थन देना उनकी गलती थी और राज्य को उसका उचित वित्तीय हिस्सा नहीं मिल रहा है। अपने लंबे राजनीतिक अनुभव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वह कई बार सांसद और केंद्रीय मंत्री रह चुकी हैं और प्रशासनिक व्यवस्था को अच्छी तरह समझती हैं।

बता दें कि बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान गुरुवार को संपन्न हुआ। निर्वाचन आयोग के मुताबिक, शाम छह बजे तक राज्य में रिकार्ड 91.87 प्रतिशत वोट पड़े हैं, जो 2021 की तुलना में 10 प्रतिशत से भी अधिक है। दूसरे चरण के तहत 142 सीटों पर 29 अप्रैल को मतदान होगा।

खाने-सोने में असमर्थ है मशहूर स्पेनिश Matador, सींग लगने से आई भयानक चोट; सुनाई आपबीती

0

स्पेन के मशहूर मैटडोर, जिन्हें बुलफाइटिंग मैच के दौरान बुरी तरह सींग लग गया था, उन्होंने अपने दर्द के बारे में बात की है। जानकारी के अनुसार, मोरांते दे ला पुएब्ला, जिन्हें बुलफाइटर्स का राजा कहा जाता है। उनके साथ सोमवार को सेविले के माएस्त्रांजा एरिना में दर्शकों से खचाखच भरे मैदान में एक दुर्भाग्य पूर्ण घटना के गुजरना पड़ा।

दरअसल, प्रदर्शन के दौरान सींग लगने से उनकी पीठ का निचला हिस्सा पूरी तरह से फट गया। इसके बाद उनको तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां घंटों चली सर्जरी के बाद उन्होंने इसे अब तक का सबसे दर्दनाक सींग लगना बताया। उन्होंने सर्जरी के बाद इंस्टाग्राम पर एक वीडियो भी पोस्ट किया।

यह अब तक का सबसे दर्दनाक सींग लगना था : मैटडोर

इसमें उन्होंने कहा, “मुझे बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था और बहुत डर लग रहा था, क्योंकि मैंने देखा कि बैल ने मुझे पकड़ लिया है और मेरा खून बह रहा है। हालांकि, जब मैं अस्पताल पहुंचा तो देखा कि खून बहुत कम बह रहा है, तो मुझे थोड़ी राहत मिली, लेकिन जाहिर है, दर्द बहुत ज्यादा था। इसमें कोई शक नहीं कि यह अब तक का सबसे दर्दनाक सींग लगना था।”

एल मुंडो की रिपोर्ट के अनुसार, 46 साल के इस मैटडोर ने पहले ही तीन बैलों को काबू कर लिया था। वहीं, जब अचानक चौथे बैल ने उन पर हमला किया तो, उन्हें अपना केप (जिसका इस्तेमाल जानवर को अपनी ओर खींचने के लिए किया जाता है) छोड़ना पड़ा और वे अपनी पीठ को खुला छोड़कर भागने लगे।

रात में नींद की कमी से जूझ रहा हूं

इस दौरान बैल ने अपनी मुड़ी हुई सींग के नुकीले सिरे से पुएब्ला को घायल कर दिया। इससे 4 इंच का घाव हो गया, दर्द से कराहते हुए उन्होंने अपने शरीर को कसकर पकड़ लिया; जिसके बाद चार अन्य मैटडोर उन्हें मैदान से बाहर ले गए।

इसके अलावा, वीडियो में उन्होंने कहा, “सच कहूं तो, मुझे बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है, एक कैथेटर के जरिए IV न्यूट्रिशन (नसों से पोषक तत्व) दिया मुझे दिया जा रहा है। ऐसा अनुभव उन्होंने पहले कभी नहीं किया था। मेरी रात बहुत सामान्य गुजरी, जिसमें मुझे बहुत कम नींद आई। मुझे बिल्कुल भी भूख नहीं लग रही है, और मुझे उम्मीद है कि, मैं इस मुश्किल दौर से गुजर जाऊंगा।”

खोपड़ी, गायब अंगूठा और बीमारियां… 2300 साल पुरानी मिस्र की ममी के अंदर CT स्कैन से और क्या-क्या दिखा?

0

प्राचीन मिस्र की ममी आज भी आधुनिक विज्ञान के लिए एक पहेली बनी हुई है। हाल ही में सेमेलवेइस विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने उन्नत 3D इमेजिंग और सीटी स्कैनिंग तकनीक के जरिए 2,300 साल से सीलबंद ममीकृत अंगों रिसर्च किया है।

यह ममी 1916 में मिली थी, लेकिन अब तक इसका अध्‍ययन नहीं किया गया था। ये ममी 100 साल से ज्‍यादा समय तक काहिरा के इजिप्‍ट म्‍यूजियम के स्‍टोर रूम में यूं ही पड़ी रही। अब जब इस ममी का अध्ययन किया गया तो कई कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

सीटी स्कैन में हुआ खुलासा

दरअसल, 2,300 साल पुरानी मिस्र की ममी के अंदरुनी भाग का खुलासा आधुनिक CT स्कैन (Computed Tomography) तकनीक के जरिए किया गया है। इस तकनीक ने बिना पट्टियां खोले हड्डियों की टूट-फूट, प्राचीन बीमारियों और ममीकरण की सूक्ष्म परतों को उजागर कर दिया है, जो दशकों से संग्रहालयों की फाइलों में दबे हुए थे।

उन्नत सीटी और 3डी स्कैनिंग तकनीक का उपयोग करते हुए वैज्ञानिकों ने 2,300 वर्ष से अधिक पुराने अंगों, खोपड़ियों और एक पैर की जांच की है। बताया जाता है कि ये अवशेष 401 से 259 ईसा पूर्व के बीच के हैं और दशकों तक संग्रहालयों के संग्रह में संरक्षित रहे, लेकिन इनका इतने विस्तार से अध्ययन पहले कभी नहीं किया गया था।

क्या बोले विशेषज्ञ?

अब हड्डियों, पट्टियों और संरचनात्मक क्षति का स्पष्ट आंतरिक दृश्य सामने आया है, जो पहले छिपा हुआ था। विशेषज्ञों का कहना है कि हड्डियों के गायब हिस्सों और रोग के निशानों जैसी छोटी-छोटी विशेषताएं भी अब ममी को खोले या नुकसान पहुंचाए बिना दिखाई दे रही हैं। यह प्राचीन संरक्षण विधियों की एक दुर्लभ झलक है, जिन्हें आज भी पूरी तरह से समझा नहीं गया है।

सीटी स्कैन में शरीर के कई अंगों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिनमें दो खोपड़ियाँ, दो निचले अंग, एक हाथ और लिनन की पट्टियों में कसकर लिपटा हुआ एक पैर शामिल था। प्रत्येक अंग को उच्च-रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग सिस्टम का उपयोग करके स्कैन किया गया। परिणाम पहले के प्रयासों की तुलना में अधिक स्पष्ट थे।

सबसे महत्वपूर्ण खोजों में से एक पैर

शोधकर्ताओं का कहना है कि पहले की जांचों में कई आंतरिक विवरण छूट गए थे। सबसे महत्वपूर्ण खोजों में से एक पैर है। इस पर अभी भी पट्टियां लिपटी हुई हैं। स्कैन के माध्यम से अंदर की हड्डियां स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हैं।

पैर के अंगूठे का एक हिस्सा गायब प्रतीत होता है। ऐसा लगता है कि यह क्षति शव को संरक्षित करने से पहले या बाद में हुई है। अभी तक कोई भी पूरी तरह से निश्चित नहीं है। एक समय ऐसा भी था जब यह माना जा रहा था कि वही पैर किसी पक्षी का है। लेकिन अब यह धारणा गलत साबित हो चुकी है।

हड्डियों में रोग के लक्षण

मिस्र की ममी की हड्डियों के विश्लेषण से बीमारी के लक्षण और मिश्रित आयु के अवशेष सामने आए हैं। कुछ हड्डियों में रोग के लक्षण दिखाई देते हैं। एक अंग ऑस्टियोपोरोसिस से प्रभावित प्रतीत होता है। यह स्थिति हड्डियों की संरचना को कमजोर कर देती है और फ्रैक्चर की संभावना को बढ़ा देती है। प्राचीन काल में, इससे चलने-फिरने में गंभीर समस्याएँ हो सकती थीं। संभवतः जानलेवा चोट भी लग सकती थी।

दूसरा अंग किसी कम उम्र के व्यक्ति का प्रतीत होता है। हड्डियां कम विकसित हैं। विकास के पैटर्न से एक अलग आयु वर्ग का संकेत मिलता है, हालांकि सटीक विवरण अभी भी अध्ययन के अधीन हैं। हाथ की स्थिति अभी भी अनिश्चित है। शोधकर्ता अभी भी यह निर्धारित करने की कोशिश कर रहे हैं कि यह किसी बच्चे का हाथ था या वयस्क का। केवल आकार ही पर्याप्त नहीं है। हड्डियों की संरचना और विकास संबंधी संकेतकों का अधिक बारीकी से विश्लेषण किया जा रहा है। अभी तक कुछ भी पूरी तरह से पुष्ट नहीं हुआ है।