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आगरा के फाउंड्री नगर में सेटेलाइट बस स्टेशन का जल्द होगा शुरू, ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत

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 फाउंड्री नगर में सेटेलाइट बस स्टेशन बनकर तैयार हो चुका है। बस स्टेशन के वृहद स्तर पर विकास को 138 करोड़ रुपये का प्रस्ताव स्वीकृत हो चुका है। बस स्टेशन शुरू होने से अलीगढ़, हाथरस की ओर आने वाली बसों का ठहराव वहीं हो सकेगा, जिससे शहर में ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार होगा।

जिला उद्योग बंधु की सोमवार को कलक्ट्रेट में हुई बैठक में राज्य सड़क परिवहन निगम के अधिकारियों ने यह जानकारी दी। डीएम मनीष बंसल ने बस स्टेशन का शीघ्र शुभारंभ कराने के निर्देश दिए।

हाईवे पर बसों के अनाधिकृत ठहराव पर किए जाएंगे चालान

बैठक में भगवान टॉकीज, अबुल उलाह दरगाह, वॉटर वर्क्स पर बसों के अनाधिकृत ठहराव से लगने वाले जाम की समस्या भी उठी। डीएम ने एसीपी ट्रैफिक इमरान अहमद को निरीक्षण कर रिपाेर्ट देने, बस चालकों के चालान काटने के निर्देश दिए।

बिजली आपूर्ति में आ रही समस्या का प्रकरण उठा

एत्मादपुर के गढ़ी महासिंह सब-स्टेशन से जुड़ी औद्योगिक इकाइयों के रास्ते में बिजली की लाइन से टहनियों के संपर्क से बिजली आपूर्ति में आ रही समस्या का प्रकरण उठा।

इंसुलेटेड केबल का प्रस्ताव तैयार कराने को निर्देशित किया

डीएम ने वन विभाग को छंटाई की अनुमति के लिए अग्रिम कार्रवाई सुनिश्चित करने और बिजली विभाग को छह किमी क्षेत्र में इंसुलेटेड केबल का प्रस्ताव तैयार कराने को निर्देशित किया। टेढ़ी बगिया से चार पुलिया तक बनाए जा रहे नाले के निर्माण से आवागमन अवरुद्ध होने पर नगर निगम के अधिकारियों को तलब किया गया। इन्वेस्टर्स समिट में हुए मेमोरैंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर संबंधित विभागों से समन्वय कर जोनल प्लानिंग करने और नुनिहाई औद्योगिक क्षेत्र में फायर स्टेशन की स्थापना का मामला भी उठा।

सीडीओ प्रतिभा सिंह, एडीएम प्रशासन आजाद भगत सिंह, एडीएम न्यायिक धीरेंद्र सिंह, अपर नगर आयुक्त शिशिर कुमार, उपायुक्त उद्योग शैलेंद्र सिंह, सीएफओ देवेंद्र सिंह मौजूद रहे।

एक मजबूरी के कारण पहली बार जनता के लिए खोले गए थे बकिंघम पैलेस के दरवाजे, दिलचस्प है ये इनसाइड स्टोरी

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लंदन का बकिंघम पैलेस आज न केवल ब्रिटेन की शान है, बल्कि दुनिया भर के पर्यटकों के लिए एक बड़ा आकर्षण भी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस भव्य महल के दरवाजे आम जनता के लिए किसी खुशी के मौके पर नहीं, बल्कि एक भारी नुकसान की भरपाई के लिए खोले गए थे?

जी हां, आर्थिक मजबूरी की वजह से बकिंघम पैलेस के दरवाजों को आम जनता के लिए खोला गया था। आइए जानें आखिर क्या थी वह मजबूरी।

विंडसर कैसल की आग और भारी नुकसान

इस कहानी की शुरुआत होती है नवंबर 1992 से, जब शाही परिवार के एक और मशहूर निवास, विंडसर कैसल में भीषण आग लग गई थी। इस तबाही ने महल के 100 से भी ज्यादा कमरों को मलबे में तब्दील कर दिया। जब नुकसान का आकलन किया गया, तो इसकी मरम्मत का खर्च करीब 37 मिलियन पाउंड तक जा पहुंचा।

उस समय एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया। जनता का मानना था कि शाही महल की मरम्मत का भारी-भरकम बोझ टैक्स भरने वाले आम नागरिकों पर नहीं डालना चाहिए। इसी दबाव और मरम्मत के लिए फंड जुटाने की जरूरत के चलते एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया।

पहली बार खुले शाही दरवाजे

जनता के विरोध और आर्थिक जरूरत को देखते हुए, 29 अप्रैल 1993 को पहली बार बकिंघम पैलेस के स्टेट रूम्स को आम जनता के लिए खोलने का ऐलान किया गया। उस समय महल के अंदर जाने के लिए 8 पाउंड का टिकट रखा गया था। इस टिकट खिड़की से होने वाली कमाई का इस्तेमाल विंडसर कैसल की मरम्मत के लिए किया गया। इस तरह, एक आपदा ने आम लोगों को राजा-महाराजाओं की आलीशान दुनिया को करीब से देखने का मौका दे दिया।

कैसे बना बकिंघम पैलेस शाही महल?

बकिंघम पैलेस का इतिहास भी कम रोचक नहीं है। इसकी नींव 1703 में पड़ी थी, जब एक स्थानीय अधिकारी जॉन शेफील्ड ने इसे अपने निजी रहने के लिए बकिंघम हाउस के नाम से बनवाया था।

बाद में, साल 1761 में किंग जॉर्ज तृतीय ने इसे खरीद लिया। समय बीतने के साथ, साधारण सा दिखने वाला यह घर एक भव्य महल में बदलता गया। आखिर में, 1837 में जब महारानी विक्टोरिया ने सत्ता संभाली, तब इसे आधिकारिक तौर पर शाही निवास घोषित किया गया।

एक घूंट भरते ही रोम-रोम को ताजगी पहुंचाता है ‘तरबूज का शरबत’, स्वाद ऐसा कि गर्मी में खुश हो जाए दिल

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गर्मी के दिनों में जब प्यास बुझाने के लिए सादा पानी भी कम लगने लगता है। तब मन बस एक ही चीज तलाशता है, जो न सिर्फ प्यास बुझाए बल्कि शरीर के कोने-कोने में ठंडक भर दे। ऐसे में, ‘तरबूज का शरबत’ किसी वरदान से कम नहीं है। इसका रिफ्रेशिंग स्वाद लेकर ही आधे से ज्यादा थकान तो वैसे ही दूर हो जाती है।

ताजगी का जबरदस्त डोज है ‘तरबूज शरबत’

तरबूज में लगभग 92% पानी होता है, जो इसे गर्मियों का सबसे बेहतरीन फल बनाता है, लेकिन जब इसे शरबत का रूप दिया जाता है, तो इसकी ताकत और बढ़ जाती है। इसका एक ठंडा गिलास आपके शरीर को तुरंत हाइड्रेट करता है और लू लगने के खतरे को भी कम कर देता है। तरबूज के शरबत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह शरीर को भारी महसूस कराए बिना भरपूर एनर्जी देता है।

तरबूज का शरबत बनाने के लिए सामग्री

  • ताजा तरबूज: 2-3 कप (छोटे टुकड़ों में कटा हुआ, बीज निकाल दें)
  • पुदीने की पत्तियां: 10-12 (ताजगी के लिए)
  • नींबू का रस: 1 बड़ा चम्मच
  • काला नमक: आधा छोटा चम्मच (स्वाद बढ़ाने के लिए)
  • चीनी या शहद: 1 चम्मच (अगर तरबूज कम मीठा हो, तो)
  • बर्फ के टुकड़े: जरूरत के अनुसार
  • चाट मसाला: एक चुटकी (ऊपर से छिड़कने के लिए)

    तरबूज का शरबत बनाने की विधि

    • सबसे पहले तरबूज के छिलके उतारकर उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। कोशिश करें कि जितने हो सकें उतने बीज निकाल दें, ताकि शरबत का स्वाद कड़वा न हो।
    • एक मिक्सर जार या ब्लेंडर लें। इसमें कटे हुए तरबूज के टुकड़े, पुदीने की ताजा पत्तियां, काला नमक और चीनी डालें। अब इसे तब तक ब्लेंड करें जब तक कि यह बिल्कुल स्मूद न हो जाए।
    • अगर आप बिल्कुल प्लेन और पतला शरबत पसंद करते हैं, तो इसे एक बड़ी छलनी से छान लें। हालांकि, तरबूज का पल्प सेहत के लिए अच्छा होता है, इसलिए आप इसे बिना छाने भी इस्तेमाल कर सकते हैं। अब इसमें ताजा नींबू का रस मिलाएं और अच्छी तरह चलाएं।
    • बस फिर, एक कांच का गिलास लें। उसमें 2-3 बर्फ के टुकड़े डालें। तैयार किया हुआ तरबूज का शरबत इसमें पलटें। ऊपर से एक चुटकी चाट मसाला छिड़कें और गिलास के किनारे पर पुदीने की एक पत्ती या तरबूज का छोटा टुकड़ा लगाकर इसे गार्निश करें।
    • अगर आप इस शरबत को थोड़ा और मजेदार बनाना चाहते हैं, तो इसमें आधा छोटा चम्मच भुना हुआ जीरा पाउडर मिला दें। यह न सिर्फ स्वाद को दोगुना कर देगा, बल्कि आपके पाचन के लिए भी बहुत अच्छा रहेगा।

4000 करोड़ की Ramayana की ‘सीता’ आई ट्रोलर्स के निशाने पर, साईं पल्लवी की हिंदी पर उठा रहे सवाल

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 साउथ एक्ट्रेस साई पल्लवी को हाल ही में ऑनलाइन काफी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। यह तब हुआ जब उन्होंने बताया कि वह अच्छी हिंदी नहीं बोल पातीं, जिसके बाद लोगों ने आने वाली पौराणिक फिल्म ‘रामायण’ (Ramayana) में उन्हें सीता के रोल के लिए कास्ट किए जाने पर सवाल उठाए।

एक्ट्रेस की अपकमिंग फिल्म ‘एक दिन’ (Ek Din) फिल्म के एक हालिया इवेंट का एक वीडियो क्लिप वायरल हो गया, जिसमें लोग मेकर्स की आलोचना कर रहे हैं और सवाल पूछ रहे हैं कि उन्होंने ‘रामायण’ के लिए साई को क्यों चुना।

साई पल्लवी की हो रही खूब ट्रोलिंग

साई पल्लवी, आमिर खान के आने वाले प्रोडक्शन ‘एक दिन’ के साथ अपना मोस्ट अवेटेड बॉलीवुड डेब्यू कर रही हैं। ‘एक दिन’ (Ek Din) के मेकर्स ने हाल ही में मुंबई में ‘एक दिन की महफिल’ नाम से एक म्यूजिकल शाम का आयोजन किया, जिसमें आमिर खान, जुनैद खान और साई पल्लवी शामिल हुए।

इस इवेंट में, साई पल्लवी स्टेज पर आईं और वहां मौजूद लोगों, प्रेस और अपने फैंस को हिंदी में संबोधित किया। अपनी स्पीच के दौरान, उन्हें हिंदी बोलने में थोड़ी दिक्कत हुई और उन्होंने खुले तौर पर यह माना कि उनकी हिंदी ‘उतनी अच्छी नहीं है’।

सोशल मीडिया पर लोगों ने पूछे ये सवाल

यह क्लिप तेजी से वायरल हो गई, और सोशल मीडिया यूज़र्स ने इस पर सवाल उठाए और उन्हें ट्रोल किया। X पर यह वीडियो शेयर करते हुए, एक यूजर ने लिखा, ‘मिलिए साई पल्लवी से, जो हिंदी के बेसिक शब्द भी नहीं बोल सकतीं, और अब वह ‘रामायण’ में सीता माता का किरदार निभा रही हैं। 4000 करोड़ की फिल्म में ऐसे तथाकथित एक्टर्स को कास्ट करने से पहले ये लोग क्या पीते हैं, जो ‘चाहता’ और ‘चाहती’ के बीच फर्क भी नहीं कर सकते’?

एक अन्य यूजर ने मेकर्स की कास्टिंग चॉइस पर सवाल उठाते हुए लिखा, ‘सीता मां के रोल के लिए साई पल्लवी (Sai Pallavi) को कास्ट करते समय नितेश तिवारी (Nitesh Tiwari) आखिर क्या सोच रहे थे? वह तो ठीक से हिंदी भी नहीं बोल सकतीं। कितनी घटिया कास्टिंग है यार’।

कुछ लोगों ने किया साई का सपोर्ट

इस बीच कई लोगों ने साई पल्लवी का सपोर्ट भी किया। एक X यूजर ने लिखा, ‘हिंदी में उनके जितनी अच्छी अभिनेत्री कोई नहीं है और आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि ऐसी कई हिंदी अभिनेत्रियां हैं जो बिना भाषा जाने ही दूसरी भाषाओं की फिल्मों में काम करती हैं। वैसे भी, साई पल्लवी इसे बखूबी निभा लेंगी और जब लोग यह फिल्म देखेंगे, तो ज्यादातर लोगों को पता भी नहीं चलेगा कि उन्हें हिंदी नहीं आती थी’।

‘एक दिन’ के बाद, साई पल्लवी अगली बार नितेश तिवारी की ‘रामायण’ में नजर आएंगी, जो 2026 की दिवाली के आस-पास रिलीज होगी। यह फिल्म दो हिस्सों में रिलीज होगी, जिसका दूसरा हिस्सा 2027 में आएगा। नमित मल्होत्रा के प्रोडक्शन में बनी इस महागाथा में रणबीर कपूर भगवान राम और यश रावण की भूमिका में नजर आएंगे।

 

‘नूरी’ का वो दमदार विलेन, औरतों ने सुनाई थीं गालियां, अमिताभ के बने ‘लकी चार्म’; सिनेमा के ‘भरत’ की दास्तां

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 हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता भरत कपूर का सोमवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। रिपोर्ट्स की मानें तो 80 साल के अभिनेता को कार्डियक अरेस्ट आया था, उन्होंने मुंबई के सायन अस्पताल में अंतिम सांस ली।

आंखों में बड़े-बड़े ख्वाब लेकर इंडस्ट्री में एंटर हुए भरत कपूर यहां हीरो तो नहीं बन पाए, लेकिन उन्होंने विलेन बनकर सबके दिलों में एक अलग छाप छोड़ी। वह अमिताभ बच्चन के तो लकी चार्म बन गए, लेकिन महिलाओं को एक फिल्म देखने के बाद उनसे नफरत सी होने लगी। कौन सी थी वह फिल्म जिसमें भरत कपूर को देखकर औरतों ने सिनेमाघरों में खड़े होकर दी थीं गालियां, नीचे विस्तार से पढ़ें दिग्गज अभिनेता का यह किस्सा:

यशराज की फिल्म में बने थे खतरनाक विलेन

यशराज बैनर तले बनी रोमांटिक फिल्म ‘नूरी’ में भरत कपूर ने एक ऐसे खूंखार विलेन का किरदार अदा किया था, जिसे देखने के बाद महिलाएं उन्हें काफी गालियां देने लगी थीं। इस फिल्म में भरत कपूर ने ‘बशीर खान’ का किरदार निभाया था।इंस्टाग्राम पेज ‘ओल्ड इज गोल्ड’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 1979 में आई इस सुपरहिट फिल्म में उनका किरदार इतना पावरफुल था कि जब फिल्म सिनेमाघरों में आई, तो महिलाओं ने उन्हें थिएटर्स में गालियां देना शुरू कर दिया था, क्योंकि जिस तरह से वह नूरी (पूनम ढिल्लो) के साथ दुष्कर्म करते हैं, उससे औरतों के अंदर एक गुस्सा भर गया था। हालांकि, महिलाओं का गुस्सा उनके किरदार की सबसे बड़ी जीत बनी। फिल्म हिट हुई और अभिनेता को काफी तारीफ मिली।

फिल्म ‘नूरी’ में फारुख शेख, पूनम ढिल्लों, मदन पुरी, इफ्तिखार, पद्मा खन्ना, गीता सिद्धार्थ, जावेद खान और अवतार गिल जैसे कलाकार नजर आए थे। लता मंगेशकर और नितिन मुकेश की आवाज में गाए गए गाने ‘आजा रे ओ मेरे दिलबर आजा’ और ‘चोरी-चोरी कोई आया’, उस समय काफी हिट हुए थे।

अमिताभ बच्चन के थे लकी चार्म थे भरत कपूर

1972 में फिल्म ‘जंगल में मंगल’ से बतौर पुलिस इंस्पेक्टर अपना पहला रोल पाने वाले भरत कपूर ने अपने करियर में बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन के साथ काफी काम किया। उन्होंने अभिनेता के साथ ‘खुदा गवाह’, ‘तूफान’  और ‘आखिरी रास्ता’ में अभिनय किया था। भरत कपूर को अमिताभ बच्चन का लकी चार्म भी माना जाता था। दोनों ने साथ में जितनी भी फिल्में कीं, वे सभी बॉक्स ऑफिस पर सफल रहीं।

80 वर्षीय अभिनेता ने अपने करियर में तकरीबन 200 फिल्में कीं, जिनमें ‘राम बलराम’, ‘गुलामी’, ‘स्वर्ग’, और ‘साजन चले ससुराल’ शामिल हैं। इसके अलावा चार दशक तक एक्टिंग में सक्रिय रहने वाले अभिनेता ने ‘चंद्रकांता’, ‘परम्परा’, ‘सांस’ और ‘अमानत’ जैसे टीवी शोज किए।

‘रजिस्ट्रेशन हो चुका, फिर हंगामा कैसा?’, Vinesh Phogat के कमबैक ब्लॉक वाले आरोप पर WFI चीफ का पलटवार

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रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) के अध्यक्ष संजय सिंह ने स्टार पहलवान विनेश फोगाट के उन दावों को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि WFI उन्हें अगले महीने होने वाले नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में खेलने से रोक रहा है। संजय सिंह ने कहा कि विनेश का रजिस्ट्रेशन पहले ही पूरा हो चुका है और सवाल उठाया कि वह बेवजह मुद्दा क्यों बना रही हैं।

Vinesh Phogat के आरोपों को WFI चीफ ने किया खारिज

दरअसल, पेरिस ओलंपिक 2024 में 50 किग्रा कुश्ती वर्ग के गोल्ड पदक मैच से पहले विनोश फोगाट को अयोग्य घोषित किया गया था, क्योंकि फाइनल मैच की सुबह उनका वजह सीमा से 100 ग्राम ज्यादा पाया गया था। एक दिन पहले वो वजन सीमा के भीतर थी, लेकिन दूसरे दिन 100 ग्राम वजन में बढ़ोत्तरी के चलते उन्हें अयोग्य घोषित किया गया।

दिल तोड़ देने वाली इस घटना के बाद भारतीय पहलवान विनेश ने कुश्ती से संन्यास की घोषणा की थी, लेकिन पिछले दिसंबर में उन्होंने अपने रिटायरमेंट से यू-टर्न लिया और कुश्ती में वापसी का एलान किया।

इसके बाद विनेश ने ये खुलासा किया कि वह अगले महीने होने वाले नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में हिस्सा लेने की प्लानिंग कर रही थीं, लेकिन रजिस्ट्रेशन नहीं कर सकीं। उन्होंने WFI अधिकारियों से इसको लेकर संपर्क किया, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाह नहीं मिला। उन्होंने संघ पर उनकी कुश्ती में वापसी जानबूझकर रोकने का आरोप लगाया है, जिसे WFI के चीफ संजय सिंह ने खारिज कर दिया।

Manu Bhaker से Vaibhav Suryavanshi को लेकर पूछा सवाल तो मचा बवाल, फैंस बोले- ऐसे नहीं बनते ‘स्पोर्टिंग नेशन’

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Manu Bhaker Vaibhav Suryavanshi: भारत में जब भी खेल की बात की जाती है तो सबसे ज्यादा अहमियत क्रिकेट को दी जाती है। वैसे तो इंडिया के स्पोर्टिंग नेशन बनने को लेकर अक्सर चर्चाएं होती रहती हैं, लेकिन सच ये है कि यहां आज भी खेल में सिर्फ क्रिकेट का दबदबा है। उसके अलावा दूसरा कोई खेल देखने में लोग दिलचस्पी नहीं दिखाते।

हाल ही में एक ऐसा मामला सामना आया जहां दो बार की ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट मनु भाकर से एक मीडिया इंटरैक्शन के दौरान उनके खेल या उपलब्धियों के बजाय, युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी पर सवाल पूछा गया, जिससे सोशल मीडिया पर एक बहस छिड़ गई है। कई लोगों ने इसे मनु भाकर की उपलब्धियों के साथ अन्याय बताया है।

Manu Bhaker से वैभव को लेकर पूछा गया सवाल 

दरअसल, भारतीय शूटिंग संघ की 75वीं वर्षगांठ समारोह में मनु भाकर पहुंची थी, जहां शूटिंग लीग ऑफ इंडिया, ग्रासरूट प्रोग्राम और LA 2028 ओलंपिक से जुड़े एथलीट ऐप के अनावरण जैसे मुद्दों पर सवाल पूछे जा रहे थे। इसी दौरान पत्रकारों ने मनु भाकर से युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी पर राय मांगी। इस सवाल का जवाब देते हुए मनु ने कहा,

अगर वैभव सूर्यवंशी को सही मेंटरशिप मिले, उनके आसपास अच्छा माहौल हो और सही लोग मार्गदर्शन करें ,तो उम्र सिर्फ एक नंबर है। मुझे विश्वास है कि वह भारतीय खेलों का अगला बड़ा स्टार बन सकते हैं।”

फैंस भड़के

लेकिन सोशल मीडिया पर मनु भाकर से ऐसा सवाल पूछने की भारी आलोचना हो रही है। यूजर्स का कहना है कि एक ओलंपिक मेडलिस्ट शूटर से शूटिंग कार्यक्रम के दौरान क्रिकेटर से जुड़ा सवाल पूछना बिल्कुल गलत है। किसी दूसरे यूजर ने कहा कि तो इसलिए देश स्पोर्टिंग नेशन नहीं बन पा रहा है। केकेआर के पूर्व टीम डायरेक्टर जय भट्टाचार्या ने भी इस पर नाराजगी जताई और एक्स पर लिखा,

“दोस्तों, वह एक ओलंपिक पदक विजेता हैं। उनसे यह पूछना कि वो वैभव सूर्यवंशी के बारे में क्या सोचती हैं, उनकी उपलब्धियों और उनके खेल के साथ नाइंसाफी है। वैसे भी क्रिकेट देश का सबसे बड़ा जुनून है, आपके खेल संपादकों को सूर्यवंशी पर हेडलाइन बनाने के लिए किसी और सेलिब्रिटी के बयान की जरूरत नहीं है।वैकल्पिक तौर पर, अगली बार वैभव सूर्यवंशी से मनु भाकर के बारे में पूछकर देखिए और देखिए आपको कैसे जवाब मिलते हैं।”ऐसे में ये समझा जा रहा है कि अगर भारत को सही में स्पोर्टिंग नेशन बनना है तो उन्हें सबसे पहले सोच को बदलना होगा। एक शूटर को वही सम्मान मिलना चाहिए जो कि एक क्रिकेटर को मिलता है। एक शूटिंग विश्व कप की चर्चा उतनी होनी चाहिए, जितनी आईपीएल के मैच की होती है।

दुबई चॉकलेट के चक्कर में महंगा हुआ पिस्ता, ईरान युद्ध ने बढ़ाई टेंशन

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ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध होने के कारण सिर्फ तेल के कीमतों में इजाफा देखने को नहीं मिल रहा है। इसके साथ ही एक और चीज है जो पिछले 8 सालों के रिकॉर्ड को तोड़कर बहुत तेजी से महंगा होता जा रहा है। उसका नाम है ‘पिस्ता’, इस खाने की चीज पर भी तेल जैसा असर देखने को मिल रहा है।

ईरान-अमेरिका मिलकर 80% पिस्ता करते है निर्यात

ईरान में चल रहे संघर्ष के कारण पूरी दुनिया में यह महंगा मिल रहा है। दरअसल, ईरान और अमेरिका मिलकर दुनिया की लगभग 80% पिस्ता आपूर्ति पूरी करते हैं, जिसमें अमेरिका सबसे बड़ा उत्पादक है। ईरान पर हुए हमले ने पिस्ता के बाजार का समीकरण ही बदल दिया है।

ईरान संघर्ष ने पिस्ता के निर्यात को बाधित कर दिया है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बंद होने के कारण कीमतें 8 साल के उच्चतम स्तर $4.57 (430 रुपये) प्रति पाउंड पर पहुंच गई हैं। दुनिया के सबसे बड़े पिस्ता उत्पादकों में से एक देश को निर्यात में रुकावटों, शिपिंग में अड़चनों और आपूर्ति की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

सप्लाई चेन में आई रुकावटों के कारण बढ़े दाम

ब्लूमबर्ग के अनुसार, साल 2023 के आखिर से ही पिस्ता के कीमतें लगभग 30% बढ़ चुकी थीं। इसी दौरान वायरल दुबई चॉकलेट का जबरदस्त क्रेज देखने को मिला था। ब्लूमबर्ग ने आगे बताया कि सप्लाई चेन में आई रुकावटों के कारण मार्च में पिस्ता की कीमतें अचानक से बढ़कर $4.57 (लगभग ₹430.52) प्रति पाउंड तक पहुंच गई, जो मई 2018 के बाद से अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।

इसके साथ ही पिस्ता का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश तुर्कि है। वहीं, ईरानी पिस्ता का एक बड़ा हिस्सा सीधे प्रतिबंधों से बचने के लिए तुर्की के रास्ते भेजा जाता है। इससे एक और रणनीतिक परेशानी पैदा हो गई है। जिसके कारण दाम में बढ़ोतरी देखी जा रही है।

इसके अलावा पिस्ता के दाम बढ़ने के पीछे एक और बड़ा कारण यह बताया जा रहा है कि, युद्ध के कारण ईरान के पिस्ता गोदामों को काफी नुकसान हुआ। जिसके कारण सप्लाई बाधित हो गया। सूत्रों की माने तो, अमेरिका और इजरायल की सेना ने पिस्ता की खेती पर भी सीधा हमला किया। इन हमलों में कृषि से जुड़े बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया, जिसमें ईरान के पिस्ता गोदाम भी शामिल थे।

पिस्ता के सबसे बड़े उत्पादक आमने-सामने

मार्केट रिसर्च कंपनी मोर्डोर इंटेलिजेंस की एक रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक पिस्ता बाजार का मूल्य 2026 में $5.49 बिलियन है और 2031 तक इसके $7.02 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है। ईरान दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा पिस्ता उत्पादक देश है। इस देश का वैश्विक पिस्ता उत्पादन में लगभग पांचवां हिस्सा और निर्यात में लगभग एक-तिहाई हिस्सा है, जबकि अमेरिका वैश्विक उत्पादन का लगभग 40% हिस्सा उत्पादित करता है।

वहीं, साल 2011 से अमेरिका लगातार सबसे बड़े निर्यातक के रूप में आगे बढ़ा है। अमेरिका ने इस दौरान ईरान को काफी पीछे छोड़ दिया। जिसके कारण युद्ध में उलझते ही पूरी दुनिया में पिस्ता के दामों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। मौजूदा समय में ईरान पूरे वैश्विक पिस्ता उत्पादन का सिर्फ 20% हिस्सा ही उत्पादन कर पा रहा है।

पिस्ता मूल रूप से ईरान का ड्राई फ्रूट

बता दें कि, पिस्ता मूल रूप से ईरान और मध्य एशिया का ड्राई फ्रूट है। वैसे तो दुनिया में इसकी खेती हजारों सालों से की जा रही है, लेकिन प्राचीन समय में इसे फारस (ईरान) में अमीरी की निशानी माना जाता था। पिस्ता के पेड़ सूखे और गर्म इलाकों में अच्छे से उगते हैं। आज भी ईरान दुनिया के सबसे बड़े पिस्ता उत्पादकों में से एक है। वहां के ‘अकबरी’ और ‘फंदोकी’ पिस्ता काफी मशहूर किस्मों में से हैं। यह स्वाद के साथ-साथ यह सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है।

इमरान खान की आंखों में दिक्कत, इलाज के बाद वापस जेल भेजे गए पाकिस्तान के पूर्व पीएम

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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान काफी लंबे समय से भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में बंद है। इमरान खान की दाईं आंख का इलाज हुआ है, जिसके बाद आज मंगलवार को उन्हें वापस जेल भेज दिया गया है।

74 वर्षीय इमरान खान को इस साल जनवरी के आखिर में ‘राइट सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन’ (CRVO) का पता चला था और उन्हें पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) लाया गया था। यहां उन्हें एक एंटी-VEGF इंजेक्शन दिया गया। यह इलाज हर महीने दोहराया जा रहा है।

इमरान खान की आंखों का इलाज

PIMS के प्रवक्ता के मुताबिक, इमरान खान को 28 अप्रैल को आंखों के आगे के इलाज के लिए अस्पताल लाया गया था, जिसके दौरान उन्हें चौथा इंट्राविट्रियल इंजेक्शन दिया गया।

PIMS के प्रवक्ता ने बताया, ‘इलाज से पहले, आंखों के डॉक्टर ने उनकी जांच की और उन्हें चिकित्सकीय रूप से स्थिर पाया।’ इलाज के चौथे चरण की प्रक्रिया के पूरा होने के बाद इमरान खान को वापस जेल भेज दिया गया है।

मेडिकल की तरफ से आगे जानकारी दी गई कि इमरान की ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी की गई है, जिसमें चिकित्सकीय सुधार दिखाई दिया। सर्जनों की देखरेख में माइक्रोस्कोपी की मदद से इमरान खान को इंट्राविट्रियल इंजेक्शन की चौथी खुराक दी गई है।

अब कैसी है इमरान खान की तबीयत?

PIMS के प्रवक्ता ने कहा, ‘अस्पताल में रहने के दौरान इमरान खान इलाज से पहले, उसके दौरान और बाद में भी शारीरिक रूप से ठीक रहे। उन्हें आगे की देखभाल, फॉलो-अप सलाह और संबंधित दस्तावेजों के साथ अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।’

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के चेयरमैन गोहर अली खान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए खान के मेडिकल चेक-अप की पुष्टि की। गोहर ने कहा, ‘इलाज चाहे जो भी हो, हमारी मुख्य चिंता का जवाब अभी भी नहीं मिला है।’

गोहर अली खान ने उस मांग का जिक्र किया जिसमें कहा गया था कि खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को इलाज के लिए किसी अस्पताल में भर्ती कराया जाए, जहां उनके निजी डॉक्टरों की देखरेख में और परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में उनका इलाज हो सके।

इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी की 17 अप्रैल को रावलपिंडी के एक अस्पताल में आंखों की सर्जरी हुई थी, जिसके बाद उन्हें वापस रावलपिंडी की अदियाला जेल भेज दिया गया।

पिछले साल जनवरी में अल-कादिर ट्रस्ट मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद से ही खान और बुशरा, दोनों रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं।

भीषण गर्मी में कूल-कूल होगा आगरा-फर्रुखाबाद रूट के यात्रियों का सफर, AC ई-बसों का संचालन शुरू

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भीषण गर्मी में एसी ई-बसें यात्रियों का सफर आसान बनाएंगीं। आगरा फोर्ट डिपो द्वारा फर्रुखाबाद डिपो तक इनका संचालन आरंभ करा दिया गया है। मैनपुरी स्टेशन पर भी इनका ठहराव निर्धारित किया गया है। हालांकि अभी रूट चार्ट सिस्टम पर फीड नहीं हुआ है।

आगरा फोर्ट डिपो से मैनपुरी स्टेशन होते हुए आरंभ किया गया संचालन

आगरा जिले को ई-बसों की सुविधा मिलने के बाद ट्रायल सफल होने पर उनके फेरे बढ़ाए गए हैं। आगरा फोर्ट डिपो से एसी ई-बस संख्या यूपी 80 केटी 3630 और यूपी 80 केटी 7187 को आगरा से फर्रुखाबाद तक संचालित कराया जा रहा है। दोनों बसें दोपहर में मैनपुरी स्टेशन पर कुछ देर के ठहराव के बाद आगरा के लिए रवाना हो रही हैं।

स्टेशन प्रभारी अनुज कुमार दुबे का कहना है कि अभी दोनों बसों का रूट चार्ट हमारे यहां फीड नहीं हुआ है, लेकिन इनसे यात्रियों को सफर में गर्मी का सामना नहीं करना होगा।

इन रूट से गुजरेंगी

आगरा फोर्ट डिपो से होकर, आईएसबीटी, रामबाग चौराहा, फिरोजाबाद स्टेशन, शिकाेहाबाद स्टेशन, टूंडला होते हुए मैनपुरी बस स्टेशन पर रुकेंगी। यहां से भोगांव, बेवर होते हुए फर्रुखाबाद को रवाना होंगी।