अभिनेता रितेश देशमुख और उनकी पत्नी हाल ही में एक्टर का सपना साकार होने पर काफी भावुक हो गए। सोमवार को ‘राजा शिवाजी’ के ट्रेलर लॉन्च पर फिल्म की लंबी-चौड़ी स्टारकास्ट में रितेश देशमुख संग उनकी पत्नी जेनेलिया देशमुख, अभिषेक बच्चन, महेश मांजरेकर, विद्या बालन, भाग्यश्री, बमन ईरानी समेत फिल्म की संगीतकार जोड़ी अजय-अतुल भी मौजूद रहे। इस मौके पर फिल्म के लेखक, निर्देशक और निर्माता रितेश क्यों आंसू नहीं रोक पाए, नीचे पढ़ें डिटेल्स:
2016 में रितेश देशमुख ने देखा था यह सपना
छत्रपति शिवाजी महाराज का पात्र निभाने को लेकर रितेश ने कहा, “जन्म के बाद मैंने अपने माता-पिता को देखा, ईश्वर को जाना और शिवाजी महाराज को जाना। छोटा था तब किला बनाता था, भगवा झंडा लगाता था। हर बार यही लगा कि हम महाराज के सैनिक हैं, खुद को कभी महाराज नहीं समझा। एक बार स्कूल का वार्षिक दिवस था। उसमें मैं सैनिक की भूमिका कर रहा था, भाला लेकर नाच रहा था। मेरा एक मित्र महाराज की भूमिका निभा रहा था। मैंने उन्हें आदरपूर्वक नमन किया।
वही सैनिक जो स्टेज पर था, वही आज भी इस स्टेज पर है और महाराज को फिर से आदरपूर्वक नमन कर रहा है। साल 2016 से मैं इस फिल्म को बनाने का प्रयास कर रहा था, साल 2019 में जब दोबारा सोचा, तो कोविड आ गया था। ऐसा लगा कि शिवाजी महाराज खुद कह रहे थे कि अभी तुम्हारी बारी आई नहीं है। फिर साल 2021 में फिल्म शुरू की। महाराज पर फिल्म बनाने के लायक मैं नहीं हूं क्योंकि उनकी कीर्ति बहुत बड़ी है। हम केवल फिल्म बनाने का प्रयत्न कर सकते हैं।”
‘इंतजार में थी, कब रितेश देंगे आफर’- विद्या बालन
फिल्म में बड़ी बेगम का रोल कर रही विद्या बालन ने कहा, “मैंने सुना था कि छत्रपति शिवाजी महाराज पर फिल्म बन रही है, जिसे रितेश बना रहे हैं। मैं सोच रही थी रितेश मेरे पास यह फिल्म लेकर क्यों नहीं आ रहे हैं? फिर लगा कि मेरे लिए कोई रोल नहीं होगा या वह मुझे पसंद नहीं करते होंगे। फिर वह आए। उन्होंने आकर कहानी सुनाई। मैंने उन्हें कहा कि सोचकर बताती हूं, क्योंकि मैं ज्यादा उत्सुकता नहीं दिखाना चाहती थी। वह जैसे ही घर से निकले, मैंने उनको फोन कर कहा कि मैं फिल्म कर रही हूं।’ फिल्म एक मई को सिनेमाघरों में हिंदी और मराठी में रिलीज होगी।”
संजय दत्त ने क्यों की मराठी फिल्म के लिए हां?
फिल्म में अफजल खान की भूमिका निभा रहे संजय दत्त ने इस मौके पर कहा, “मैं इस फिल्म से इसलिए जुड़ा, ताकि मराठी सिनेमा को प्रमोट कर सकूं। रितेश मेरे छोटे भाई जैसे हैं। हमारे पिता दोस्त थे। उनका इस फिल्म में मुझे लेने के लिए कहना किसी लकीर जैसा था।’ रितेश के निर्देशन में काम करने को लेकर आगे संजय ने कहा, ‘काफी मुश्किल रहा, वह डांटते नहीं थे, लेकिन उन्हें जो चाहिए था, वह चाहिए था।”
