अब शहर और गांवों में बंदरों के उत्पात पर लगाम लग सकता है। शासन ने मानव–बंदर संघर्ष को नियंत्रित करने के लिए नई कार्ययोजना जारी की है।
इस योजना के तहत बंदरों (रिसस मकाक) को पकड़ने, सुरक्षित स्थान पर छोड़ने और उनका प्रबंधन करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी राजेश कुमार ने बताया कि अब बंदरों को पकड़ने के लिए वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के अंतर्गत किसी विशेष अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी।
नगर निगम, नगर निकाय और ग्राम पंचायत द्वारा प्रशिक्षित और अनुभवी कर्मियों द्वारा पकड़ा जाएगा। पकड़े गए बंदरों को प्राथमिकता के आधार पर जिले के वन क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा। यदि वहां पर्याप्त जगह नहीं होगी, तो उन्हें अन्य सुरक्षित वन क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जाएगा।
योजना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि संरक्षित क्षेत्रों में बंदरों को नहीं छोड़ा जाएगा। इस कार्य की निगरानी के लिए जिला स्तरीय समिति का गठन किया गया है।
इस समिति में पुलिस, वन विभाग, नगर निकाय, पशुपालन, पंचायत विभाग और एक गैर-सरकारी संस्था के प्रतिनिधि सदस्य के रूप में शामिल होंगे। यह निर्देश भी दिए गए हैं कि कचरा प्रबंधन ठीक से करें, ताकि बंदरों को आसानी से भोजन न मिले।
इसके साथ ही सभी प्रभावित क्षेत्रों में जन-जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे, जिसमें वन विभाग के अधिकारी आम जनता को बंदरों और उनके व्यवहार के बारे में आवश्यक जानकारी देंगे।
