खरगे पर टिप्पणी को लेकर सियासत गरम: राहुल गांधी बोले- ‘अभद्र भाषा अस्वीकार्य’, पीएम मोदी से मांगा जवाब

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किए जाने की कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी सहित पार्टी के अन्य नेताओं ने निंदा की है।

राहुल गांधी ने कहा है कि हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के विरुद्ध इस्तेमाल की गई अभद्र और घटिया भाषा पूरी तरह से निंदनीय, शर्मनाक और अस्वीकार्य है।

खरगे का अपमान सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि, खरगे देश के एक वरिष्ठ और लोकप्रिय दलित नेता हैं। उनका अपमान किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि इस समाज के करोड़ों लोगों का भी अपमान है। लेकिन यह कोई नई बात नहीं है। यह भाजपा-आरएसएस की पुरानी मानसिकता है।

इतिहास गवाह है कि जब-जब कोई दलित नेता सच बोलता है, तब-तब ये उसे अपमानित करने पर उतर आते हैं। यही इनकी विचारधारा है, यही इनका असली चरित्र और चेहरा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से सीधा सवाल है कि क्या आप हिमंत की इस भाषा का समर्थन करते हैं। आपकी चुप्पी मजबूरी नहीं, सहमति है।

प्रधानमंत्री यदि देश के करोड़ों दलितों के सम्मान पर हमला होते देख मुंह न खोलें तो वह न सिर्फ अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं, बल्कि उस अपमान के हिस्सेदार भी हैं।

अन्य नेताओं ने भी बोला हमला

वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत, कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश से लेकर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू ने भी भाजपा और असम के मुख्यमंत्री पर जवाबी हमला बोला।

गहलोत ने एक्स पर कहा कि खरगे जैसे कद के नेता के खिलाफ घटिया भाषा का इस्तेमाल किसी भी सभ्य समाज में अस्वीकार्य है। जयराम रमेश ने कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे सामाजिक सशक्तीकरण के एक बड़े प्रतीक हैं।

उनके खिलाफ ऐसी अभद्र टिप्पणी हर सीमा से परे अत्यंत शर्मनाक है। यह न केवल हिमंत की मानसिक विकृति बल्कि भाजपा की दलित-विरोधी मानसिकता को भी उजागर करती है।

हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविदर सुखू ने भी कहा कि यह हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर प्रश्न खडा करती है। 50 वर्षों से निष्कलंक सार्वजनिक जीवन जीने वाले देश के वरिष्ठतम दलित नेताओं में से एक राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष खरगे के प्रति ओछी टिप्पणी संस्थागत गरिमा पर गहरा आघात है।

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