मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच शनिवार को ईरान के बुशहर न्यूक्लियर एनर्जी पावर प्लांट से मात्र 350 मीटर की दूर पर मिसाइल गिरी। बुशहर न्यूक्लियर एनर्जी प्लांट पर हुए हमले ने पूरे खाड़ी देशों में खौफ पैदा कर दिया है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी कि ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित न्यूक्लिर प्लांट पर लगातार हो रहे हमले रेडिएश का कारण बन सकते हैं। इससे तेहरान ही नहीं बल्कि, खाड़ी देशों (GCC) की राजधानियों में जीवन को समाप्त कर सकता है।
बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र की कब हुई थी शुरुआत?
ईरान के बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निर्माण की परियोजना शाह मोहम्मद रजा पहलवी के शासनकाल के दौरान 1975 में शुरू हुई थी। शुरुआत में से जर्मनी की सीमेंस कंपनी को सौंपा गया था। लेकिन 1979 की इस्लामी क्रांति और ईरान-इराक युद्ध (1980-1988) के कारण इसका काम बाधित हो गया था।
ईरान ने 1980 के दशक के उत्तरार्ध में इस परियोजना को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया, लेकिन जर्मनी की सरकार ने परमाणु प्रसार संबंधी चिंताओं के कारण सीमेंस को पीछे हटने के लिए मना लिया। अंततः इस संयंत्र का निर्माण रूस द्वारा किया गया , जिसने 1996 में अनुबंध अपने हाथ में लिया और सितंबर 2013 में आधिकारिक तौर पर इसे सौंप दिया।
1999 में रिएक्टर को चालू करने की निर्धारित समय सीमा वित्तीय विवादों, भू-राजनीतिक दबाव और अन्य कारकों के कारण 11 वर्षों तक विलंबित रही।
बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र ईरान के दक्षिणी भाग में स्थित है। इसमें 1,000 मेगावाट का प्रेशराइज्ड वॉटर रिएक्टर लगा हुआ है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, यह ईरान की कुल बिजली का लगभग 1-2 प्रतिशत प्रदान करता है।
बिजली के लिए किया जाता रूसी यूरेनियम का उपयोग
बुशहर में वर्तमान में चल रहे रिएक्टर में रूस से प्राप्त 4.5 प्रतिशत तक समृद्ध यूरेनियम का उपयोग किया जाता है। सऊदी अरब के अनुसार , बुशहर संयंत्र में लगभग 282 टन परमाणु सामग्री मौजूद है। इसमें रिएक्टर कोर में 72 टन सक्रिय ईंधन और संयंत्र के ऊंचे भंडारण पूल में लगभग 210 टन प्रयुक्त ईंधन शामिल है। प्रयुक्त ईंधन में सीजियम-137 की मात्रा लगभग 2,600 पेटाबेकरेल है, जो चेर्नोबिल आपदा के दौरान उत्सर्जित मात्रा से दस गुना अधिक है।
क्यों है खाड़ी देशों को चिंता?
लगभग 2,50,000 लोगों की आबादी वाला शहर बुशहर, ईरान की राजधानी की तुलना में कुवैत, बहरीन और कतर के काफी करीब है। बुशहर से कुवैत नगर लगभग 270 किलोमीटर दूर है, बहरीन की राजधानी मनामा लगभग 350 किलोमीटर दूर है, सऊदी अरब के दम्माम, धहरान और अल खोबार 400 किलोमीटर दूर हैं, दोहा लगभग 450 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है, जबकि रियाद 750 किलोमीटर दूर है।
पीने के पानी की समस्या
फारस की खाड़ी के दूसरी ओर ईरान के सामने स्थित तीनों रेगिस्तानी राज्यों में प्राकृतिक जल भंडार बहुत कम हैं और यहां 1.8 करोड़ से अधिक लोग रहते हैं, जिनके पीने योग्य पानी की एकमात्र आपूर्ति खाड़ी से प्राप्त खारे पानी को विलवणीकृत करके प्राप्त की जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि विकिरण फैलने की स्थिति में खाड़ी का पानी दूषित हो जाएगा, जिससे यहां के जीवन रक्षक ‘डिसेलिनेशन प्लांट’ (खारे पानी को मीठा बनाने वाले संयंत्र) पूरी तरह ठप हो सकते हैं।
ऐसे में अगर अमेरिका या इजरायल द्वारा रिएक्टर या ईंधन भंडारण पूल पर हमला होता है, तो इससे खतरनाक रेडिएशन निकलकर वायुमंडल में फैल जाएंगे। जाग्रोस पर्वतमाला द्वारा बुशहर के उत्तर में निर्मित ढाल और उत्तर-पश्चिमी हवाओं के कारण विकिरण कुवैत, बहरीन, कतर और संयुक्त अरब अमीरात की ओर बह जाएगा। ऐसे में इन क्षेत्र में भोजन, मिट्टी और पानी दशकों तक दूषित रहेंगे।
अल जजीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, इसके तत्काल प्रभाव से जलने और मृत्यु हो सकती है, जबकि दीर्घकालिक रूप से कैंसर का खतरा बढ़ जाएगा।
पिछली परमाणु आपदाएं
गौरतलब है कि अप्रैल 1986 में, यूक्रेन में चेर्नोबिल परमाणु रिएक्टर परीक्षण के दौरान फट गया। भीषण विस्फोट से संयंत्र की छत उड़ गई और कई दिनों तक आग जलती रही। इस दौरान 30 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि हजारों लोग थायरॉइड कैंसर से पीड़ित हो गए। उस वक्त 30,00,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था।
