मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने साइप्रस की दिशा में दो मिसाइल दागे हैं। साइप्रस में ब्रिटेन के सैन्य अड्डे मौजूद हैं। ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली ने कहा कि उन्हें पूरा यकीन है कि ये मिसाइल सीधे ब्रिटिश ठिकानों को निशाना बनाकर नहीं दागे गए थे, लेकिन इससे यह साफ होता है कि ईरान की जवाबी कार्रवाई बिना भेदभाव के हो रही है।
स्काई न्यूज से बातचीत में जॉन हीली ने यह भी बताया कि बहरीन में तैनात करीब 300 ब्रिटिश सैनिक मिसाइल हमलों के काफी नजदीक थे। कुछ सैनिक हमले वाली जगह से कुछ सौ गज की दूरी पर मौजूद थे। एक दिन पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा था कि मिडिल ईस्ट में रक्षा के लिए ब्रिटिश लड़ाकू विमान तैनात कर दिए गए हैं, जो जरूरत पड़ने पर कार्रवाई करेंगे।
ब्रिटेन की चेतावनी
रक्षा मंत्री ने ईरान से अपील की कि वह अपने अनियंत्रित और बिना भेदभाव वाले हमले बंद करे और अपने हथियार कार्यक्रमों को छोड़ दे। उन्होंने कहा कि हालात और ज्यादा बिगड़ सकते हैं, इसलिए क्षेत्रीय स्थिरता जरूरी है।
यह तनाव उस समय बढ़ा है जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर कई मिसाइल हमले किए। इन हमलों में ईरान के सैन्य ठिकानों और शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया गया। हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत की भी खबर है। जॉन हीली ने कहा कि आयतुल्लाह की मौत पर बहुत कम लोग शोक मनाएंगे, लेकिन उन्हें इस पूरे घटनाक्रम के क्षेत्रीय असर की ज्यादा चिंता है।
कानून, सुरक्षा और ब्रिटेन की भूमिका
रक्षा मंत्री ने कहा कि ईरान पर ब्रिटेन की सड़कों पर 20 आतंकी साजिशें रचने, अपने ही नागरिकों की मौतों और रूस को 50 हजार ड्रोन देने जैसे गंभीर आरोप हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे शासन को परमाणु हथियार रखने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
हालांकि, उन्होंने अमेरिका और इजरायल के हमलों की कानूनी स्थिति पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि इसकी व्याख्या अमेरिका को करनी चाहिए। लेकिन उन्होंने यह साफ किया कि ब्रिटेन जो भी करता है, वह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत करता है।
