बंगाल में चुनावी हिंसा के बीच आयोग सख्त, बिना अनुमति सभा-जुलूस पर रोक

चुनाव आयोग ने कोलकाता समेत बंगाल के विभिन्न जिलों में अशांति की घटनाओं को देखते हुए राज्यभर में भीड़ जुटाने पर सख्त निषेधाज्ञा जारी की है। अब से गैरकानूनी तरीके से भीड़ नहीं जुटाई जा सकेगी। बिना अनुमति सभा नहीं हो सकेगी। जुलूस भी नहीं निकाला जा सकेगा।

यहां तक कि राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय जाने के लिए भी पूर्व अनुमति लेनी पड़ेगी। अगर कोई निर्देश का उल्लंघन करेगा तो उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

मालूम हो कि हाल में सीईओ कार्यालय के सामने तृणमूल समर्थक बूथ स्तरीय अधिकारी जमा होकर प्रदर्शन कर रहे थे, जिसके बाद उनकी भाजपा समर्थकों से झड़प हुई थी। वहीं मालदा में उग्र भीड़ ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के विचाराधीन मामलों की सुनवाई कर रहे नौ जजों को बंधक बना लिया था।

चुनाव पर्यवेक्षक बनाकर तमिलनाडु भेजे गए कोलकाता पुलिस के पूर्व आयुक्त

चुनाव आयोग ने कोलकाता पुलिस के पूर्व आयुक्त सुप्रतिम सरकार को चुनाव पर्यवेक्षक बनाकर तमिलनाडु भेज दिया है। आयोग की ओर से जारी की गई अधिसूचना के मुताबिक सुप्रतिम सरकार की तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में नियुक्ति की गई है। इससे पहले पूर्व डीसी (सेंट्रल) इंदिरा मुखोपाध्याय को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी, हालांकि वह शारीरिक अस्वस्थता के कारण दायित्व संभाल नहीं पाईं।

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