दीदी का किला, भाजपा की हुंकार और अस्तित्व की जंग लड़ता वाम-कांग्रेस, बंगाल में दो-ध्रुवीय या चतुष्कोणीय होगा मुकाबला?

 भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों (23 और 29 अप्रैल) की घोषणा के साथ ही प्रदेश की सियासी महासमर शुरू हो गया है। सत्ता की हैट्रिक लगा चुकीं ममता बनर्जी के सामने जहां अपनी विरासत बचाने की चुनौती है, वहीं भाजपा दिल्ली की तर्ज पर कोलकाता फतह करने को बेताब है। इस दोतरफा ध्रुवीकरण के बीच माकपा और कांग्रेस अपने खोए हुए जनाधार को वापस पाने के लिए ‘करो या मरो’ की स्थिति में हैं।

तृणमूलः ममता का करिश्मा और जमीनी घेराबंदी

तृणमूल कांग्रेस की सबसे बड़ी ताकत आज भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ‘अग्निकन्या’ वाली छवि है। एक दशक से अधिक सत्ता में रहने के बावजूद, ग्रामीण बंगाल में उनकी पकड़ ढीली नहीं हुई है। पार्टी का बूथ-स्तरीय मजबूत ढांचा और ‘लक्ष्मी भंडार’, ‘युवा साथी’ व ‘स्वास्थ्य साथी’ जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं ने महिलाओं और गरीबों का एक अभेद्य ‘वोट बैंक’ तैयार किया है।

हालांकि, 15 साल की ‘एंटी-इंकंबेंसी’, भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप और स्थानीय स्तर पर नेताओं की आपसी गुटबाजी टीएमसी के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द है। यदि यह आंतरिक कलह चुनाव तक नहीं थमी, तो पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

भाजपाः दिल्ली का दम और हिंदुत्व की लहर

पिछले चुनावों में तीन से 77 विधायकों तक का सफर तय करने वाली भाजपा अब बंगाल में मुख्य विपक्षी दल है। प्रधानमंत्री मोदी का चेहरा और हिंदुत्व आधारित ध्रुवीकरण पार्टी की मुख्य ताकत है। भाजपा ने पारंपरिक वामपंथी और कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाकर अपनी ताकत 39 मत प्रतिशत तक पहुंचाई है।

लेकिन, ‘बाहरी’ होने का ठप्पा और बंगाल की स्थानीय संस्कृति से पूरी तरह न जुड़ पाना भाजपा की कमजोरी रही है। साथ ही, केंद्रीय नेतृत्व पर अत्यधिक निर्भरता और मतुआ जैसे समुदायों के बीच एसआइआर को लेकर संशय पार्टी की राह में कांटे बिछा सकते हैं।

माकपा और कांग्रेस: साख बचाने की जद्दोजहद

एक समय बंगाल पर 34 साल राज करने वाला वाम मोर्चा अब हाशिए पर है। माकपा अपनी ‘स्वच्छ छवि’ और हालिया आंदोलनों (जैसे आरजी कर मामला) के जरिए युवाओं को जोड़ने की कोशिश कर रही है। हालांकि, 30 प्रतिशत से गिरकर 4.73 प्रतिशत पर आया वोट शेयर यह बताने के लिए काफी है कि पार्टी का सांगठनिक ढांचा ढह चुका है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *