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विपक्षी पार्टियों की नींद उड़ा देगा अखिलेश का ये दांव, आगरा में मुलायम सिंह की रणनीति अपना रहे सपा प्रमुख

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उप्र में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पूर्व सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी के वफादार पुराने कार्यकर्ताओं और करीबी लोगों की नब्ज टटोलना शुरू कर दिया है। अखिलेश यादव शनिवार को आगरा में कई पुराने कार्यकर्ताओं और करीबी लोगों के घर गए।

वैश्य वर्ग के व्यापारियों से भी मुलाकात की। उन्होंने बूथ मजबूत करने पर जोर देते हुए 2027 में सरकार बनने पर सभी कार्यकर्ताओं काे सम्मान मिलने की बात कही।

आगरा आए अखिलेश ने पुराने कार्यकर्ताओं के घर जाकर की मुलाकात

अखिलेश यादव का शनिवार दोपहर रहनकलां टोल प्लाजा पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया। अखिलेश वहां से संजय प्लेस के एचआइजी फ्लैट स्थित सपा के राज्यसभा सदस्य रामजीलाल सुमन के घर पहुंचे। सुमन के धेवते दिव्यांशु का निधन विगत दिनों हो गया था। यहां आधा घंटे तक रुके अखिलेश ने कहा कि वह दु:ख की घड़ी में दु:ख बांटने आए हैं। एक होनहार और सबको जोड़ने वाला बच्चा छाेड़कर चला गया है।

डॉक्टर आरएस पारीक के घर पहुंचे

इसके बाद वह बाग फरजाना स्थित डॉ. आरएस पारीक के घर गए। सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव डॉ. पारीक के यहां आया करते थे। यहां से वह आवास विकास कॉलोनी सिकंदरा के सेक्टर 11 स्थित विनय अग्रवाल के घर गए। विनय अग्रवाल ने सपा के टिकट पर वर्ष 2022 में दक्षिण विधानसभा से चुनाव लड़ा था।

वैश्य वर्ग के व्यापारियों से की मुलाकात

यहां उन्होंने वैश्य वर्ग के व्यापारियों से मुलाकात की। व्यापारियों से अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम, यमुना पर बैराज, हाईकोर्ट की खंडपीठ, आइटी हब, रिवरफ्रंट डवलपमेंट, गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों की जानकारी की। व्यापारियों ने व्यापारी सुरक्षा आयोग के गठन, पेंशन, शस्त्र लाइसेंस, बीमा बढ़ाने की मांग की।

प्रदेश में सरकार बनने पर सभी कार्यकर्ताओं को सम्मान मिलने की बात कही

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लायर्स कॉलोनी के न्यू सुभाष नगर स्थित विकास महाजन, टेढ़ी बगिया में कृष्णा गुरु, ट्रांस यमुना कालोनी में देवेंद्र, धौलपुर हाउस में रिजवानउद्दीन प्रिंस और बरौली अहीर में चरण सिंह पहलवान के घर भी गए। पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं के घर जाकर उन्होंने प्रदेश में सरकार बनने पर पूरा सम्मान मिलने का भरोसा दिलाया।

पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन, रामपुर के सांसद मोहिब्बुल्लाह नदवी, पूर्व एमएलसी उदयवीर सिंह, पूर्व विधायक रणजीत सुमन, दिनेश राठौर उनके साथ रहे। प्रदेश सचिव राहुल चतुर्वेदी व लल्ला गुर्जर, सपा जिलाध्यक्ष ऊदल सिंह कुशवाह, महासचिव संतोषपाल बघेल, राजपाल यादव, प्रो. वीरेंद्र सिंह चौहान, पवन प्रजापति आदि मौजूद रहे।

विजन इंडिया आज

होटल आईटीसी मुगल में रविवार सुबह 11 बजे से सपा द्वारा विजन इंडिया कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसमें अखिलेश यादव छोटे और मझोले व्यापारियों से संवाद कर उनकी समस्याएं जानेंगे। कार्यक्रम में सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अभिषेक मिश्रा और सांसद राजीव राय भी शामिल होंगे।

बाहर करने पर विवाद

विनय अग्रवाल के आवास विकास कॉलोनी स्थित घर पर वैश्य वर्ग के व्यापारियों के साथ अन्य लोग पहले से ही जाकर बैठ गए थे। सुरक्षाकर्मियों ने अखिलेश यादव के पहुंचने से पहले व्यापारियों को छोड़कर अन्य को कमरे से बाहर निकलने को कहा। बाहर करने पर कार्यकर्ता ने विरोध भी जताया।

‘जीनियस लोग पैदा करें ज्यादा बच्चे’, क्यों पैसे से ज्यादा स्पर्म डोनेट करने को लेकर गंभीर हैं एलन मस्क?

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दुनिया के पहले ट्रिलियनियर और स्पेस एक्सप्लोरेशन के प्रणेता एलन मस्क इन दिनों पैसे से ज्यादा आबादी बढ़ाने (प्रोनैटलिज्म) को लेकर चर्चा में हैं। मस्क का मानना है कि दुनिया के समझदार लोगों को ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करने चाहिए और इसके लिए वे स्पर्म डोनेशन को एक बेहतरीन जरिया मानते हैं।

हालांकि, उनकी इस ‘मस्कियन सोच’ के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन देशों के कड़े कानून हैं जहां स्पर्म डोनर की पहचान गुप्त रखी जाती है। लेकिन इससे भी बड़ा सवाल विज्ञान खड़ा करता है—क्या एक जीनियस पिता के स्पर्म से पैदा होने वाला बच्चा भी जीनियस ही होगा?

क्योंकि, वैज्ञानिक रिसर्ज के अनुसार, बच्चों में बुद्धिमत्ता (Intelligence) पिता से ज्यादा मां के जीन्स से ट्रांसफर होती है।

क्या कहते हैं मस्क?

दरअसल, स्पेस एक्सप्लोरेशन के प्रणेता एलन मस्क ने हाल ही में दुनिया का सबसे बड़ा IPO लॉन्च किया है। वह जितने अमीर हैं, उतने ही ताकतवर भी। साथ ही, बहुत तेज दिमाग वाले भी। उन्हें और क्या चाहिए? बच्चे। एलन मस्क का पक्का मानना है कि उन्हें नॉर्दर्न एलिफेंट सील (जो 100 मादाओं को प्रेग्नेंट कर सकती हैं) की तरह बेधड़क बच्चे पैदा करने चाहिए।

मस्क का मानना है कि स्मार्ट लोगों (जीनियस) को ज्यादा बच्चे पैदा करने में मदद करनी चाहिए। मस्क की सोच के हिसाब से, ऐसा करना समाज के लिए अच्छा है। ऐसा करने का सबसे असरदार तरीका है अपना स्पर्म डोनेट करना।

बता दें कि 2024 में डोनल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के कुछ समय बाद मस्क के स्पर्म डोनेशन के जुनून के बारे में मीडिया में खबरें आईं।

न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, एलन मस्क ने सिलिकॉन वैली की एक डिनर पार्टी में शामिल एक कपल को अपना स्पर्म डोनेट करने का ऑफर दिया था। हालांकि, मस्क ने इस बात को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया।

सवाल है कि असली पिता कौन है?

मस्क और उनके जैसे तमाम संभावित स्पर्म डोनर्स (जो चाहते हैं कि दुनिया को पता चले कि उनके स्पर्म से बच्चे पैदा हुए हैं) के सामने सबसे बड़ी कानूनी अड़चन है। दुनिया के अधिकांश हिस्सों में स्पर्म डोनर की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है। इसके तहत न तो बच्चे को अपनाने वाले माता-पिता को डोनर का नाम बताया जाता है, और न ही खुद डोनर कानूनी तौर पर अपनी पहचान उजागर कर सकता है।

हालांकि, अपवाद भी हैं जहां डोनर की पहचान बताना आसान है, जैसे- UK, जर्मनी, नीदरलैंड, स्वीडन, डेनमार्क, फ़िनलैंड और US के कुछ राज्य जैसे कैलिफोर्निया, रोड आइलैंड, कनेक्टिकट। वहीं भारत में ICMR की गाइडलाइंस के मुताबिक डोनर की पहचान गुप्त रखना जरूरी है।

डोनर की पहचान को लेकर सबसे बड़ी समस्या यह है कि सभी डोनर अपनी पहचान जाहिर करने के लिए तैयार नहीं होते। वहीं, सभी लेने वाले भी अनजान डोनर के विचार से सहमत नहीं होते। अलग-अलग देशों में स्पर्म बैंक और बायोएथिसिस्ट (जैविक नैतिकता के जानकार) के बीच भी अपनी-अपनी अंदरूनी बहसें चलती रहती हैं। लेकिन गुमनामी को लेकर जो आम सहमति थी, उसमें अब बदलाव आ रहा है।

सही जगह का चुनाव

अगर आप एलन मस्क के जैसी सोच रखने वाले डोनर, तो आपके लिए उन देशों या राज्यों में स्पर्म डोनेट करना ज्यादा समझदारी भरा फैसला होगा जहां कानूनन मां और बच्चे को डोनर की पहचान जानने का अधिकार होता है। करीब एक दर्जन बच्चों के पिता और आबादी बढ़ाने (Pro-natalism) के कट्टर समर्थक मस्क, शायद अब दौलत कमाने से ज्यादा स्पर्म डोनेट करने को लेकर गंभीर हैं।

हालांकि, दुनिया के सबसे अमीर इंसान के लिए यहां एक पेच है। अधिकांश देशों में स्पर्म डोनर के रूप में रजिस्टर्ड होने के लिए कई कड़े दौर से गुजरना पड़ता है, जिसमें विस्तृत मेडिकल रिकॉर्ड और निजी सवालों के जवाब देना शामिल है। जाहिर है, मस्क जैसे रसूखदार इंसान को ऐसी पूछताछ की आदत नहीं होगी। लेकिन एक बुद्धिमान व्यक्ति होने के नाते, उन्हें इसके नफे-नुकसान का आकलन करके सही जगह रजिस्ट्रेशन कराना चाहिए।

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‘ब्वॉयफ्रेंड की ड्यूटी भी निभानी पड़ती है…’ कनाडा का मैच छोड़ गर्लफ्रेंड कैटी पेरी के शो में पहुंचे जस्टिन ट्रूडो

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 कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो इन दिनों अपनी लव-लाइफ और फीफा वर्ल्ड कप 2026 को लेकर सुर्खियों में हैं। दरअसल, वर्ल्ड कप के पहले ही दिन कनाडा का मैच छोड़कर अपनी गर्लफ्रेंड और मशहूर पॉप स्टार केटी पेरी (Katy Perry) के लाइव परफॉर्मेंस को देखने अमेरिका के स्टेडियम पहुंचने पर ट्रूडो को सोशल मीडिया पर भारी आलोचना का सामना करना पड़ा।

दरअसल, स्टेडियम में केटी पेरी के परफॉर्मेंस के बाद दोनों का सरेआम एक-दूसरे को गले लगाना और किस करने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। कुछ यूजर्स ने इस फैसले के असर पर सवाल उठाए और तर्क दिया कि देश के पूर्व नेता को कनाडा के मैच में शामिल होने को प्राथमिकता देनी चाहिए थी।

यूचर्स कर रहें तरह-तरह के कमेंट

एक कमेंट करने वाले एक यूजर्स ने लिखा, “लीडरशिप का मतलब है निजी रिश्तों से ऊपर देश को रखना, जबकि दूसरों ने इस कदम को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। हालांकि, कई समर्थकों ने आलोचना को खारिज कर दिया और अपनी पार्टनर को सपोर्ट करने के ट्रूडो के फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि उनके विरोधी एक निजी मामले पर जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

एक यूजर्स ने लिखा, “आपको सच में किसी को कोई सफाई देने की जरूरत नहीं है। अपनी जिंदगी जियो।”

एक और यूज़र ने लिखा, “आप एक आजाद इंसान हैं और कानूनी तौर पर जो चाहें वो कर सकते हैं। आपने देश की सेवा की है और आपको बिना इंटरनेट वॉरियर्स की आलोचना के जिंदगी का आनंद लेने का हक है। मजे करो।”

इस आलोचना पर खुलकर जवाब देते हुए ट्रूडो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि “कभी-कभी सपोर्टिव बॉयफ्रेंड की ड्यूटी भी निभानी पड़ती है, लेकिन आप सब जानते हैं कि मैं दिल से कनाडा की जीत की ही दुआ कर रहा हूं।”

कैसे शुरू हुआ विवाद?

गौरतलब है कि यह पूरा विवाद 12 जून को कैलिफोर्निया के इंगलवुड में सोफी स्टेडियम में 2026 FIFA वर्ल्ड कप की ओपनिंग सेरेमनी में ट्रूडो के शामिल होने से शुरू हुआ। यूनाइटेड स्टेट्स बनाम पैराग्वे मैच से पहले हुए इस इवेंट में केटी पेरी मुख्य कलाकार थीं; उन्होंने पिच पर 10 साल के नॉर्वेजियन सिंगर टियस लुका के साथ अपना गाना “वंडर” गाया।

परफॉर्मेंस के दौरान ट्रूडो को किनारे से उत्साह बढ़ाते हुए देखा गया। शो के बाद पेरी दौड़कर उनकी बाहों में आ गईं और दोनों ने सबके सामने किस किया, बाद में उन्हें स्टैंड्स में एक-दूसरे का हाथ थामे देखा गया। ये पल सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो गए।

बार-बार टोकने पर भी झुककर बैठता है बच्चा? खराब पोस्चर नहीं, रीढ़ की हड्डी की बीमारी हो सकती है वजह

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 सीधे बैठो, झुककर मत बैठो, पढ़ते समय आगे मत झुको, जैसी बातें पेरेंट्स अक्सर बच्चों को कहते हैं। बॉडी पोस्चर को सीधा रखने के लिए यह सलाह दी जाती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपके बच्चे का हमेशा झुककर बैठना या पीठ के मामूली-से तिरछेपन के पीछे कोई और वजह भी हो सकती है?

डॉ. तरुण सूरी (ऑर्थोपेडिक्स ऑर्थो स्पाइन सर्जरी विभाग के प्रमुख, अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद) बताते हैं कि इसके पीछे स्कोलियोसिस की समस्या जिम्मेदार हो सकती है। आइए जानें कि यह क्या समस्या है।

क्या है स्कोलियोसिस और यह कब होता है?

स्कोलियोसिस रीढ़ की हड्डी से जुड़ी एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें रीढ़ असमान्य तरीके से एक तरफ झुकने या मुड़ने लगती है। यह समस्या अक्सर बच्चों के तेजी से बढ़ने की उम्र यानी 10-15 साल के बीच विकसित होती है।

इस समस्या की सबसे खतरनाक बात यह है कि शुरुआती स्टेज में आसानी से पकड़ में नहीं आती। शुरुआत में इसके कोई साफ लक्षण भी नहीं होते और रीढ़ की हड्डी में यह घुमाव काफी धीमी गति से बढ़ता है। इसलिए शुरुआत में बच्चे को रोजमर्रा की जिंदगी में कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

इन छोटे-छोटे बदलावों पर रखें नजर

अक्सर बच्चे के शरीर में होने वाले कुछ बदलावों को माता-पिता नजरअंदाज कर देते हैं, जिसकी वजह से यह समस्या बढ़ जाती है।

  • बच्चे का एक कंधा दूसरे कंधे के मुकाबले थोड़ा ऊपर दिखाई देना।
  • स्कूल यूनिफॉर्म का शरीर पर दोनों तरफ से बराबर या फिट न बैठना।
  • पीठ पर लटकाया हुआ स्कूल बैग बार-बार एक ही कंधे से नीचे सरकना।

इन संकेतों को अक्सर पेरेंट्स बच्चे के खराब बॉडी पोस्चर या झुककर बैठने की आदत का नतीजा मान लेते हैं, लेकिन असल में ये स्कोलियोसिस का संकेत होते हैं।

क्यों होता है स्कोलियोसिस?

कई लोग मान लेते हैं कि यह झुककर बैठने या भारी स्कूल बैग उठाने की वजह से होता है, लेकिन यह पूरी तरह गलत है। इस समस्या का अभी तक कोई ठोस कारण पता नहीं चला है, लेकिन इसके पीछे जेनेटिक्स की भूमिका हो सकती है।

यह बीमारी लड़कों और लड़कियों दोनों में विकसित हो सकती है, लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक लड़कियों में, खासकर प्यूबर्टी के आसपास, इसका जोखिम कहीं ज्यादा होता है।

इलाज और समय पर जागरूकता है जरूरी

राहत की बात यह है कि स्कोलियोसिस से पीड़ित ज्यादातर बच्चों को सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती है। ज्यादातर मामले काफी हल्के होते हैं, जिन्हें डॉक्टर से नियमित जांच कराने, फिजियोथेरेपी और स्कोलियोसिस के लिए स्पेशल एक्सरसाइज के जरिए ठीक किया जा सकता है। इसका इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि रीढ़ की हड्डी का घुमाव कितना गंभीर है और बच्चे की उम्र और शारीरिक विकास अभी कितना बचा हुआ है।

श्रीदेवी पर फिल्माया गया वो आइकॉनिक राजस्थानी लोकगीत, जो 35 साल बाद भी है हर लड़की की प्लेलिस्ट का हिस्सा

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साल 1991 में आई श्रीदेवी की फिल्म लम्हें का नाम सुनते ही, सबसे पहले “मोरनी बागा मा बोले” का सीन आंखों के सामने आता है। इस गाने में रेगिस्तान में श्रीदेवी ने इस गाने पर जबरदस्त डांस किया है। भले ही ये गाना 35 साल पुराना हो चुका है, लेकिन आज भी यह लोगों की प्लेलिस्ट में जगह बनाए हुए है। 

क्या आप जानते हैं कि लता मंगेशकर और ईला अरुण की आवाज में गाया गया यह गाना सिर्फ एक फिल्मी गीत नहीं है, बल्कि यह राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत का एक हिस्सा है। जी हां, “मोरनी बागा मा बोले” राजस्थान का एक मशहूर लोकगीत से है, जो बंजारा समुदाय से जुड़ा है। आइए इस फोरेवर ग्रीन गाने के बारे में और जानते हैं।

बंजारा संस्कृति और रेगिस्तान से जुड़ाव

फिल्मी पर्दे तक पहुंचने से सदियों पहले से ही, यह लोकगीत राजस्थान के गांवों, चौपालों और खामोश रेगिस्तानी रातों में गूंजता रहा है। यह गीत मुख्य रूप से राजस्थान के घुमंतू बंजारा संस्कृति से जुड़ा है। व्यापार और रोजी-रोटी की तलाश में जब पुरुष मीलों दूर निकल जाते थे, तब पीछे छूटी उनकी स्त्रियां उनकी याद में गीत गाकर अपने विरह का दुख बांटती थीं।

“मोरनी बागा में बोले” भी एक ऐसा ही विरह गीत है। इस गीत में आधी रात को बागों में मोरनी की पुकार प्रेमिका की तन्हाई और बेचैनी को और भी गहरा कर देती है, जो अपने प्रेमी की बाट जोह रही है।

मांड गायकी का जादू

इस लोकगीत की सबसे बड़ी खासियत इसकी गायन शैली है। यह गीत राजस्थान की मांड शैली पर आधारित है। मांड शैली का विकास राजस्थान के राजा-महाराजाओं के दरबार में हुआ था। यह शैली शास्त्रीय संगीत और लोक संगीत का खूबसूरत मेल है। मांड शैली में राजा-रानियों की प्रेम कहानियां, विरह और ऐतिहासिक गौरव का गुणगान किया जाता है।

फिल्म के लिए लिखा गया गाना

हालांकि, फिल्म के लिए इस गाने के बोल लिखे गए थे, जिसे आनंद बख्शी ने लिखा था, लेकिन उन्होंने इस गाने को लिखते समय राजस्थान के बंजारा समुदाय और राजस्थान की संस्कृति को ध्यान में रखते हुए लिरिक्स दिए। इस गाने को संगीतकार शिव-हरि (पंडित शिवकुमार शर्मा और पंडित हरिप्रसाद चौरसिया) ने संगीत दिया और उन्होंने इसके पारंपरिक स्वरूप और मांड शैली की आत्मा से कोई छेड़छाड़ नहीं की। यह गाना इतना सुपरहिट हुआ कि आज 35 साल बाद भी लोगों के दिलों पर राज कर रहा है।

38 की उम्र में मां बनीं Naagin एक्ट्रेस सुरभि ज्योति, एक्ट्रेस ने खास अंदाज में दी फैंस को खुशखबरी

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 टेलीविजन के मशहूर शो नागिन (Naagin) के तीसरे सीजन में नागरानी बेला के रूप में मशहूर हुईं सुरभि ज्योति ने अपनी निजी जिंदगी की एक खुशखबरी फैंस के साथ शेयर की है। दरअसल सुरभि मां बन गई हैं और उन्होंने एक बेटी को जन्म दिया है।

सोशल मीडिया पर दी खुशखबरी

सुरभि ज्योति (Surbhi Jyoti) ने इस खुशखबरी को अपने फैंस के साथ शेयर किया है और सोशल मीडिया पर एक प्यारी सी पोस्ट के साथ आभार जताया। सुरभि की इस सिंपल पोस्ट में लिखा है- It’s A Girl, 13 जून 2026। लव सुरभि और सुमित।

इस खूबसूरत पोस्ट के साथ एक्ट्रेस ने कैप्शन लिखा, ‘हमारी बेटी आ गई है, हमारे दिल प्यार और आभार से भरे हुए हैं’। सुरभि की इस पोस्ट पर कई लोगों ने बधाई दी। एक ने लिखा, ‘नागरानी को बेटी हुई है ‘। एक ने कमेंट किया, ‘बधाई हो, मैं आपके लिए बहुत खुश हूं’। एक ने लिखा, ‘लख लख बधाईयां’। एक ने कमेंट किया, ‘वाह लक्ष्मी हुई है, मैं आपके लिए बहुत खुश हूं सुरभि’।

सुरभि ज्योति के बारे में

सुरभि ज्योति एक भारतीय अभिनेत्री हैं जो मुख्य रूप से हिंदी टेलीविजन और पंजाबी फिल्मों में काम करती हैं। उन्हें ‘कुबूल है’ में ज़ोया फारूकी अहमद खान का किरदार निभाने के बाद शोहरत मिली; इस भूमिका के लिए उन्हें कई पुरस्कार मिले, जिनमें ‘GR8! परफॉर्मर ऑफ द ईयर’ के लिए ITA अवॉर्ड भी शामिल है।

ज्योति को कलर्स टीवी के सुपरनैचुरल शो ‘नागिन 3’ में बेला सहगल नाम की इच्छाधारी नागिन का किरदार निभाने के बाद काफी पहचान मिली; इस रोल के लिए उन्हें इंडियन टेलीविजन एकेडमी अवार्ड्स में ‘बेस्ट एक्ट्रेस’ के लिए नॉमिनेशन भी मिला। 2021 में, उन्होंने जैस्सी गिल के साथ सौरभ त्यागी की कॉमेडी-ड्रामा फिल्म ‘क्या मेरी सोनम गुप्ता बेवफा है?’ से हिंदी फिल्मों में डेब्यू किया।

ज्योति ने 27 अक्टूबर 2024 को उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट रिसॉर्ट्स में पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों से अपने लंबे समय के बॉयफ्रेंड, एक्टर सुमित सूरी से शादी की। फरवरी 2026 में, इस कपल ने प्रेग्नेंसी अनाउंस की और अब दोनों एक बेटी के माता-पिता बन गए हैं।

आने वाले वर्षों में वैश्विक मिक्स्ड मार्शल आर्ट का केंद्र बन सकता है भारत : सिरिल गेन

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 अल्टीमेट फाइटिंग चैंपियनशिप (यूएफसी) के शीर्ष हेवीवेट फाइटरों में शुमार सिरिल गेन ने कहा है कि भारत में मिक्स्ड मार्शल आर्ट (एमएमए) की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है और भारतीय फाइटर एमएमए में लगातार अच्छा कर रहे हैं। आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक एमएमए समुदाय का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है और यहां के प्रशंसक इस खेल की लोकप्रियता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।

सिरिल 14 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जन्मतिथि के अवसर पर व्हाइट हाउस में होने वाली यूएफसी फाइट में ब्राजीली फाइटर एलेक्स परेरा से भिड़ेंगे। इस फाइट का प्रसारण भारत में रविवार सुबह 5:30 बजे सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क पर किया जाएगा।

सिरिल ने दैनिक जागरण से बात करते हुए कहा, पहली बार व्हाइट हाउस में किसी फाइट का आयोजन किया जाएगा। मैं इसको लेकर बहुत उत्साहित हूं। एलेक्स परेरा एक मुश्किल प्रतिद्वंद्वी हैं, लेकिन मैं उनसे भिड़ने को लेकर पूरी तरह तैयार हूं।

भारतीय प्रशंसकों के लिए भी सिरिल गेन ने विशेष संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत में एमएमए के प्रति बढ़ता उत्साह देखकर उन्हें बेहद खुशी होती है। गेन ने भारतीय प्रशंसकों का समर्थन और प्यार के लिए आभार जताते हुए कहा कि देश में इस खेल को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है और अधिक से अधिक लोग एमएमए से जुड़ रहे हैं।

परिवार से मिलती है मजूबती

फ्रांसीसी फाइटर ने कहा कि उनकी पत्नी और बेटियां ही उनके जीवन की असली प्रेरणा हैं। उन्होंने कहा कि एमएमए जैसे चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरे खेल में बने रहने की सबसे बड़ी वजह अपने परिवार की जिम्मेदारी और उनके लिए कुछ बेहतर करने की इच्छा है।

तीन महीने तक लगातार ट्रेनिंग और परिवार से दूरी के बाद उनके साथ बिताए गए पल उन्हें मानसिक रूप से तरोताजा कर देते हैं। गेन ने कहा कि परिवार के साथ बिताया गया समय उन्हें फिर से केंद्रित होने और अगले लक्ष्य के लिए तैयार होने में मदद करता है। उनके अनुसार, कोई भी चीज उन्हें उतनी प्रेरणा नहीं दे सकती जितनी उनके अपने लोग देते हैं।

Netflix पर आते ही हॉरर कॉमेडी ने छीनी नंबर 1 की कुर्सी, थिएटर के बाद ओटीटी पर मचा रही कोहराम

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आजकल ज्यादातर फिल्में थिएट्रिकल रन पूरा करने के बाद ओटीटी पर दस्तक दे देती हैं। हालांकि ऐसा बहुत कम ही हैं जो ट्रेंडिंट लिस्ट में टॉप पर पहुंच जाए। अब हाल ही में एक हॉरर कॉमेडी ने नेटफ्लिक्स पर दस्तक दी और ओटीटी प्लेटफॉर्म की ओरिजिनल फिल्म मां बहन की नंबर 1 की कुर्सी छीन ली है।

नेटफ्लिक्स पर नंबर 1 बनी फिल्म

2 महीने पहले थिएटर में रिलीज हुई हॉरर कॉमेडी (Horror Comedy) ने बॉक्स ऑफिस पर 250 करोड़ रुपये से ज्यादा का बिजनेस किया था और अब इसने ओटीटी पर एंट्री की है। आते ही फिल्म ने नंबर 1 पर ट्रेंड कर रही माधुरी दीक्षित और तृप्ति डिमरी की ‘मां बहन’ को पीछे छोड़ दिया है।

कौन सी है यह फिल्म?

थिएटर के बाद Netflix पर कोहराम मचाने वाली हॉरर कॉमेडी है- भूत बंगला (Bhooth Bangla)। जिसमें अक्षय कुमार (Akshay Kumar) ने लीड रोल प्ले किया है और इसे प्रियदर्शन ने डायरेक्ट किया है। अक्षय के साथ फिल्म में परेश रावल, असरानी, राजपाल यादव, वामिका गब्बी जैसे सितारों ने काम किया है।

फिल्म की कहानी

अक्षय कुमार की ‘भूत बंगला’ एक हॉरर-कॉमेडी फिल्म है। कहानी अर्जुन (अक्षय कुमार) नाम के एक व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी बहन के साथ मंगलपुर के एक गांव में मौजूद एक भूतिया हवेली में जाता है। वह वहां अपनी बहन की शादी का आयोजन करने की योजना बनाता है, लेकिन स्थानीय लोग उसे चेतावनी देते हैं कि हवेली में ‘वधुसर’ नाम की एक बुरी आत्मा रहती है। यह आत्मा शादी में शामिल होने वाली दुल्हनों को अगवा कर लेती है।

‘भूत बंगला’ के बारे में

भूत बंगला 17 अप्रैल को थिएटर्स में रिलीज हुई और अब लगभग 2 महीने बाद फिल्म ने 12 जून को ओटीटी पर दस्तक दी है। अगर आप भी इस मजेदार हॉरर कॉमेडी को थिएटर में देखने से चूक गए हैं तो घर बैठे ओटीटी पर एंजॉय कर सकते हैं।

FIFA World Cup: इरानकुंडा का ऐतिहासिक कारनामा, ऑस्ट्रेलिया ने तुर्किए को 2-0 से हराकर किया बड़ा उलटफेर

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ऑस्ट्रेलिया ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत जीत के साथ की। ऑस्ट्रेलिया ने वैंकूवर में तुर्किए को 2-0 से हराकर बड़ा उलटफेर किया। ऑस्ट्रेलिया से नेस्टोरी इरानकुंडा और कॉनर मेटकाफ ने 1-1 गोल किए और अहम मौकों पर ऑस्ट्रेलियाई गोलकीपर पैट्रिक ने कमाल का बचाव करते हुए टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। दूसरी ओर, तुर्किए की 24 साल बाद विश्व कप में वापसी खराब रही।

FIFA World Cup 2026: ऑस्ट्रेलिया ने तुर्किए को 2-0 से हराया

दरअसल, इस मैच में तुर्किए के पास बॉल ज्यादा रही, जिससे लग रहा था कि वह मैच जीत सकती है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की टीम का डिफेंस कमाल का रहा। कोच टोनी पॉपोविक की टीम ने मजबूत डिफेंस किया और जैसे ही मौके मिले तुरंत गोल कर दिया। इस तरह ऑस्ट्रेलिया की धमाकेदार जीत रही।

नेस्टोरी ईरानकुंडा और कॉनर मेटकाफ ने गोल दागे और तब से टीम कभी पीछे नहीं रही। फर्स्ट हाफ में 27वें मिनट पर पहला गोल हुआ। 20 साल के इरानकुंडा फीफा विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया की ओर से गोल दागने वाले सबसे युवा प्लेयर बने।

इससे पहले ऑस्ट्रेलिया के गोलकीपर पैट्रिक ने शानदार डिफेंस किया। तुर्किए के अब्दुलकेरिम बर्दाकसी ने गोल मार दिया था, लेकिन इसका बचाव ऑस्ट्रेलिया ने कर लिया और फिर काउंटर अटैक करना शुरू किया और इस तरह इरानकुंडा ने पहला गोल किया।

इसके बाद तुर्किए ने मैच में वापसी करने के लिए पलटवार किया। मैच के 53वें मिनट में कॉर्नर किक में हैरी साउटर ने हेडर पर गोल करने की कोशिश की, जिससे गोलकीपर उगुरकान काकिर रोकने में नाकाम हुए।

56वें मिनट में तुर्किए के अर्दा गुलेर ने फ्रीकिक ली, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के गोलकीपर बीच में नीचे झुककर डाइव लगाते हुए उनके इस गोल को रोक लिया। मैच के 75वें मिनट में मेटकाफ ने गोल करते हुए बढ़त को दोगुना किया। इस तरह मैच में मिली जीत के साथ ग्रुप-डी की अंक तालिका में 3 अंक के साथ ऑस्ट्रेलियाई टीम दूसरे पायदान पर पहुंच गई।

इरानकुंडा का ऐतिहासिक कारनामा

नेस्टोरी इरानकुंडा वर्ल्ड कप में गोल करने वाला सबसे युवा ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी बन गए हैं। इरानकुंडा की उम्र 20 साल 125 दिन है। उसने ब्रेट होलमैन का रिकॉर्ड तोड़ दिया हैं। होलमैन ने 2010 में घाना के खिलाफ गोल किया था। तब उसकी उम्र 26 साल 84 दिन थी।

‘खेल के नियम तय करने होंगे’, ट्रंप के टैरिफ प्लान से खुश नहीं बिल गेट्स; IBM से लेकर इंटेल में US गवर्मेंट की हिस्सेदारी

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माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स ने ट्रंप प्रशासन की प्राइवेट अमेरिकी कंपनियों में इक्विटी हिस्सेदारी खरीदने की बढ़ती आदत पर गंभीर चिंता जताई है।

बिल गेट्स का मानना है कि इस तरीके से इंजीनियरिंग के बजाय मालिकाना हक को ज्यादा अहमियत मिल सकती है और अगर कंपनियों को लेकर सरकार की पॉलिसी बार-बार बदलती रही तो ऐसे निवेश की कीमत तय करना भी मुश्किल हो जाता है।

ट्रंप सरकार के टैरिफ प्लान पर बिल गेट्स ने जताई चिंता

बिल गेट्स ने CNBC से बात करते हुए कहा, ‘सरकार तब सबसे अच्छा काम करती है जब उसकी कार्यप्रणाली का अंदाजा लगाया जा सके। किसी प्लांट में अरबों डॉलर लगाने से पहले कंपनियों को यह पता होना चाहिए कि अगले 20 सालों तक टैरिफ (आयात शुल्क) क्या होंगे।’

गेट्स ने आगे कहा, ‘चिंता का मुख्य कारण नीयत है। क्या वॉशिंगटन देश की भलाई के लिए किसी नई टेक्नोलॉजी की मदद कर रहा है और सभी कंपनियों के साथ समान व्यवहार कर रहा है या फिर वह ऐसा पोर्टफोलियो बना रहा है जिसे वह बाद में सुरक्षित रखना चाहता है?’

बिल गेट्स ने कहा, ‘हम जिस खेल को खेल रहे हैं, उसके नियम अभी काफी अस्पष्ट हैं।’

कंपनियों में US सरकार की बढ़ रही हिस्सेदारी

बिल गेट्स ने बताया, ‘इंटेल से लेकर IBM तक, वॉशिंगटन की शेयरहोल्डर लिस्ट बढ़ती जा रही है। यह लिस्ट लंबी है। पिछले साल अगस्त में फेडरल सरकार ने इंटेल में 9.9% हिस्सेदारी खरीदी थी, जिसके लिए उसने 8.9 अरब डॉलर के स्टॉक के बदले प्रति शेयर 20.47 डॉलर का भुगतान किया था।

तब से इंटेल के शेयरों में जबरदस्त तेजी आई है और वे डॉट-कॉम दौर के अपने उच्चतम स्तर को पार कर गए हैं, जिससे सरकार की इस हिस्सेदारी की कागजी कीमत चार गुना बढ़कर लगभग 36 अरब डॉलर हो गई है।

जब रेगुलेटर के पास स्टॉक हो, तो कॉन्ट्रैक्ट किसे मिलता है?

गेट्स की बात इंडस्ट्रियल पॉलिसी और कॉम्पिटिशन पॉलिसी पर केंद्रित है। विजेताओं को चुनना एक बात है। उनमें शेयर खरीदने के बाद विजेताओं को चुनना दूसरी बात है।

गेट्स का कहना है, ‘जिस सरकार के पास Intel का स्टॉक हो, उसका नजरिया एंटी-ट्रस्ट मामले की समीक्षा करते समय, डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट देते समय या एक्सपोर्ट कंट्रोल तय करते समय अलग होता है।’

बिल गेट्स ने बताया, ‘अकेले Intel में हिस्सेदारी की वैल्यू अगस्त से अब तक कागजों पर लगभग 27 बिलियन डॉलर बढ़ गई है। यह टैक्सपेयर्स के लिए अच्छी खबर है, लेकिन चिप बनाने वाली कंपनी से आगे निकलने की कोशिश कर रहे बाकी सभी लोगों के लिए एक चुपचाप खड़ी होने वाली मुश्किल भी है।’

गेट्स ने कहा कि अनुमान लगाने की क्षमता ही फैक्टरियां बनाती हैं। अमेरिकी सरकार की मौजूदा होल्डिंग्स की स्थिति ऐसी बिल्कुल नहीं है।