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‘विकसित भारत’ के लिए गांवों में नवाचार जरूरी, जम्मू-कश्मीर के LG मनोज सिन्हा ने की ‘विलेज इनोवेशन लैब्स’ की पैरवी

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जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार को पंचायतों में ‘विलेज इनोवेशन लैब्स’ स्थापित करने की वकालत करते हुए कहा कि देश को विकसित भारत के लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए नवाचार को गांवों और पंचायतों तक ले जाना होगा। उन्होंने कहा कि पंचायतों को नवाचार, डिजिटल सुशासन, जवाबदेही और जनविश्वास के केंद्र के रूप में विकसित करना समय की आवश्यकता है।

श्रीनगर के शेरे कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) में पंचायत-नेतृत्व वाली सेवा वितरण पर आयोजित क्षेत्रीय कार्यशाला ‘सेवा से समृद्धि’ को संबोधित करते हुए सिन्हा ने कहा कि भारत पहले ही प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बना चुका है। अब समय आ गया है कि इस नवाचार को गांवों तक पहुंचाया जाए, ताकि प्रत्येक नागरिक विकसित भारत के निर्माण की यात्रा में सक्रिय भागीदार बन सके।

उन्होंने पंचायतों के बीच ज्ञान और अनुभव साझा करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा, ‘यदि हरियाणा की कोई पंचायत कर्नाटक के लिए आदर्श मॉडल बनती है या जम्मू-कश्मीर की नवाचार पहल किसी अन्य राज्य के लिए लाभकारी सिद्ध होती है, तो इससे सुशासन को मजबूती मिलेगी और राष्ट्रीय एकता को भी बढ़ावा मिलेगा।’

लोकतंत्र को मजबूत करने के व्यापक प्रयास किए

उपराज्यपाल ने कहा कि पंचायतों के नेतृत्व में निर्बाध सेवा वितरण आधुनिक प्रशासन का एक महत्वपूर्ण अंग है। उन्होंने याद दिलाया कि जम्मू-कश्मीर में पहले प्रभावी त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था का अभाव था, लेकिन इसके लागू होने के बाद जमीनी लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए व्यापक प्रयास किए गए।

सिन्हा ने जम्मू कश्मीर में पंचायत राज व्यवस्था में सुधार का उल्लेख करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में पहले प्रभावी त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था नहीं थी। हमने पंचायत राज संस्थाओं को धन, कार्य और कर्मचारियों का हस्तांतरण सुनिश्चित किया, जिससे उन्हें विकास योजनाओं में सार्थक भागीदारी का अधिकार मिला। उन्होंने बताया कि पंचायत राज संस्थाओं के परामर्श से जिला स्तरीय विकास योजनाएं तैयार की गईं, जिसके परिणामस्वरूप ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक जनकल्याणकारी परियोजनाओं का सफल क्रियान्वयन हुआ।

डिजिटल परिवर्तन का उल्लेख करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि वर्ष 2020 में पदभार संभालने के समय प्रशासनिक प्रक्रियाएं अभी भी फाइलों को श्रीनगर और जम्मू के बीच भौतिक रूप से भेजने पर निर्भर थीं। उन्होंने कहा कि यह जानकर मुझे आश्चर्य हुआ था कि फाइलों से भरे ट्रक श्रीनगर और जम्मू के बीच भेजे जाते थे। आज प्रशासन पूरी तरह डिजिटल परिवर्तन से गुजर चुका है और सेवाएं उल्लेखनीय दक्षता के साथ ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं।

4,211 पंचायतें डिजिटल नेटवर्क से जुड़ चुकी

उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर में 1,100 से अधिक सरकारी सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा चुकी हैं, जिससे केंद्र शासित प्रदेश डिजिटल सेवा वितरण के क्षेत्र में अग्रणी इकाइयों में शामिल हो गया है। साथ ही ‘बैक टू विलेज’ और ‘ब्लॉक दिवस’ जैसे जनसंपर्क कार्यक्रमों ने प्रशासन और जनता के बीच की दूरी कम करने में अहम भूमिका निभाई है।

सिन्हा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में डिजिटल सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है और वर्तमान में 15,000 से अधिक कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) संचालित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र शासित प्रदेश की 4,290 पंचायतों में से 4,211 पंचायतें डिजिटल नेटवर्क से जुड़ चुकी हैं, जो 98 प्रतिशत से अधिक कनेक्टिविटी को दर्शाता है। शेष पंचायतें दूरदराज और सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां कनेक्टिविटी अभी भी चुनौती बनी हुई है। हालांकि, वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के तहत प्रत्येक सीमावर्ती गांव तक 4जी कनेक्टिविटी, सड़क, बिजली और संचार सुविधाएं पहुंचाने के प्रयास जारी हैं।

उपराज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में डिजिटल लेन-देन में पिछले कुछ वर्षों के दौरान तेज वृद्धि हुई है, जो डिजिटल प्रशासनिक तंत्र के प्रति जनता के बढ़ते विश्वास का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि भविष्य की पंचायत केवल एक प्रशासनिक संस्था नहीं, बल्कि नवाचार, समान अवसर, सतत विकास और जनभागीदारी का सशक्त मंच होनी चाहिए। सिन्हा ने कहा, “हमें मिलकर ऐसी पंचायतों का निर्माण करना है जहां नागरिकों को सेवाएं उनके घर-द्वार पर उपलब्ध हों, शिकायतों का त्वरित समाधान हो, निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाएं तथा प्रशासन पारदर्शी और जवाबदेह बना रहे।

पुर्तगाल और खुद को साबित करना चाहेंगे रोनाल्डो, इंग्लैंड की नजरें नॉकआउट पर

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अमेरिका के ह्यूस्टन में फीफा विश्व कप के ग्रुप-के में मंगलवार को जब पुर्तगाल की टीम का सामना उज्बेकिस्तान से होगा तो स्टार फुटबालर क्रिस्टियानो रोनाल्डो न सिर्फ यूरोप की मजबूत टीम पुर्तगाल बल्कि खुद को भी इस टूर्नामेंट में साबित करने की पूरी कोशिश करेंगे।

कांगो डीआर के विरुद्ध शुरुआती मुकाबले में 1-1 से ड्रॉ खेलने के बाद पुर्तगाल और रोनाल्डो की क्षमताओं पर सवाल उठने लगे हैं, ऐसे में रोनाल्डो भी मेसी, एमबापे की तरह अपने आलोचकों को जवाब देने के लिए बेताब होंगे।

रोनाल्डो का फैन है उज्बेकिस्तान

इधर टूर्नामेंट में पहली बार खेल रही रही उज्बेकिस्तान की टीम अपने दूसरे मुकाबले में ही उस टीम से भिड़ेगी, जिसके स्टार रोनाल्डो को वहां के लोग अपना आदर्श मानते हैं। इस मध्य एशियाई देश में पुर्तगाल के इस दिग्गज की छाप वाली टी-शर्ट लोगों के पहनावे में काफी आम है, लेकिन अब इस देश की टीम को टूर्नामेंट का पहला मुकाबला जीतना है तो इस दिग्गज के विरुद्ध ही रणनीति बनानी होगी। उज्बेकिस्तान की टीम अपना शुरुआती मुकाबला कोलंबिया से 3-1 से हार कर इस मुकाबले में आ रही है।

केन का अगला लक्ष्य घाना का शिकार

विश्व कप के ग्रुप एल के मुकाबले में अमेरिका के बोस्टन में इंग्लैंड और घाना आमने सामने होंगे। क्रोएशिया के विरुद्ध 4-2 की जीत में डबल गोल करने वाले इंग्लैंड के स्टार हैरी केन अपनी टीम को दूसरे मुकाबले में ही नॉकआउट में पहुंचाने के लिए कागजों पर कमजोर घाना का भी शिकार करने की पूरी कोशिश करेंगे।

हालांकि अपने पहले मुकाबले में पनामा को 1-0 से हराने वाली और अब तक छह बार विश्व कप खेलकर 2010 में क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय करने वाली घाना की टीम को कोई भी टीम हल्के में लेने की कोशिश नहीं करेगी।

कोलंबिया का समाना कांगो डीआर से

विश्व कप के ग्रुप-के में एक अन्य मुकाबले में मेक्सिको के ग्वाडलाहारा में कोलंबिया और कांगोडीआर आमने-समाने होंगे। कोलंबिया की टीम उज्बेकिस्तान को हराने के बाद इस टूर्नामेंट में अपनी लगातार दूसरी जीत दर्ज करन चाहती है तो उसे इस बात से सबक लेने की जरूरत होगी कि किस तरह कांगो ने पुर्तगाल जैसी बड़ी टीम को शुरुआती मुकाबले में परेशान किया। अगर उधर पुर्तगाल उज्बेकिस्तान को हराने में नाकाम रहता है, इस जीत से कोलंबिया की नॉकआउट दौर में जगह पक्की हो जाएगी।

पहली जीत को बेताब क्रोएशिया

2018 की उपविजेता क्रोएशिया इस टूर्नामेंट में अपनी पहली जीत के लिए बेताब है और कनाडा के टोरंटो में ग्रुप एल के अपने दूसरे मुकाबले में पनामा जैसे कमजोर प्रतिद्वंदी के सामने होने से क्रोएिशया की इस बहुप्रतिक्षित जीत के लिए इससे अच्छा दूसरा मौका नहीं होगा। वहीं घाना से 1-0 से हारकर आ रहे पनामा के पास इस टूर्नामेंट में जीत के अलावा कोई और विकल्प नहीं होगा।

फीफा विश्‍व कप 2026: Shakira ने अपने बेटों के साथ लियोनेल मेसी को किया चीयर, ‘किस’ का वीडियो हुआ वायरल

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पॉप स्‍टार शकीरा को फीफा विश्‍व कप 2026 में सोमवार को देख फैंस खुशी से झूम उठे। शकीरा ने अर्जेंटीना और ऑस्ट्रिया के बीच ग्रुप-जे के मैच का लुत्‍फ स्‍टेडियम से उठाया। शकीरा के साथ उनके दोनों बेटे साशा और मिलान भी मौजूद थे।

प्रसारणकर्ता ने जैसे ही बड़ी स्‍क्रीन पर शकीरा को दिखाया तो फैंस खुशी से झूम उठे। शकीरा ने खुशी जाहिर की और फैंस को फ्लाइंग किस भी दी। इस बीच शकीरा को उनके बेटे ने गाल पर किस किया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

कमेंटेटर ने क्‍या कहा

वैसे, शीकरा के दोनों बेटों को कम ही लोग जानते हैं और ऐसे में जिसने भी किस का वीडियो देखा, वो थोड़ा उलझन में रह गए। इसमें कमेंटेटर मार्टिन टायलर का नाम शामिल रहा, जिन्‍होंने वीडियो पर राय दी – 49 साल की वाका वाका गायिका के प्रति कभी आकर्षण कम नहीं पड़ता।

सोशल मीडिया पर कई यूजर्स के कमेंट देखने को मिले कि शकीरा को उनके ब्‍वॉयफ्रेंड ने किस किया, जिसे बाद में ठीक किया गया। शकीरा 2024 में अपने पति गेरार्ड पिके से अलग हो गईं थीं और ताजा अपडेट यही है कि वो किसी को डेट नहीं कर रही हैं।

शकीरा और फीफा की लंबी साझेदारी

शकीरा और फीफा वर्ल्‍ड कप की लंबी साझेदारी है। 2010 वर्ल्‍ड कप में शकीरा ने वाका वाका गीत गाया था, जो टूर्नामेंट का आधिकारिक एंथम था। 2026 में शकीरा ने बर्ना ब्‍वॉय के साथ दाई दाई एंथम तैयार किया। 2014 में ला ला ला गीत भी शकीरा ने बनाया था।

मेसी का किया सपोर्ट

बता दें कि शकीरा ने मैच में अर्जेंटीना के प्रति समर्थन जताया। लियोनेल मेसी ने अर्जेंटीना के लिए शानदार प्रदर्शन करते हुए दो गोल दागे और अपना नाम इतिहास के पन्‍नों में दर्ज करा लिया। मेसी फुटबॉल वर्ल्‍ड कप में सबसे ज्‍यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बने। मेसी के दम पर अर्जेंटीना ने ऑस्ट्रिया को 2-0 से मात दी।

बकरे की आंत और घोड़े के बाल से बनाया जाता है कमायचा, इसकी साज में बसती है राजस्थानी लोकगीतों की आत्मा

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राजस्थान अपने किलों और महलों के साथ-साथ अपने लोकगीतों और संस्कृति के लिए भी काफी मशहूर है। राजस्थानी संगीत की दुनिया में एक ऐसा ही वाद्य यंत्र है, जिसे मांगणियार समुदाय के संगीत की आत्मा कहा जाता है। हम बात कर रहे हैं कमायचा की।

सदियों पुराने इस वाद्य यंत्र ने अपनी मीठी धुन से इतिहास, कहानियों और परंपराओं को जिंदा रखा हुआ है। रेगिस्तान की मिट्टी में गूंजने वाली इसकी तान आज भी पुरानी और नई पीढ़ी को आपस में जोड़ने का काम कर रही है। आइए जानें इस वाद्य यंत्र से जुड़ी कुछ खास बातें।

जैसलमेर और बाड़मेर की धड़कन

कमायचा को ज्यादातर राजस्थान के पश्चिमी हिस्सों में, खासकर जैसलमेर और बाड़मेर में बजाया जाता है। यहां के मांगणियार और दूसरे प्रमुख समुदाय इस पारंपरिक वाद्य यंत्र को बजाते हैं। कई तारों और मधुर लहरियों वाला ये वाद्य यंत्र मनोरंजन का साधन होने के साथ-साथ इन जगहों की जीवनशैली और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक माना जाता है।

कैसे बनता है यह अनोखा कमायचा?

कमायचा से निकलने वाला संगीत जितना मधुर है, उतनी ही दिलचस्प इसकी बनावट भी है। इसे बनाने और बजाने में कई खास चीजों का इस्तेमला होता है। कमायचा को आमतौर पर 17 तारों से बनाया जाता है। इसमें 3 मुख्य तार होते हैं, जिन्हें बकरे की आंत से तैयार किया जाता है और इन्हीं से इस साज की धुन निकलती है। इसके साथ 14 सहायक तार होते हैं, जो स्टील के बने होते हैं।

इस वाद्य यंत्र को आम की नर्म लकड़ी से तराशा जाता है और इसे जानवरों की खाल से मढ़ा जाता है। इसे बजाने के लिए जिस गज का इस्तेमाल होता है वो घोड़े के बाल से बने होते हैं और इसका ब्रिज शीशम की लकड़ी से बनता है, जिसे घोरी कहा जाता है।

गांवों से अंतरराष्ट्रीय मंच का सफर

इस वाद्य यंत्र को पूरी दुनिया में पहचान दिलाने का पूरा श्रेय राजस्थान के दिग्गज कलाकारों को जाता है। साकर खान और दरे खान जैसे महान फनकारों ने अपने परिवार की इस सदियों पुरानी विरासत को देश-विदेशों में मशहूर किया। कमायचा और लोक गायन के जरिए राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय पटल पर पहुंचाने का श्रेय इन्हीं कलाकारों को जाता है।

पवन उड़ावे बतिया…रील्स पर खूब सुना होगा यह गाना, लेकिन क्या आप जानते हैं सलमान खान के इस गीत की कहानी

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पवन उड़ावे बतिया ओ बतिया…ये गाना पिछले कुछ समय से रील्स पर काफी वायरल है। हम में से कई लोगों ने इस गाने पर दूसरों को रील्स बनाते देखा होगा और शायद खुद भी इस गाने पर रील जरूर बनाई होगी। यह गाना असल में साल 2010 में आई सलमान खान की फिल्म ‘वीर’ के लिए बनाया गया था, लेकिन यह कोई आम गाना नहीं है।

यह गाना असल में एक ठुमरी है, जिसे फिल्म के लिए बनाया गया था। साजिद-वाजिद का संगीत, गुलजार साहब के जादुई शब्द और रेखा भारद्वाज की खनकती आवाज ने इस पुरानी क्लासिकल शैली ‘ठुमरी’ को आज के युवाओं के बीच फिर से जिंदा कर दिया है। आइए आज इस आर्टिकल में हम आपको बताते हैं गाने की इसी शैली ठुमरी के बारे में विस्तार से –

आखिर ‘ठुमरी’ है क्या?

हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में ‘ठुमरी’ को एक सेमी-क्लासिकल शैली माना जाता है। यह कोई गंभीर या बहुत सारे कड़े नियमों वाला संगीत नहीं है, बल्कि प्यार, विरह, रोमांस और श्रृंगार रस में डूबा हुआ एक बेहद मीठा संगीत है। यह मुख्य रूप से ब्रज भाषा और अवधी जैसी देसी बोलियों में गाया जाता है।

‘ठुमरी’ शब्द असल ‘ठुमकना’ शब्द से बना है, जिसका मतलब बहुत ही नजाकत और लय के साथ चलना होता है। यह शब्द बताता है कि यह सिर्फ गाने की कला नहीं, बल्कि नृत्य से भी गहराई से जुड़ी है।

नवाबों के दरबार से निकला ठुमरी

आम तौर पर लोग मानते हैं कि ठुमरी की शुरुआत 19वीं सदी में लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह के शाही दरबार में हुई थी, लेकिन संगीत के इतिहासकारों की माने तो इसकी जड़ें बहुत पुरानी हैं। इसके कुछ अंश तो भरत मुनि के प्राचीन ग्रंथ ‘नाट्यशास्त्र’ में भी मिलते हैं। 18वीं और 19वीं सदी के दौर में जब यह शाही दरबारों तक पहुंची, तो इसके दो खास रूप सामने आए:

बंदिश-की-ठुमरी: यह थोड़ी तेज रफ्तार वाली होती थी और खास तौर पर कथक डांसरों के नाचने के लिए बनाई गई थी।

बोल-बनाव-की-ठुमरी: यह बहुत धीमी, सुरीली और भावुक होती थी, जिसमें गायक शब्दों के अर्थ और उसकी गहरी भावना (पुकार) पर सबसे ज्यादा जोर देते थे।

दरबारों से लेकर सोशल मीडिया तक का सफर

शुरुआती दौर में इस खूबसूरत कला को निखारने और सहेजने का बहुत बड़ा काम कला-प्रेमी महिलाओं ने किया। जब शाही दरबारों का दौर खत्म होने लगा, तब रसूलन बाई, सिद्धेश्वरी देवी और बाद में महान विदुषी गिरिजा देवी जैसी दिग्गज गायिकाओं ने ठुमरी को निजी महफिलों की दीवारों से निकालकर बड़े और खुले मंचों तक पहुंचाया।

आज जब हम “पवन उड़ावे बतियां” जैसी ठुमरी को इंस्टाग्राम रील्स पर बजते हुए सुनते हैं, तो मन अपने आप भी इसके बोलों और संगीत के साथ थिरकने लगता है। यह साबित करता है, कि दौर चाहे जो भी हो, ठुमरी की थिरक आज भी लोगों के दिलों में उसी तरह से राज करती है।

Eetha Teaser: यश की Toxic को टक्कर देगी श्रद्धा कपूर की ‘ईथा’, बायोपिक ड्रामा का धांसू टीजर रिलीज

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 Eetha Movie Teaser: बी टाउन एक्ट्रेस श्रद्धा कपूर (Shraddha Kapoor) का नाम बीते समय से फिल्म ईथा को लेकर चर्चा में बना हुआ है। इस मूवी का लेटेस्ट टीजर मेकर्स की तरफ से मंगलवार को रिलीज कर दिया गया है।

मैडॉक फिल्म्स के बैनर तले बनने वाली ईथा एक बायोपिक मूवी में, जिसमें श्रद्धा अहम भूमिका निभाती हुई नजर आ रही हैं। आइए एक नजर फिल्म के इस लेटेस्ट टीजर पर डालते हैं।

रिलीज हुआ ईथा का टीजर

फिल्म कॉकटेल 2 की रिलीज के दिन सिनेमाघरों में ईथा का टीजर रिलीज किया गया था और अब इसे फैंस के बीच भी पेश किया जा रहा है। मेकर्स की तरफ से ईथा का पहला टीजर रिलीज किया गया है, जो अब चर्चा का विषय बन गया है।

गौर किया जाए श्रद्धा कपूर की फिल्म ईथा के स्टोरी प्लॉट की तरफ तो ये फिल्म महाराष्ट्र की मशहूर लोक कलाकार विठाबाई भाऊ मांग नारायणगांवकर के जीवन पर आधारित एक बायोपिक फिल्म है।

ईथा में 1940 से 1990 के दशक तक की बीच का दौर दिखाया जाएगा, जिसमें विठाबार के जीवन संघर्ष और सफलता के रोचक सफर को दर्शाया जाएगा। आपको बता दें कि विठाबाई भाऊ मांग नारायणगांवकर को ‘तमाशा क्वीन’ के नाम से भी जाना जाता था। अभिनेत्री श्रद्धा कपूर फिल्म में उनका ही किरदार निभाती हुई नजर आएंगी।

श्रद्धा कपूर की आने वाली फिल्म ईथा में अभिनेता रणदीप हुड्डा और मोहम्मद जीशान आयूब भी लीड रोल में नजर आएंगे। मूवी का निर्देशन छावा फिल्म डायरेक्टर लक्ष्मण उतेकर ने किया है। ईथा टीजर देखने के बाद फैंस की एक्साइटमेंट बढ़ गई है और वे इस फिल्म की रिलीज का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

कब रिलीज होगी ईथा

फिल्म स्त्री 2 की अपार सफलता के लगभग 2 साल बाद फिल्म ईथा के जरिए श्रद्धा कपूर बड़े पर्दे पर वापसी करने जा रही हैं। बात की जाए ईथा की रिलीज डेट के बारे में तो ये फिल्म रक्षा बंधन के मौके पर 28 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज की जाएगी। ईथा का बॉक्स ऑफिस क्लैश साउथ सुपरस्टार यश की मोस्ट अवेटेड मूवी टॉक्सिक के साथ देखने को मिलेगा।

Prime Video पर महा फ्लॉप ने डाला डेरा, टॉप-10 में ट्रेंड कर रही है डिजास्टर फिल्म

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ओटीटी की दुनिया के सबसे चर्चित प्लेटफॉर्म के बारे में जिक्र किया जाए तो उसमें अमेजन प्राइम वीडियो (Amazon Prime Video) का नाम जरूर शामिल होता है। हाल ही में इस ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कई फिल्में और वेब सीरीज को ऑनलाइन स्ट्रीम किया गया है, जिसमें एक 2 महीने पहले आई एक फ्लॉप फिल्म का नाम भी शामिल है।

फिलहाल वह मूवी अमेजन प्राइम वीडियो पर टॉप ट्रेंडिंग में बनी हुई है और दर्शकों का भरपूर मनोरंजन कर रही है। आइए जानते हैं कि यहां कौन सी फिल्म के बारे में जिक्र किया जा रहा है।

प्राइम वीडियो पर छाई फ्लॉप फिल्म

जिस फिल्म के बारे में इस लेख में बात की जा रही है, उसे इस साल 24 अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज किया गया। क्रिटिक्स और ऑडियंस की तरफ से इस मूवी को पॉजिटिव रिस्पॉन्स नहीं मिला और ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई। लेकिन अब ये फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेजन प्राइम वीडियो पर ट्रेंड कर रही है। इसका नाम गिन्नी वेड्स सन्नी 2 (Ginny Wedss Sunny 2) है।

मेधा शंकर और अविनाश तिवारी स्टारर इस रोमांटिक कॉमेडी फिल्म को बेशक थिएटर्स में दर्शक नहीं मिली, लेकिन फिलहाल ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेजन प्राइम वीडियो पर इस मूवी का भौकाल फुल ऑन टाइट है और गिन्नी वेड्स सन्नी 2 टॉप-7 के पायदान पर ट्रेंड कर रही है।

ऐसे में कमर्शियल तौर पर एक डिजास्टर फिल्म होने के बावजूद ओटीटी पर इस तरह से टॉप-10 में जगह बनाना गिन्नी वेड्स सन्नी 2 के लिए काफी बड़ी उपलब्धि है। गौर किया जाए गिन्नी वेड्स सन्नी 2 की कहानी की तरफ तो इसमें दो ऐसे लड़का और लड़की की कहानी को दिखाया गया है, जो शादी के लिए परफेक्ट मैच को तलाश रहे हैं।

शादी के लिए उनके ऊपर परिवार का भी प्रेशर है। शादी होने के बाद इस कपल के जीवन में क्या बदलाव आता है, उसी के इर्द-गिर्द पूरी मूवी की कहानी घूमती है।

इस ओटीटी प्लेटफॉर्म पर पहले हुई थी रिलीज

आपको बता दें कि गिन्नी वेड्स सन्नी 2 पहली बार ओटीटी पर नहीं आई है। अमेजन प्राइम वीडियो से पहले इस रोम-कॉम मूवी को मशहूर ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर भी स्ट्रीम किया जा चुका है। लेकिन फिलहाल प्राइम वीडियो पर इसे अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है।

‘आतंकवादियों को पनाह देने का लंबा इतिहास’, जेडी वेंस ने PAK के लिए दिखाया प्यार तो बरसे अमेरिकी सांसद

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 अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस के इस्लामाबाद के प्रति प्यार जताने वाले बयानों के बीच दो रिपब्लिकन सीनेटरों ने कतर और पाकिस्तान के आतंकवादियों को पनाह देने के इतिहास की ओर इशारा किया है।

सीनेटर रिक स्कॉट ने सोमवार को एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “अब तक सभी को यह साफ हो जाना चाहिए कि हमारे असली दोस्त कौन हैं। कतर और पाकिस्तान का आतंकवादियों को पनाह देने का लंबा इतिहास रहा है और अभी वे सार्थक शांति लाने के बजाय ईरान के दशकों पुराने आतंकी अभियान को बढ़ावा देने में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं।”

सीनेटरों ने दिलाई ओसामा बिन लादेन की याद

फ्लोरिडा के सीनेटर की ये बातें स्विट्जरलैंड में वेंस के उस बयान के बाद आईं जिसमें उन्होंने कहा था, “हम पाकिस्तान से प्यार करते हैं”। वहां वेंस, पाकिस्तान और कतर के नेताओं के साथ मिलकर ईरान के साथ शांति समझौते की तकनीकी बारीकियों पर बातचीत कर रहे थे।

स्कॉट ने कहा, “अभी भी एक ऐसे समझौते की गुंजाइश है जो सबके लिए फायदेमंद हो। लेकिन, सभी को यह बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि ईरान के लिए इस प्रक्रिया से निकलकर परमाणु हथियार बनाने की संभावना बिल्कुल भी नहीं है।”

वहीं, मोंटाना के सीनेटर टिम शीही ने भी फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में अल-कायदा नेता ओसामा बिन लादेन को पनाह देने में पाकिस्तान की भूमिका का जिक्र किया। शीही ने कहा, “हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि पाकिस्तान ने एक दशक तक बिन लादेन को छिपाकर रखा था। उसने आईएसआई के जरिए अयातुल्ला को फंडिंग दी।”

यूएई और इजरायल को बातचीत में शामिल करने की अपील

उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान और कतर बातचीत की मेज पर हैं तो अमेरिका को बातचीत में यूएई, इजरायल और सऊदी अरब को भी शामिल करना चाहिए। शीही ने कहा कि मिडिल ईस्ट में यूएई, इजरायल और सऊदी अरब ही अमेरिका के असली सहयोगी हैं।

मोंटाना के सीनेटर ने यह भी कहा कि कतर दशकों से आतंकवादी संगठनों के लिए मनी लॉन्ड्रिंग करता रहा है। शीही ने कहा, “पाकिस्तानियों ने आईएसआई के जरिए हमारे खिलाफ विद्रोहों को फंडिंग दी और बिन लादेन को छिपाकर रखा। इसलिए यह सोचना कि वे यहां निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभाएंगे, मुझे सही नहीं लगता।”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे लगता है कि हमें यह पक्का करना होगा कि हम यूएई और इजरायल के साथ पूरी मजबूती से खड़े रहें, क्योंकि चाहे कुछ भी हो वे इस क्षेत्र में हमारे सबसे आगे रहने वाले सहयोगी होंगे।”

‘सालों के बजाय महीनों में बदल जाएगा माहौल’, AI को लेकर Five Eyes की बड़ी चेतावनी

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 इंटेलिजेंस अलायंस फाइव आइज ने एक अनोखी चेतावनी जारी की है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की अगली जेनरेशन सालों के बजाय कुछ ही महीनों में साइबर सिक्योरिटी के माहौल को पूरी तरह से बदल सकती है और सरकारों, बिजनेस और कॉर्पोरेट लीडर्स से साइबर रेजिलिएंस को तुरंत प्रायोरिटी देने की अपील की है।

यह चेतावनी ‘फाइव आइज इंटेलिजेंस ओवरसाइट एंड रिव्यू काउंसिल’ (FIORC) के एक संयुक्त बयान में दी गई। यह काउंसिल ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका की इंटेलिजेंस और सुरक्षा एजेंसियों का एक समूह है।

किसी खास कंपनी या मॉडल का नहीं लिया नाम

यह बयान तब जारी किया गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के प्रशासन ने टेक्नोलॉजी कंपनी ‘एन्थ्रोपिक’ (Anthropic) द्वारा विकसित दो एडवांस्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम तक विदेशी नागरिकों की पहुंच को सीमित करने का कदम उठाया। इस महीने की शुरुआत में घोषित यह फैसला अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों की सलाह के बाद लिया गया।

किसी खास कंपनी या मॉडल का नाम लिए बिना फाइव आइज के बयान में चेतावनी दी गई कि ‘फ्रंटियर AI सिस्टम’ से मौजूदा इंडस्ट्री की उम्मीदों से कहीं आगे निकलने और आक्रामक व रक्षात्मक, दोनों तरह की साइबर क्षमताओं में बड़े बदलाव लाने की उम्मीद है।

बयान में क्या कहा गया?

बयान में कहा गया है, “हालांकि AI समय के साथ साइबर सुरक्षा को बेहतर बनाने में हमारी मदद करेगा, लेकिन यह साइबर खतरों की रफ्तार, दायरे और जटिलता को भी बढ़ा देता है। उम्मीद है कि ‘फ्रंटियर AI मॉडल’ इंडस्ट्री की मौजूदा उम्मीदों से कहीं आगे निकल जाएंगे और साइबर हमले और बचाव, दोनों ही क्षमताओं में बुनियादी बदलाव लाएंगे। इसमें सालों नहीं, बल्कि महीनों का समय लगेगा।”

इस ग्रुप ने कहा कि बिजनेस, बाजार के भरोसे और लंबे समय तक आर्थिक वैल्यू बनाए रखने के लिए साइबर रेजिलिएंस (साइबर हमलों से उबरने की क्षमता) बहुत जरूरी हो गई है। इसने लीडर्स से कहा कि वे जोखिमों और जवाबदेही का आकलन करें, मुख्य साइबर सिक्योरिटी कंट्रोल को प्राथमिकता दें, साइबर सिक्योरिटी टीमों को पर्याप्त अधिकार और संसाधन दें और खतरों के बदलते स्वरूप के साथ सक्रिय रूप से जुड़े रहें।

बयान में कहा गया, “जरूरत साफ है। AI भविष्य की कोई चीज नहीं है, यह पहले से ही मौजूद है।” फाइव आइज के बयान के मुताबिक, AI किसी कमजोरी का पता चलने और बुरे इरादे वाले लोगों द्वारा उसका फायदा उठाने के बीच के समय को कम कर रहा है।

‘संगठन और समाज को करना होगा असरदार ढंग से काम’

साथ ही, अधिकारियों ने यह भी माना कि यह टेक्नोलॉजी साइबर सुरक्षा को मजबूत करने में सक्षम शक्तिशाली सुरक्षात्मक उपकरण भी देती है। इसमें कहा गया है, “इसके लिए पूरे संगठन और पूरे समाज की ओर से प्रतिक्रिया की जरूरत है। साइबर जोखिम को अब सिर्फ एक तकनीकी समस्या नहीं माना जा सकता। यह कारोबार का एक मुख्य जोखिम और लीडरशिप की जिम्मेदारी है।”

इस अलायंस ने कंपनियों के बोर्ड और सीनियर अधिकारियों से कहा कि वे यह पक्का करें कि साइबर सुरक्षा के उपाय सिर्फ कागज पर ही न हों, बल्कि असल घटनाओं के समय भी असरदार ढंग से काम कर सकें।

अलायंस का कहना है कि लीडर्स को पुरानी मान्यताओं पर फिर से विचार करना चाहिए और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सोच-समझकर AI का इस्तेमाल करना चाहिए, न कि सिर्फ काम की क्षमता (एफिशिएंसी) बढ़ाने के लिए।

बयान में कहा गया, “फ्रंटियर AI के तेजी से हो रहे विकास का मतलब है कि साइबर जोखिम से जुड़ी धारणाएं सालों में नहीं, बल्कि महीनों में ही पुरानी पड़ सकती हैं। हमें पहले से ही कदम उठाने होंगे और बदलते खतरों के अनुसार खुद को ढालने और उनका सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।”

आगरा में औषधि विभाग की छापेमारी से दहशत, दो दवा कारोबारियों की मौत; 95% बाजार बंद

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औषधि विभाग की टीमें थोक दवा बाजार में छापेमारी कर रही हैं। दहशत में 95 प्रतिशत बाजार बंद है। ऐसे में शास्त्रीपुरम के रहने वाले रिचा मेडिकल एजेंसी के संचालक प्रेम जेसवानी की रविवार सुबह मृत्यु हो गई।

बताया जा रहा है कि उनकी फर्म पर कुछ महीने पहले औषधि विभाग ने कार्रवाई की थी। इसके बाद से वे डिप्रेशन में चल रहे थे, दवाओं की ओवर डोज से मृत्यु की बात कही जा रही है।

वहीं, लवकुश मेडिकल स्टोर के संचालक कमल कुमार की अचानक तबीयत बिगड़ी उनकी भी सुबह मृत्यु हो गई। हार्ट अटैक से मृत्यु बताई जा रही है।

औषधि विभाग की थोक दवा बाजार में छापेमारी मेडिकल एजेंसी संचालक की मृत्यु

दोनों कारोबारियों की मृत्यु औषधि विभाग की छापेमारी की दहशत के कारण हुई है इस बारे में स्वजन और एसोसिएशन के पदाधिकारी कुछ नहीं कह रहे हैं लेकिन दवा कारोबारियों चर्चा कर रहे हैं कि औषधि विभाग की छापेमारी ने दो युवा कारोबारियों की जान ले ली।

थोक दवा बाजार में शुक्रवार से आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन डॉ.रोशन जैकब के निर्देशन में थोक दवा बाजार में बंद दुकानों के ताले तोड़कर प्रदेश के 28 औषधि निरीक्षकों की टीमें छापेमारी कर रही हैं।