फारस की खाड़ी को हिंद महासागर से जोड़ने वाला होर्मुज स्ट्रेट एक अहम जलमार्ग है। जब से अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ा है, तब से इसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में तेहरान ने इस स्ट्रेट में दुश्मन मालवाहक जहाजों पर हमले शुरू कर दिए। इससे सभी जहाजों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई और दुनिया में ऊर्जा वितरण का अब तक का सबसे भीषण संकट खड़ा हो गया।
ट्रांजिट फीस वसूलना चाहता है ईरान
भले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने स्थायी शांति की शर्तों पर बातचीत के लिए दो सप्ताह के संघर्ष-विराम पर सहमति जता दी है लेकिन ईरान इस मार्ग पर अपना नियंत्रण छोड़ने और होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से फिर से खोलने से इंकार कर रहा है।
ईरान इन जल-क्षेत्रों पर वास्तविक नियंत्रण चाहता है और युद्ध समाप्त करने के लिए अपने 10-सूत्रीय प्रस्तावों के हिस्से के तौर पर, तेल टैंकरों से इस मार्ग से गुजरने के लिए ट्रांजिट फीस वसूलना चाहता है।
क्या कहता है कानून?
ईरान की यह मांग अमेरिका और दूसरे देशों के बीच अब भी अलोकप्रिय बनी हुई है, क्योंकि लड़ाई शुरू होने से पहले यह संकरा जलमार्ग जहाजों के लिए टोल-फ्री और सुरक्षित था। यहां तक कि अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून भी यह कहता है कि जलडमरूमध्य (straits) से सटे देश वहां से गुजरने की अनुमति देने के लिए महज पैसे की मांग नहीं कर सकते।
लेकिन यह देखते हुए कि इजरायल और अमेरिका पहले ही हफ्तों तक ईरान पर लगातार हमले करते रहे हैं, यह कहना मुश्किल है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ईरान की इस मांग के बारे में क्या कर सकता है।
किस तरह टोल वसूलना चाहता है ईरान?
ईरान और ओमान के बीच पानी की 34 किमी. की पट्टी होर्मुज स्ट्रेट खाड़ी से हिंद महासागर की ओर जाने का रास्ता देता है। यह दुनिया की तेल आपूर्ति के लिए एक अहम रास्ता है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान चाहता है कि अमेरिका और इजरायल के साथ किसी भी स्थायी शांति समझौते से युद्ध खत्म हो जाए, ताकि तेहरान को इस स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क मांगने का अधिकार मिल सके।
रिपोर्ट के अनुसार, शुल्क जहाज के प्रकार, उसके माल और कुछ अन्य अनिर्दिष्ट मौजूदा स्थितियों के आधार पर अलग-अलग होगा। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने पिछले हफ्ते कहा था कि तेहरान ओमान के साथ मिलकर एक प्रोटोकॉल का मसौदा तैयार कर रहा है, जिसके तहत जहाजों को होर्मुज से गुजरने के लिए परमिट और लाइसेंस लेना जरूरी होगा। उन्होंने कहा कि इस कदम का मकसद आवाजाही को रोकना नहीं, बल्कि उसे आसान बनाना है।
हालांकि, बाद में मस्कट ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया और कहा कि ऐसा करने की उनकी कोई योजना नहीं है। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इस स्ट्रेट से गुजरने के लिए कम से कम एक जहाज की ओर से 2 मिलियन डॉलर का भुगतान किया गया है लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।
रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि ईरान अब शिपिंग कंपनियों से होर्मुज से अपने तेल टैंकरों को गुजरने देने के बदले क्रिप्टोकरेंसी में टोल की मांग करने की योजना बना रहा है। फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, मांगी गई टोल की रकम कथित तौर पर 1 डॉलर प्रति बैरल तेल है।
इंटरनेशनल लॉ क्या कहता है?
समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (UNCLOS) कहता है कि जलडमरूमध्य (straits) से सटे देश, केवल वहां से गुजरने की अनुमति देने के लिए किसी भी प्रकार के भुगतान की मांग नहीं कर सकते। हालाकि, वे जहाजों पर कुछ खास सेवाओं जैसे कि जहाज को रास्ता दिखाना (पायलटिंग), खींचना (टगिंग) या बंदरगाह से जुड़ी सेवाओं के लिए सीमित शुल्क लगा सकते हैं, लेकिन ये शुल्क किसी खास देश के जहाजों पर ज्यादा भारी नहीं होने चाहिए।
वहीं, मिस्र और पनामा दोनों ही स्वेज नहर और पनामा नहर से गुजरने के लिए शुल्क लेते हैं। नहरों को स्ट्रेट से अलग माना जाता है। इन्हें प्राकृतिक रूप से बनने के बजाय खोदा जाता है।
सिंगापुर स्ट्रेट से गुजरने के लिए सिंगापुर कोई शुल्क नहीं लेता है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, आधुनिक इतिहास में किसी जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए शुल्क की मांग करने जैसा कोई भी एकतरफा कदम नहीं उठाया गया है।
