आगरा और आसपास के क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की जिम्मेदारी संभालने वाली Dakshin Vidyut Vitran Nigam Limited (DVVNL) पर गंभीर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि नया बिजली कनेक्शन लेने की प्रक्रिया सिर्फ कागज़ों तक सीमित है, और व्यवहार में विभाग की तरफ से कोई काम नहीं किया जाता।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार उन्होंने—
विभाग की वेबसाइट पर नया कनेक्शन आवेदन किया
जरूरी दस्तावेज अपलोड किए
शुल्क जमा किया
और आवेदन का प्रिंटआउट लेकर DVVNL कार्यालय में जमा भी किया
लेकिन इसके बाद विभाग की तरफ से किसी भी तरह की शुरुआती कार्रवाई नहीं की जाती।
निरीक्षण टीम मौके पर नहीं आती, फोन उठाने वाला तक नहीं मिलता
उपभोक्ताओं का कहना है कि कनेक्शन आवेदन करने के बाद JE या लाइनमैन द्वारा प्राथमिक निरीक्षण होना चाहिए। लेकिन हफ्तों तक कोई अधिकारी मौके पर नहीं आता।
कई उपभोक्ताओं ने बताया कि उन्होंने दर्जनों बार संबंधित JE और SDO को फोन किया, लेकिन—
कॉल रिसीव नहीं किया जाता
कभी “अभी आते हैं, इंतज़ार कीजिए” कहा जाता
और कभी शिकायत को आगे नहीं बढ़ाया जाता
इस दौरान DVVNL की वेबसाइट पर आवेदन का स्टेटस लगातार “Under Process” दिखता रहता है।
लंबा इंतज़ार… और फिर अचानक “Rejected”
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जब उपभोक्ता उम्मीद करते हैं कि अब कनेक्शन मिल जाएगा, तभी सिस्टम से एक नोटिफिकेशन आता है—
“Your Connection Request Has Been Rejected.”
उपभोक्ताओं का आरोप है कि रिजेक्शन के पीछे—
कोई कारण नहीं बताया जाता
कोई रिपोर्ट नहीं दी जाती
न ही विभाग की ओर से कोई विजिट किया गया होता है
इससे साफ होता है कि विभाग बिना जांच-पड़ताल किए सीधे आवेदन खारिज कर देता है।
इस लापरवाही की वजह से उपभोक्ताओं को भारी परेशानी
DVVNL की इस कार्यप्रणाली का सीधा असर उपभोक्ताओं की दिनचर्या और योजनाओं पर पड़ रहा है।
कई लोग महीनों से बिजली के इंतज़ार में हैं, जबकि—
किसी का नया मकान तैयार खड़ा है, लेकिन बिजली नहीं
किसी का नया कारोबार शुरू नहीं हो पा रहा
कई उपभोक्ता मजबूरी में महंगा जनरेटर चला रहे हैं
कुछ लोग अस्थायी अवैध कनेक्शन लेकर जोखिम उठा रहे हैं
लोग खुलेआम कह रहे हैं कि DVVNL की यह लापरवाही सिर्फ प्रशासनिक भूल नहीं, बल्कि जनता के साथ सीधा खिलवाड़ है।
उपभोक्ताओं का आरोप—“शुरू में एक कदम भी आगे नहीं बढ़ते, और बाद में रिजेक्ट कर देते हैं”
उपभोक्ताओं ने कहा कि यह DVVNL की स्थायी समस्या बन चुकी है।
शुरुआत में कोई अधिकारी साइट विजिट नहीं करता, फाइल को आगे नहीं बढ़ाया जाता, और जब लोग बार-बार परेशान करने लगते हैं, तब कनेक्शन को बिना कारण के रिजेक्ट कर दिया जाता है।
कई उपभोक्ताओं ने इसे “सिस्टम की नाकामी” बताया और कहा कि यदि यही तरीका रहा, तो लोग सरकारी व्यवस्था पर भरोसा कैसे करें?
लोगों की मांग: कनेक्शन प्रक्रिया की जांच हो, लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई
स्थानीय निवासियों ने DVVNL प्रबंधन और ऊर्जा विभाग से मांग की है कि—
सभी लंबित आवेदनों की जांच की जाए
जिन उपभोक्ताओं के आवेदन बिना वजह रिजेक्ट किए गए हैं, उन्हें फिर से खोला जाए
JE, लाइनमैन और SDO स्तर पर जवाबदेही तय की जाए
नया कनेक्शन देने की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाया जाए
लोगों का कहना है कि यदि DVVNL ईमानदारी से काम करे, तो कनेक्शन देने में दो हफ्ते से ज़्यादा नहीं लगते, लेकिन विभाग की लापरवाही के कारण यह प्रक्रिया महीनों तक खिंच जाती है।
निष्कर्ष
यह मामला सिर्फ बिजली कनेक्शन में देरी का नहीं, बल्कि एक बड़े प्रशासनिक ढांचे की उस विफलता का है जिसमें उपभोक्ता सबसे नीचे होते हैं, और फाइलें सिर्फ “Under Process” के नाम पर लटकाई जाती हैं।
उपभोक्ता एक ही बात पूछ रहे हैं—
“कनेक्शन चाहिए था, रिजेक्शन क्यों मिला?”
DVVNL की बड़ी लापरवाही! नया कनेक्शन मांगते-मांगते उपभोक्ता हुए परेशान — न निरीक्षण, न कार्रवाई… और आखिर में आवेदन को सीधे रिजेक्ट कर दिया जाता है
