दिल्ली के ट्रांस यमुना क्षेत्र स्थित शाहदरा बगीची में पशु प्रेम और इंसान-जानवर के रिश्ते की अनोखी मिसाल देखने को मिली। जहां एक ओर शहर में आवारा कुत्तों को लेकर बहस और विवाद जारी हैं, वहीं दूसरी ओर एक परिवार ने अपने पालतू कुत्ते को बेटे की तरह सम्मान देते हुए हिंदू रीति-रिवाज से उसका अंतिम संस्कार किया।
जानकारी के अनुसार, शाहदरा बगीची निवासी घनश्याम दीक्षित ने करीब 14 साल पहले दिल्ली से एक लेब्राडोर डॉग खरीदा था, जिसका नाम टाइगर रखा गया। समय के साथ टाइगर सिर्फ पालतू जानवर नहीं रहा, बल्कि परिवार का अहम सदस्य बन गया। परिवार के लोगों के अनुसार, टाइगर घर के हर सुख-दुख में साथ रहता था और उसकी मौजूदगी घर के माहौल को खुशहाल बनाती थी।
परिवार का कहना है कि टाइगर की वफादारी, मासूमियत और अपनापन ऐसा था कि उन्होंने उसे बेटे जैसा दर्जा दिया। लंबे समय तक परिवार के साथ रहने के बाद जब टाइगर की मौत हुई, तो परिवार ने उसे पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई देने का फैसला लिया।
बताया जा रहा है कि परिवार ने हिंदू परंपराओं के अनुसार सभी अंतिम संस्कार की रस्में निभाईं। इस दौरान परिवार और आसपास के लोग भी मौजूद रहे। यह घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई और कई लोगों ने इसे इंसान और जानवर के बीच गहरे भावनात्मक रिश्ते की मिसाल बताया।
पशु प्रेमियों का कहना है कि पालतू जानवर सिर्फ घर की सुरक्षा या शौक के लिए नहीं होते, बल्कि वे परिवार का हिस्सा बन जाते हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, पालतू जानवर इंसानों को भावनात्मक सहारा देने में भी अहम भूमिका निभाते हैं और कई लोगों के लिए तनाव कम करने का माध्यम बनते हैं।
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब बड़े शहरों में आवारा कुत्तों को लेकर बहस तेज है। इस बीच शाहदरा की यह कहानी यह संदेश देती है कि इंसान और जानवर के बीच भावनात्मक रिश्ता कितना मजबूत हो सकता है।
