बार-बार टोकने पर भी झुककर बैठता है बच्चा? खराब पोस्चर नहीं, रीढ़ की हड्डी की बीमारी हो सकती है वजह

 सीधे बैठो, झुककर मत बैठो, पढ़ते समय आगे मत झुको, जैसी बातें पेरेंट्स अक्सर बच्चों को कहते हैं। बॉडी पोस्चर को सीधा रखने के लिए यह सलाह दी जाती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपके बच्चे का हमेशा झुककर बैठना या पीठ के मामूली-से तिरछेपन के पीछे कोई और वजह भी हो सकती है?

डॉ. तरुण सूरी (ऑर्थोपेडिक्स ऑर्थो स्पाइन सर्जरी विभाग के प्रमुख, अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद) बताते हैं कि इसके पीछे स्कोलियोसिस की समस्या जिम्मेदार हो सकती है। आइए जानें कि यह क्या समस्या है।

क्या है स्कोलियोसिस और यह कब होता है?

स्कोलियोसिस रीढ़ की हड्डी से जुड़ी एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें रीढ़ असमान्य तरीके से एक तरफ झुकने या मुड़ने लगती है। यह समस्या अक्सर बच्चों के तेजी से बढ़ने की उम्र यानी 10-15 साल के बीच विकसित होती है।

इस समस्या की सबसे खतरनाक बात यह है कि शुरुआती स्टेज में आसानी से पकड़ में नहीं आती। शुरुआत में इसके कोई साफ लक्षण भी नहीं होते और रीढ़ की हड्डी में यह घुमाव काफी धीमी गति से बढ़ता है। इसलिए शुरुआत में बच्चे को रोजमर्रा की जिंदगी में कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

इन छोटे-छोटे बदलावों पर रखें नजर

अक्सर बच्चे के शरीर में होने वाले कुछ बदलावों को माता-पिता नजरअंदाज कर देते हैं, जिसकी वजह से यह समस्या बढ़ जाती है।

  • बच्चे का एक कंधा दूसरे कंधे के मुकाबले थोड़ा ऊपर दिखाई देना।
  • स्कूल यूनिफॉर्म का शरीर पर दोनों तरफ से बराबर या फिट न बैठना।
  • पीठ पर लटकाया हुआ स्कूल बैग बार-बार एक ही कंधे से नीचे सरकना।

इन संकेतों को अक्सर पेरेंट्स बच्चे के खराब बॉडी पोस्चर या झुककर बैठने की आदत का नतीजा मान लेते हैं, लेकिन असल में ये स्कोलियोसिस का संकेत होते हैं।

क्यों होता है स्कोलियोसिस?

कई लोग मान लेते हैं कि यह झुककर बैठने या भारी स्कूल बैग उठाने की वजह से होता है, लेकिन यह पूरी तरह गलत है। इस समस्या का अभी तक कोई ठोस कारण पता नहीं चला है, लेकिन इसके पीछे जेनेटिक्स की भूमिका हो सकती है।

यह बीमारी लड़कों और लड़कियों दोनों में विकसित हो सकती है, लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक लड़कियों में, खासकर प्यूबर्टी के आसपास, इसका जोखिम कहीं ज्यादा होता है।

इलाज और समय पर जागरूकता है जरूरी

राहत की बात यह है कि स्कोलियोसिस से पीड़ित ज्यादातर बच्चों को सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती है। ज्यादातर मामले काफी हल्के होते हैं, जिन्हें डॉक्टर से नियमित जांच कराने, फिजियोथेरेपी और स्कोलियोसिस के लिए स्पेशल एक्सरसाइज के जरिए ठीक किया जा सकता है। इसका इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि रीढ़ की हड्डी का घुमाव कितना गंभीर है और बच्चे की उम्र और शारीरिक विकास अभी कितना बचा हुआ है।

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