आज की डिजिटल दुनिया में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा बन गया है। सुबह उठकर नोटिफिकेशन देखने से लेकर रात को सोने से पहले सोशल मीडिया स्क्रॉल करने तक, हमारी नजरें स्क्रीन पर ही टिकी रहती हैं।
हालांकि, क्या आप जानते हैं कि आपकी यह आदत आपके शरीर को धीरे-धीरे कितना नुकसान पहुंचा रही है? जी हां, पीएसआरआई अस्पताल, दिल्ली के हेड फिजियोथेरेपी, लक्ष्य भक्तियानी के मुताबिक, गलत तरीके से फोन के इस्तेमाल के कारण आजकल दो नई समस्याएं तेजी से फैल रही हैं- “टेक्स्ट नेक सिंड्रोम” और “पिंकी फिंगर सिंड्रोम”।
क्यों होता है ‘टेक्स्ट नेक सिंड्रोम’?
यह समस्या तब शुरू होती है जब हम अपना सिर नीचे झुकाकर लगातार फोन चलाते हैं। सामान्य तौर पर हमारे सिर का वजन 4 से 5 किलो होता है, लेकिन जब हम स्क्रीन देखने के लिए अपनी गर्दन झुकाते हैं, तो हमारी गर्दन पर यह दबाव कई गुना बढ़कर 20 से 25 किलो तक पहुंच जाता है।
इस भारी दबाव की वजह से गर्दन में जकड़न, दर्द, सिरदर्द और यहां तक कि रीढ़ की हड्डी पर भी बुरा असर पड़ता है। अगर आप अपनी इस आदत को नहीं सुधारते, तो भविष्य में यह साधारण दर्द एक गंभीर ‘क्रॉनिक पेन’ में बदल सकता है।
क्या है ‘पिंकी फिंगर सिंड्रोम’?
अक्सर हम एक हाथ से फोन चलाते समय मोबाइल का पूरा वजन अपनी सबसे छोटी उंगली यानी पिंकी फिंगर पर टिका देते हैं। लंबे समय तक ऐसा करने से उंगली में सुन्नपन, दर्द या हल्का टेढ़ापन आ सकता है। कुछ मामलों में यह हाथ की नसों और मांसपेशियों पर भी गहरा दबाव डालता है, जिससे काफी असहजता महसूस होती है।
क्या है इन समस्याओं की मुख्य वजह?
इन दोनों समस्याओं का सबसे बड़ा कारण है- लगातार गलत पोश्चर में फोन का इस्तेमाल करना। बिना कोई ब्रेक लिए घंटों तक एक ही पोजीशन में बैठकर स्क्रीन देखना शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक है। खासकर युवाओं और नौकरीपेशा लोगों में यह समस्या सबसे ज्यादा देखी जा रही है, क्योंकि उनका ‘स्क्रीन टाइम’ सामान्य से काफी ज्यादा होता है।
बचाव के आसान और असरदार तरीके
इन समस्याओं से बचने के लिए आपको अपनी आदतों में कुछ छोटे बदलाव करने होंगे:
- फोन को आंखों के सामने रखें: कोशिश करें कि फोन चलाते समय आपकी गर्दन ज्यादा न झुके। फोन को हमेशा अपने आई-लेवल पर रखकर इस्तेमाल करें।
- छोटे ब्रेक और स्ट्रेचिंग: घंटों तक लगातार फोन न चलाएं। हर 20 से 30 मिनट में एक छोटा ब्रेक लें और अपनी गर्दन व कंधों की हल्की स्ट्रेचिंग करें।
- फोन पकड़ने का तरीका बदलें: मोबाइल का पूरा वजन अपनी छोटी उंगली पर न डालें। फोन पकड़ने के लिए अपने दोनों हाथों का इस्तेमाल करें या ‘फोन होल्डर’ की मदद लें।
- अपनाएं डिजिटल डिटॉक्स: सबसे जरूरी है कि आप अपना स्क्रीन टाइम कम करें और ‘डिजिटल डिटॉक्स’ को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
