आपका बच्चा भी तो नहीं हो रहा स्कूल बुलिंग का शिकार? पेरेंट्स बिल्कुल भी इग्नोर न करें ये 7 संकेत

 स्कूल बुलिंग का असर बच्चे की शारीरिक और मानसिक सेहत पर पड़ता है। इसलिए पेरेंट्स के लिए जरूरी है कि वे इस ओर ध्यान दें कि कहीं उनका बच्चा स्कूल में बुली तो नहीं हो रहा।

इस बात का पता लगाने के लिए बच्चों से सही तरीके से बात करना और उन्हें सपोर्ट करना जरूरी है। आइए जानें आप कैसे पता लगा सकते हैं कि आपका बच्चा स्कूल में बुली हो रहा है और इसे रोकने के लिए आप क्या कर सकते हैं।

क्या है स्कूल बुलिंग की डेफिनेशन?

यूनेस्को के मुताबिक, स्कूल बुलिंग एक ऐसी हानिकारक सामाजिक प्रक्रिया है जिसमें ताकत का असंतुलन साफ दिखाई देता है। यह अक्सर दोहराया जाने वाला अवांछनीय व्यवहार है, जो छात्रों या स्कूल कर्मियों के बीच शारीरिक, सामाजिक और भावनात्मक नुकसान पहुंचाता है।

आज के दौर में यह केवल स्कूल के मैदान तक सीमित नहीं है; साइबर बुलिंग के रूप में यह इंटरनेट के जरिए बच्चे तक कहीं भी और कभी भी पहुंच सकती है, जिससे उनकी मानसिक सेहत को गहरा नुकसान पहुंचता है।

बच्चों में बुलिंग के संकेत

कई बार बच्चे अपनी परेशानी बोलकर नहीं बता पाते, लेकिन एक जागरूक पेरेंट होने के तौर पर आपको इन लक्षणों पर गौर करना चाहिए-

  • शारीरिक संकेत- शरीर पर बिना किसी कारण के चोट, खरोंच या घाव के निशान मिलना।
  • इमोशनल बदलाव- बच्चा अचानक बहुत ज्यादा अलर्ट, घबराया हुआ या परेशान रहने लगे। गुस्सा आना या चिड़चिड़ा व्यवहार भी एक संकेत हो सकता है।
  • स्कूल से दूरी- स्कूल जाने या स्कूल के फंक्शन में शामिल होने से डरना, बार-बार सिरदर्द या पेट दर्द का बहाना बनाकर घर वापस बुलाने की जिद करना।
  • सामाजिक अलगाव- अचानक दोस्तों से मिलना बंद कर देना, सामाजिक स्थितियों से बचना या हमेशा बड़ों के आसपास रहने की कोशिश करना।
  • नींद और पढ़ाई- ठीक से नींद न आना, डरावने सपने देखना और पढ़ाई के प्रदर्शन में अचानक गिरावट आना।
  • सामान का नुकसान- कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स या पर्सनल सामान का बार-बार खो जाना या टूट जाना।
  • ऑनलाइन व्यवहार- फोन या इंटरनेट इस्तेमाल करने के बाद परेशान दिखना या अपनी ऑनलाइन एक्टिविटीज को लेकर बहुत सीक्रेटिव होना।

    बुलिंग रोकने के लिए आप क्या कर सकते हैं?

    • बुलिंग के बारे में बताएं- जब बच्चे समझ जाएंगे कि बुलिंग क्या है, तो वे इसे आसानी से पहचान पाएंगे, चाहे वह उनके साथ हो रही हो या किसी और के साथ।
    • खुलकर और बार-बार बात करें- अपने बच्चों से रोज बात करें। केवल उनकी पढ़ाई के बारे में ही नहीं, बल्कि उनके अनुभवों और भावनाओं के बारे में भी पूछें। जितना ज्यादा आप उनसे बात करेंगे, वे अपनी समस्याएं शेयर करने में उतने ही कम्फर्टेबल महसूस करेंगे।
    • आत्मविश्वास बढ़ाएं- बच्चे को उनकी पसंद की एक्टिविटीज या क्लासेज में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करें। इससे न केवल उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि उन्हें एक जैसी हॉबीज वाले दोस्त भी मिलेंगे।
    • बच्चे को एक पॉजिटिव रोल मॉडल बनाएं- अपने बच्चों को सिखाएं कि दूसरे बच्चों से कैसे व्यवहार करें और बुलिंग के खिलाफ कैसे आवाज उठा सकते हैं।
    • उनकी ऑनलाइन दुनिया का हिस्सा बनें- बच्चा किन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर रहा है, उनसे परिचित हों। उन्हें समझाएं कि ऑनलाइन और ऑफलाइन दुनिया आपस में जुड़ी हुई है और उन्हें डिजिटल दुनिया के जोखिमों के बारे में आगाह करें।
    • खुद उदाहरण बनें- बच्चे अपने माता-पिता को देखकर सीखते हैं। दूसरों को सम्मान दें और जब किसी के साथ गलत हो रहा हो, तो आवाज उठाएं। इंटरनेट पर आपकी पोस्ट और व्यवहार भी उनके लिए एक उदाहरण होता है।

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