आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम सूरज की रोशनी से दूर होते जा रहे हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक खास तरह की रोशनी हमारे शरीर के लिए किसी वरदान से कम नहीं है?
कभी फ्रींज मानी जाने वाली रेड लाइट थेरेपी आज चिकित्सा जगत में तहलका मचा रही है। साल 2030 तक इसका वैश्विक बाजार 9 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा होने का अनुमान है।
एक पिता का विश्वास और चमत्कारिक रिकवरी
इस थेरेपी की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे एक सच्ची और भावुक कर देने वाली कहानी है। साल 2021 में मशहूर डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. डेविड ओजोग के 18 वर्षीय बेटे को स्ट्रोक आया। उस वक्त हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक सहकर्मी ने उन्हें बेटे के सिर पर ‘रेड और नियर-इंफ्रारेड लाइट’ इस्तेमाल करने की सलाह दी।
शुरुआत में डॉ. ओजोग को यह मजाक लगा, लेकिन इसके नतीजों ने सबको हैरान कर दिया। आज उनका बेटा न केवल चलने-फिरने में सक्षम है, बल्कि अपनी यूनिवर्सिटी की पढ़ाई पर भी लौट आया है।
आखिर क्या है रेड लाइट थेरेपी?
वैज्ञानिक भाषा में इसे फोटोबायोमॉड्यूलेशन कहा जाता है। इसमें 600 से 1100 नैनोमीटर की वेवलेंथ वाली लाल और नियर-इंफ्रारेड रोशनी का इस्तेमाल होता है, जो असल में सूरज की रोशनी का ही एक हिस्सा है। इसे एलईडी पैनल, खास मास्क या लेजर डिवाइस के जरिए शरीर पर डाला जाता है।
इसकी खोज भी बड़ी दिलचस्प है। 1960 के दशक में हंगरी के वैज्ञानिकों ने पाया कि लाल रोशनी चूहों के बाल उगाने में मदद करती है। वहीं, 1990 के दशक में नासा के वैज्ञानिकों ने गौर किया कि अंतरिक्ष में पौधों को उगाने वाली रेड एलईडी लाइट से इंसानों के घाव भी तेजी से भर रहे हैं।
शरीर के अंदर कैसे काम करती है यह रोशनी?
हमारे शरीर की हर सेल में माइटोकॉन्ड्रिया होता है, जिसे सेल्स का पावरहाउस कहा जाता है क्योंकि यह एनर्जी बनाता है। जब लाल रोशनी त्वचा के अंदर तक पहुंचती है, तो सेल्स इसे सोख लेती हैं। इससे माइटोकॉन्ड्रिया ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं और शरीर में एनर्जी बनने की प्रक्रिया तेज हो जाती है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि आधुनिक समय में हम ज्यादातर वक्त घरों के अंदर बिताते हैं, जहां की आर्टिफिशियल लाइट का स्पेक्ट्रम बहुत संकरा होता है। डॉ. ओजोग के अनुसार, हम जैविक रूप से उस नेचुरल रेड लाइट के लिए बने हैं, जिससे आज हम वंचित हो रहे हैं।
कई बीमारियों में है कारगर
रेड लाइट थेरेपी केवल घाव भरने तक सीमित नहीं है। इसके फायदे कई क्षेत्रों में देखे जा रहे हैं, जैसे-
- त्वचा और बाल- यह बालों के झड़ने को रोकने और रेडिएशन के कारण होने वाली त्वचा की सूजन को कम करने में असरदार है।
- पेन रिलीफ- नसों का दर्द और पैरों के अल्सर को ठीक करने में यह काफी मददगार साबित हुई है।
- मेंटल हेल्थ और नर्वस सिस्टम- डिप्रेशन और उम्र के साथ कमजोर होती आंखों की रोशनी में भी इसके पॉजिटिव रिजल्ट मिले हैं।
- पार्किंसंस का इलाज- वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि यह थेरेपी पार्किंसंस रोग में डोपामाइन बनाने वाले न्यूरॉन्स को बचाने में भी कारगर हो सकती है।
