शरद पवार को राज्यसभा भेजने के लिए महाविकास आघाड़ी में ही खींचतान शुरू, आदित्य ठाकरे ने शिवसेना (UBT) के लिए मांगी सीट

 महाराष्ट्र में अगले माह होनेवाले राज्यसभा की सात सीटों के चुनाव में इन दिनों ‘एक अनार तीन बीमार’ की स्थिति दिखाई दे रही है। प्रदेश के तीन विपक्षी दलों के हिस्से में सिर्फ एक राज्यसभा सीट आ रही है, और उसके लिए नाम चलने लगा है वरिष्ठ नेता शरद पवार का। इसे लेकर कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और राकांपा (शरदचंद्र पवार) में खींचतान साफ दिखाई दे रही है।

अप्रैल में महाराष्ट्र से राज्यसभा के सात सदस्य सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इनमें भाजपा के दो – डा.भागवत कराड और धैर्यशील पाटिल, राकांपा (शरदचंद्र पवार) दो – शरद पवार और फौजिया खान, शिवसेना (यूबीटी) से एक प्रियंका चतुर्वेदी, कांग्रेस से एक रजनी पाटिल और आरपीआई से एक रामदास आठवले शामिल हैं।

महायुति के पक्ष में संख्याबल

इस गणित के अनुसार वर्तमान में विपक्षी दलों के गठबंधन महाविकास आघाड़ी के खाते की चार सीटें खाली हो रही हैं, और भाजपानीत महायुति के खाते की तीन। राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव विधानसभा सदस्यों द्वारा किया जाना है। वर्तमान में संख्या बल महायुति के पक्ष में है। भाजपा, शिवसेना (शिंदे) और राकांपा (सुनेत्रा पवार) और कुछ सहयोगी दलों को मिलाकर 235 सदस्य हैं।

जबकि विपक्षी महाविकास आघाड़ी में कांग्रेस, राकांपा (शरदचंद्र पवार) एवं शिवसेना (यूबीटी) को मिलाकर कुल 46 सदस्य हैं। 288 सदस्योंवाली विधानसभा में भाजपा के शिवाजीराव कर्डिले एवं राकांपा के अजीत पवार के निधन के बाद हुई 286 की सदस्य संख्या के आधार पर राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए प्रथम वरीयता के 41 मतों की आवश्यकता होगी।

इस गणित के आधार पर महाविकास आघाड़ी सिर्फ एक सीट आसानी से जीत सकती है, और महायुति पांच सीटें। महायुति को छठवीं सीट जीतने के लिए कम से कम 11 अतिरिक्त मतों की आवश्यकता होगी। जबकि महाविकास आघाड़ी को दूसरी सीट जीतने के लिए 36 अतिरिक्त मत चाहिए। बात यहीं फंस रही है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दावा किया है कि उनके पास महायुति की छह सीटें जीतने की क्षमता है। जबकि दूसरी महाविकास आघाड़ी अपनी एक सुनिश्चित सीट के लिए उम्मीदवार के नाम पर ही माथापच्ची करती दिख रही है। मविआ की ओर से एक बड़ा नाम राकांपा (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार का भी उछल रहा है।

लेकिन महाविकास आघाड़ी में ही शरद पवा को लेकर अभी एकमत नहीं बन पा रहा है। मविआ के तीन दलों में शिवसेना (यूबीटी) में भी एकमत नहीं है। एक ओर उसके प्रवक्ता संजय राउत कह रहे हैं कि शरद पवार के 60 वर्षों के विधायी अनुभव को देखते हुए उन्हें राज्यसभा में होना ही चाहिए।

कांग्रेस है सशंकित

राउत के अनुसार उन्होंने शरद पवार से बात की है। वह पुनः राज्यसभा में जाने के लिए सकारात्मक हैं। वहीं शिवसेना (यूबीटी) के युवा नेता आदित्य ठाकरे ने कहा है कि चूंकि मविआ में उनकी पार्टी के विधायकों की संख्या 20 एवं राकांपा(शरदचंद्र पवार) के सदस्यों की संख्या 10 है। इसलिए मविआ कोटे से मिलनेवाली एक सीट शिवसेना (यूबीटी) को मिलनी चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *