भारत और अमेरिका के बीच हुए नए ट्रेड समझौते को लेकर वैश्विक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। अमेरिकी प्रशासन ने इसे ऐतिहासिक बताते हुए कहा है कि इस डील से अमेरिकी उत्पादों के लिए भारतीय बाजार में पहुंच आसान होगी। वहीं, इस समझौते के बाद टैरिफ संरचना, कृषि सेक्टर, इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स और ऊर्जा नीति जैसे कई मुद्दे चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।
अमेरिकी पक्ष के मुताबिक, इस समझौते के तहत टैरिफ दरों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। पहले लगाए गए उच्च रेसिप्रोकल टैरिफ को कम करने पर सहमति बनी है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस डील के तहत भारत अमेरिकी इंडस्ट्रियल गुड्स और कई कृषि उत्पादों पर टैरिफ घटाने या खत्म करने पर सहमत हुआ है, जिससे अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत में प्रतिस्पर्धा आसान हो सकती है।
आर्थिक विश्लेषण के अनुसार, इस समझौते के बाद भारत द्वारा अमेरिका से आयात होने वाले कृषि उत्पादों के लगभग 60-70 प्रतिशत हिस्से पर कम या शून्य टैरिफ लागू हो सकता है। इससे अमेरिका के कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो सकते हैं और द्विपक्षीय व्यापार संबंध मजबूत होने की संभावना है।
हालांकि, इस समझौते को लेकर भारत में विरोध भी देखने को मिल रहा है। किसान संगठनों और विपक्षी दलों ने इसे लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अमेरिकी कृषि उत्पादों को ज्यादा एक्सेस मिलने से भारतीय किसानों को नुकसान हो सकता है। किसान संगठनों ने आशंका जताई है कि इससे घरेलू कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है और ग्रामीण आय प्रभावित हो सकती है।
इस समझौते के तहत कुछ सेक्टर-स्पेसिफिक रियायतें भी शामिल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऑटो सेक्टर में कोटा आधारित ड्यूटी कटौती और कुछ अन्य सेक्टर में टैरिफ रियायत देने पर सहमति बनी है। इसके अलावा डिजिटल ट्रेड और इंडस्ट्रियल सहयोग जैसे नए क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच साझेदारी बढ़ाने की दिशा तय की गई है।
ऊर्जा सेक्टर भी इस डील के बाद चर्चा में है। अमेरिका ने पहले रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर दबाव बनाया था। हालांकि भारत की ओर से आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट किया गया है कि ऊर्जा खरीद से जुड़े फैसले राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर ही लिए जाएंगे।
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर अतिरिक्त टैरिफ हटाने का फैसला तब लिया, जब भारत ने रूसी तेल खरीद कम करने को लेकर संकेत दिए। हालांकि इस मुद्दे पर दोनों देशों की आधिकारिक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं बताई गई है।
कुल मिलाकर यह ट्रेड डील दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई दिशा दे सकती है। जहां अमेरिका को भारत जैसे बड़े बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी, वहीं भारत को निर्यात और इंडस्ट्रियल सहयोग के नए अवसर मिल सकते हैं। लेकिन कृषि, ऊर्जा और घरेलू उद्योग पर इसके असर को लेकर राजनीतिक और आर्थिक बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है।
