प्यार या खर्चा? डेटिंग का बढ़ता फाइनेंशियल प्रेशर

वैलेंटाइन सीजन और मॉडर्न डेटिंग कल्चर के दौर में रिश्तों के साथ-साथ खर्चों की चर्चा भी तेज हो गई है। आज के समय में ‘मिंगल’ होने की इच्छा रखने वाले युवाओं के सामने सिर्फ इमोशनल ही नहीं बल्कि फाइनेंशियल चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। रिलेशनशिप को लेकर जहां भावनाएं अहम भूमिका निभाती हैं, वहीं इसका असर सीधे जेब पर भी पड़ता है।

अक्सर यह माना जाता है कि प्यार में सबसे ज्यादा दिल टूटता है, लेकिन बदलते लाइफस्टाइल में एक नई सच्चाई सामने आई है — कई बार प्यार के साथ बैंक बैलेंस भी तेजी से कम होने लगता है। खासकर शहरी लाइफस्टाइल और सोशल मीडिया से प्रभावित डेटिंग ट्रेंड्स ने रिलेशनशिप को काफी महंगा बना दिया है।

फिल्मों और वेब सीरीज में दिखाया जाने वाला रोमांस लोगों को आकर्षित जरूर करता है, लेकिन असल जिंदगी की डेटिंग उससे काफी अलग होती है। उदाहरण के तौर पर, मेट्रो सिटी या बड़े शहरों में एक सामान्य कॉफी डेट का खर्च ही 400 से 800 रुपये तक पहुंच जाता है। अगर इसमें ट्रैवल, गिफ्ट और आउटिंग का खर्च जोड़ दिया जाए, तो एक डेट का बजट आसानी से 1500 से 3000 रुपये तक जा सकता है।

डेटिंग एक्सपर्ट्स का मानना है कि आज रिलेशनशिप में ‘इम्प्रेशन खर्च’ का दबाव भी बढ़ गया है। अच्छा रेस्टोरेंट, ब्रांडेड गिफ्ट, सरप्राइज प्लान और सोशल मीडिया पर परफेक्ट रिलेशनशिप दिखाने की होड़ खर्च बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रही है।

कई युवाओं का अनुभव है कि महीने की शुरुआत में डेटिंग और आउटिंग पर खर्च करने के बाद महीने के आखिर तक बजट मैनेज करना मुश्किल हो जाता है। मजाक में कहा जाने वाला “25 तारीख तक जेब खाली” वाला ट्रेंड अब कई लोगों के लिए हकीकत बनता जा रहा है।

हालांकि एक्सपर्ट्स यह भी सलाह देते हैं कि रिलेशनशिप को केवल खर्च से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। मजबूत रिश्ते महंगे गिफ्ट या बार-बार आउटिंग पर नहीं, बल्कि समझ और इमोशनल कनेक्शन पर टिके होते हैं। बजट फ्रेंडली डेट, ओपन कम्युनिकेशन और फाइनेंशियल प्लानिंग रिश्तों को स्वस्थ बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।

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