यूपी एक्सप्रेसवे पर कार में कपल का निजी पल रिकॉर्ड होने और वीडियो वायरल होने के मामले में पुलिस जांच अब नए मोड़ पर पहुँच गई है। एंटी ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) के पूर्व मैनेजर आशुतोष सरकार ने पूछताछ में चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने कहा है कि पिछले ढाई साल में ऐसे हजारों मामले कैमरों में रिकॉर्ड हुए हैं और कई बार कर्मचारियों द्वारा इनका गलत इस्तेमाल भी किया गया है।
वीडियो टोल के पूर्व कर्मचारी ने बाहर भेजा
पुलिस के अनुसार आशुतोष ने माना कि वायरल हुआ वीडियो ATMS सिस्टम से आधिकारिक रूप से लीक नहीं हुआ, बल्कि टोल पर काम कर चुका एक पूर्व कर्मचारी इसे एक ड्राइवर को देकर गया, जिसके बाद वीडियो सोशल मीडिया पर फैल गया।
जांच में यह भी सामने आया है कि सर्विलांस रूम में कई ऑपरेटरों के पास फुटेज देखने की सुविधा थी और कई बार निजी रिकार्डिंग भी स्क्रीन रिकॉर्डिंग के जरिए सेव की जाती थी।
टर्मिनेशन लेटर पर सवाल—बैकडेट में कार्रवाई दिखाने का आरोप
मामले के सामने आने के बाद ठेका कंपनी ने डिप्टी मैनेजर आशुतोष सरकार को हटाने की घोषणा की, लेकिन टर्मिनेशन लेटर में तारीख 30 नवंबर 2025 दर्ज की गई है, जबकि पीड़ितों ने शिकायत 2 दिसंबर को की थी।
इससे कंपनी की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या जांच और FIR से बचने के लिए टर्मिनेशन को जानबूझकर बैकडेट में जारी किया गया।
पीड़ितों ने CM योगी, DM और SP से की शिकायत
वीडियो वायरल होने से परेशान पीड़ित कपल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, सुल्तानपुर के DM और SP को शिकायत भेजकर कहा कि उनकी निजता का गंभीर उल्लंघन हुआ है।
शिकायत में यह भी कहा गया कि एक्सप्रेसवे पर लगे कैमरों के माध्यम से रिकॉर्ड की गई निजी फुटेज को मनोरंजन या वायरल कंटेंट की तरह इस्तेमाल करना पूरी तरह अपराध है।
ढाई साल में हजारों निजी फुटेज रिकॉर्ड होने की पुष्टि
आशुतोष सरकार ने बताया कि—
एक्सप्रेसवे पर लगे हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे हर वाहन की गतिविधि रिकॉर्ड करते हैं
कई मामलों में कारों के अंदर की गतिविधियां भी स्पष्ट रिकॉर्ड हो जाती हैं
ढाई साल में 1000 से अधिक निजी फुटेज रिकॉर्ड हुईं
कुछ कर्मचारियों द्वारा इनका दुरुपयोग भी हुआ
यह खुलासा सिस्टम की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
BNS की धाराएं लागू—निजता उल्लंघन पर कड़ी सजा संभव
पुलिस ने पुराने IPC की जगह अब Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) की धाराएं लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है।
इस प्रकरण में निम्न धाराएँ लागू हो सकती हैं:
BNS धारा 73 (Voyeurism / निजता का उल्लंघन):
किसी व्यक्ति की निजी गतिविधि को उसकी अनुमति के बिना रिकॉर्ड या साझा करना अपराध है। सजा 3 से 7 साल तक हो सकती है।
BNS धारा 67 (Unauthorized Use of Images / छवि के दुरुपयोग):
किसी की फोटो/वीडियो का बिना सहमति उपयोग अपराध है।
BNS धारा 315 (Cyber Offences related to Personal Data):
डिजिटल डेटा का दुरुपयोग, लीक या वितरण।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला पूरी तरह से BNS के तहत कठोर दंड के दायरे में आता है।
ATMS सिस्टम, सर्वर और कर्मचारियों की भूमिका की जांच तेज
SP की अगुवाई में बनी टीम अब—
सर्वर एक्सेस,
लॉगइन रिकॉर्ड,
स्क्रीन रिकॉर्डिंग,
और कर्मचारियों की भूमिका
की गहराई से जांच कर रही है।
पुलिस यह भी पता लगा रही है कि कहीं यह कोई बड़ा नेटवर्क तो नहीं, जो वीडियो को गलत तरीके से बाहर भेजता था।
सिस्टम की सुरक्षा पर बड़े सवाल
यह पूरा मामला एक्सप्रेसवे के निगरानी सिस्टम की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता खड़ी करता है।
ढाई साल में हजारों निजी वीडियो रिकॉर्ड होना और उनका दुरुपयोग होना यह संकेत देता है कि सिस्टम की मॉनिटरिंग ढीली थी और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर्याप्त नहीं थे।
यूपी एक्सप्रेसवे कपल वीडियो मामला: ATMS सिस्टम में बड़ा खुलासा, पूर्व मैनेजर के बयान से हड़कंप — ढाई साल में हजारों निजी फुटेज रिकॉर्ड
