‘सालों के बजाय महीनों में बदल जाएगा माहौल’, AI को लेकर Five Eyes की बड़ी चेतावनी

 इंटेलिजेंस अलायंस फाइव आइज ने एक अनोखी चेतावनी जारी की है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की अगली जेनरेशन सालों के बजाय कुछ ही महीनों में साइबर सिक्योरिटी के माहौल को पूरी तरह से बदल सकती है और सरकारों, बिजनेस और कॉर्पोरेट लीडर्स से साइबर रेजिलिएंस को तुरंत प्रायोरिटी देने की अपील की है।

यह चेतावनी ‘फाइव आइज इंटेलिजेंस ओवरसाइट एंड रिव्यू काउंसिल’ (FIORC) के एक संयुक्त बयान में दी गई। यह काउंसिल ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका की इंटेलिजेंस और सुरक्षा एजेंसियों का एक समूह है।

किसी खास कंपनी या मॉडल का नहीं लिया नाम

यह बयान तब जारी किया गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के प्रशासन ने टेक्नोलॉजी कंपनी ‘एन्थ्रोपिक’ (Anthropic) द्वारा विकसित दो एडवांस्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम तक विदेशी नागरिकों की पहुंच को सीमित करने का कदम उठाया। इस महीने की शुरुआत में घोषित यह फैसला अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों की सलाह के बाद लिया गया।

किसी खास कंपनी या मॉडल का नाम लिए बिना फाइव आइज के बयान में चेतावनी दी गई कि ‘फ्रंटियर AI सिस्टम’ से मौजूदा इंडस्ट्री की उम्मीदों से कहीं आगे निकलने और आक्रामक व रक्षात्मक, दोनों तरह की साइबर क्षमताओं में बड़े बदलाव लाने की उम्मीद है।

बयान में क्या कहा गया?

बयान में कहा गया है, “हालांकि AI समय के साथ साइबर सुरक्षा को बेहतर बनाने में हमारी मदद करेगा, लेकिन यह साइबर खतरों की रफ्तार, दायरे और जटिलता को भी बढ़ा देता है। उम्मीद है कि ‘फ्रंटियर AI मॉडल’ इंडस्ट्री की मौजूदा उम्मीदों से कहीं आगे निकल जाएंगे और साइबर हमले और बचाव, दोनों ही क्षमताओं में बुनियादी बदलाव लाएंगे। इसमें सालों नहीं, बल्कि महीनों का समय लगेगा।”

इस ग्रुप ने कहा कि बिजनेस, बाजार के भरोसे और लंबे समय तक आर्थिक वैल्यू बनाए रखने के लिए साइबर रेजिलिएंस (साइबर हमलों से उबरने की क्षमता) बहुत जरूरी हो गई है। इसने लीडर्स से कहा कि वे जोखिमों और जवाबदेही का आकलन करें, मुख्य साइबर सिक्योरिटी कंट्रोल को प्राथमिकता दें, साइबर सिक्योरिटी टीमों को पर्याप्त अधिकार और संसाधन दें और खतरों के बदलते स्वरूप के साथ सक्रिय रूप से जुड़े रहें।

बयान में कहा गया, “जरूरत साफ है। AI भविष्य की कोई चीज नहीं है, यह पहले से ही मौजूद है।” फाइव आइज के बयान के मुताबिक, AI किसी कमजोरी का पता चलने और बुरे इरादे वाले लोगों द्वारा उसका फायदा उठाने के बीच के समय को कम कर रहा है।

‘संगठन और समाज को करना होगा असरदार ढंग से काम’

साथ ही, अधिकारियों ने यह भी माना कि यह टेक्नोलॉजी साइबर सुरक्षा को मजबूत करने में सक्षम शक्तिशाली सुरक्षात्मक उपकरण भी देती है। इसमें कहा गया है, “इसके लिए पूरे संगठन और पूरे समाज की ओर से प्रतिक्रिया की जरूरत है। साइबर जोखिम को अब सिर्फ एक तकनीकी समस्या नहीं माना जा सकता। यह कारोबार का एक मुख्य जोखिम और लीडरशिप की जिम्मेदारी है।”

इस अलायंस ने कंपनियों के बोर्ड और सीनियर अधिकारियों से कहा कि वे यह पक्का करें कि साइबर सुरक्षा के उपाय सिर्फ कागज पर ही न हों, बल्कि असल घटनाओं के समय भी असरदार ढंग से काम कर सकें।

अलायंस का कहना है कि लीडर्स को पुरानी मान्यताओं पर फिर से विचार करना चाहिए और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सोच-समझकर AI का इस्तेमाल करना चाहिए, न कि सिर्फ काम की क्षमता (एफिशिएंसी) बढ़ाने के लिए।

बयान में कहा गया, “फ्रंटियर AI के तेजी से हो रहे विकास का मतलब है कि साइबर जोखिम से जुड़ी धारणाएं सालों में नहीं, बल्कि महीनों में ही पुरानी पड़ सकती हैं। हमें पहले से ही कदम उठाने होंगे और बदलते खतरों के अनुसार खुद को ढालने और उनका सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।”

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