उत्तर प्रदेश की 13 सीटों पर कहां किससे मुकाबला? दिग्‍गजों के सामने साख बचाने की चुनौती; यहां जानिए सियासी गणित

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नई दिल्‍ली

लोकसभा चुनाव के चौथे चरण का मतदान 13 मई यानी आज मतदान हो रहा है। इस चरण में उत्तर प्रदेश की जिन 13 सीटों पर वोटिंग होगी, वे प्रदेश की रीढ़ माने जाने वाले क्षेत्र यानी मध्‍य क्षेत्र में आती हैं। पिछले चुनाव में इन सभी 13 सीटों पर भाजपा ने परचम लहराया था। चौथे चरण में मतदाता सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव समेत यूपी के कई दिग्गजों की किस्‍मत आज ईवीएम में कैद हो जाएगी। कन्नौज में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव खुद मैदान में हैं। कई सांसद जीत की हैट्रिक बनाने के लिए रण में उतरे हैं।

मिश्रिख क्षेत्र से मौजूदा सांसद अशोक रावत को एक बार फिर भाजपा ने अपना प्रत्याशी बनाया है। अशोक रावत 2004 व 2009 में बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर तो 2019 में भाजपा के टिकट पर मिश्रिख संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़े और संसद पहुंचे। इस बार अशोक रावत का मुकाबला सपा प्रत्याशी संगीता राजवंशी व बसपा के प्रत्याशी बीआर अहिरवार से है। यहां का चुनाव केंद्र सरकार की योजनाओं के साथ ही जातीय समीकरण पर केंद्रित रहा है।

सांसद जयप्रकाश को प्रत्याशी बनाकर भाजपा इस सीट पर हैट्रिक लगाने के लिए जोर लगा रही है। जय प्रकाश इस बार जीते तो रिकॉर्ड पांचवीं बार संसद जाएंगे। 1991, 1996 व 2019 में भाजपा और 1999 में लोकतांत्रिक कांग्रेस से सांसद रह चुके जयप्रकाश की नजर रिकार्ड पांचवीं जीत पर है। विपक्ष ने उनकी राह रोकने के लिए कड़ी घेराबंदी की है। उनके सामने तीन बार सांसद रह चुकीं ऊषा वर्मा सपा तो भीमराव अंबेडकर को बसपा ने मैदान में उतारा है।

भाजपा से रेखा वर्मा मैदान में हैं जो पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं और उत्तराखंड की सह प्रभारी भी, लगातार तीसरी बार उनको प्रत्याशी बनाया गया है। उधर, सपा से राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के खास सिपहसालारों में से एक सीतापुर के पूर्व एमएलसी आनंद सिंह भदौरिया मैदान में हैं। बसपा ने यहां पर भाजपा से बगावत करके आए श्याम किशोर अवस्थी को उम्मीदवार बनाया है। जातीय समीकरण हावी होंगे और ब्राह्मण मतदाता निर्णायक होंगे।

इत्र नगरी कन्नौज के सियासी रण में सपा मुखिया अखिलेश यादव के उतरने से चुनावी रंग गाढ़ा हो गया है। यहां अब सीधी लड़ाई अखिलेश और 2019 के लोस चुनाव में उनकी पत्नी डिंपल यादव को हराने वाले भाजपा नेता सुब्रत पाठक के बीच है। बसपा ने भी इमरान बिन जफर को मैदान में उतारकर त्रिकोणीय मुकाबले की जमीन तैयार कर दी है।

मैनपुरी से प्रत्याशी डिंपल यादव के लिए चुनाव प्रचार खत्म करने के बाद अखिलेश यादव कन्नौज पहुंचे थे और स्थानीय नेताओं से मुलाकात की। सुब्रत पाठक से कांटे की टक्कर के आसार देखते हुए अब सपा ने पूरी ताकत झोंक दी है। 10 मई को अखिलेश के समर्थन में राहुल गांधी और आप नेता संजय सिंह रोड शो करने पहुंच रहे हैं।

भाजपा ने तीसरी बार डॉ. सच्चिदानंद हरि साक्षी महाराज को उम्मीदवार बनाया है। वह 2014 और 2019 में यहां से सांसद बन चुके हैं। सपा ने पूर्व सांसद अन्नू टंडन को प्रत्याशी घोषित किया है। वहीं, बसपा ने अशोक पांडेय पर दांव लगाने के साथ ही लगातार चौथी बार अपने काडर के साथ ब्राह्मण फैक्टर का दांव आजमाया है। कांग्रेस से गठबंधन के बाद वोटों के बिखराव की चिंता से सपा फिलहाल खुद को मुक्त पा रही है।

पाल समाज से सपा प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पाल मतदाताओं में खुद को मजबूत स्थिति में पहुंचाने का दावा किया जा रहा है। इधर राष्ट्रवाद, राम मंदिर और सरकारी योजनाओं के अलावा उम्मीदवार के सजातीय वोट बैंक का भाजपा को साथ मिलने का दावा किया जा रहा है।

कानपुर लोकसभा क्षेत्र में केंद्रीय मंत्री अमित शाह, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरों के बाद से फिजा बदली है। यहां भाजपा प्रत्याशी रमेश अवस्थी और कांग्रेस उम्मीदवार आलोक मिश्र के बीच सीधी टक्कर दिख रही है। बसपा के कुलदीप सिंह भदौरिया भी कई क्षेत्रों में उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। इससे मुकाबला दिलचस्प होने के आसार हैं।

राहुल गांधी व अखिलेश यादव की संयुक्त जनसभा या रोड शो की 10 मई को तैयारी है। इसके साथ शिवपाल यादव, डिंपल यादव के आने के आसार हैं। कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी, सलमान खुर्शीद नुक्कड़ सभाएं कर चुके हैं। भाजपा व आईएनडीआईए के दलों के बीच अंतिम दौर की जोर आजमाइश चल रही है।

भाजपा ने सांसद अरुण सागर, सपा ने ज्योत्सना गोंड और बसपा ने दोदराम वर्मा को प्रत्याशी बनाया है। दो चुनाव जीत चुकी भाजपा लगातार तीसरी जीत के लिए जतन कर रही। सपा 2009 के बाद से जीत के इंतजार में है। बसपा यहां जीत का खाता खोलना चाहती है।

शाहजहांपुर सीट को प्रदेश के तीन मंत्रियों की प्रतिष्ठा से भी जोड़ा जा रहा। यही कारण है कि वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना खुद कमान संभाले हैं। लोक निर्माण मंत्री जितिन प्रसाद, सहकारिता राज्यमंत्री जेपीएस राठौर भी इसी जिले के हैं, जोकि अलग क्षेत्रों में पार्टी प्रत्याशी के लिए डटे हैं। सपा प्रत्याशी ज्योत्सना गोंड हरदोई की मूल निवासी हैं। उनके चुनाव की कमान मामा राजपाल कश्यप ने संभाली, जोकि सपा के पूर्व एमएलसी हैं।

अकबरपुर लोकसभा क्षेत्र में भाजपा और सपा के बीच सीधी टक्कर है। भाजपा से वर्तमान सांसद देवेंद्र सिंह भोले तीसरी बार मैदान में हैं, जबकि सपा ने पूर्व सांसद राजाराम पाल पर भरोसा जताया है। भोले को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के रोड शो, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की रणनीति बैठक से मजबूती मिली है।

पहले विरोध में खड़े भाजपा विधायक अभिजीत सिंह सांगा भी उनके साथ आ गए हैं। सपा से मैदान में राजाराम पाल 2009 में यहीं से जीतकर संसद पहुंचे थे। बसपा के राजेश द्विवेदी त्रिकोणात्मक माहौल बना रहे हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की रमईपुर में जनसभा होनी है, जबकि बसपा सुप्रीमो मायावती की जनसभा के बाद तस्वीर और साफ होगी।

भाजपा ने सांसद अक्षयवर लाल गोंड के पुत्र डॉ. आनंद गोंड को उम्मीदवार बनाया है। सपा ने उनके मुकाबले पूर्व विधायक रमेश गौतम को चुनाव मैदान में उतारा है, जबकि बसपा से बिरजेश सोनकर मैदान में हैं। राम मंदिर के साथ मोदी सरकार के कार्यों के चलते लोगों के जेहन में अपना स्थान बनाए हुए हैं।

समाजवादी पार्टी की उम्मीदें मुस्लिम, यादव के अलावा अनुसूचित व पिछड़े वर्ग के मतों में सेंध लगाने पर टिकी हैं। उसे कांग्रेसियों का भी साथ मिल रहा है। बसपा की कोशिश वंचित वर्ग के मतों में सेंध लगाने के साथ मुस्लिमों को अपने पाले में लाने की है। हालांकि, बसपा की यह कोशिश चुनौती पूर्ण दिख रही है। बहरहाल, मुकाबला दिलचस्प है और तस्वीर परिणाम आने पर ही स्पष्ट होगी।

इटावा में भाजपा प्रत्याशी प्रो. रामशंकर कठेरिया के चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरों के बाद चुनावी फिजा में बदलाव आया है। लोग उन मुद्दों पर बहस करने लगे हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने प्रमुखता से उठाया।

सपा के जितेंद्र दोहरे अभी स्थानीय नेताओं के सहारे ही चुनाव प्रचार कर रहे हैं। वहीं, बसपा प्रत्याशी सारिका सिंह बघेल पार्टी के कोर वोटरों के दम पर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने का प्रयास कर रही हैं। भाजपा की हैट्रिक को रोकने के लिए सपा ने पीडीए यानी पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक का फार्मूला अपनाया है। इस सीट पर सर्वाधिक वंचित व पिछड़ा वर्ग के मतदाता हैं।

लखीमपुर सीट पर मुकाबला आमने-सामने का है। भारतीय जनता पार्टी के अजय कुमार मिश्र टेनी केंद्रीय गृह राज्य मंत्री भी हैं। इस बार वह तीसरी बार मैदान में हैं तो दूसरी ओर सपा प्रत्याशी उत्कर्ष वर्मा ताल ठोक रहे हैं। पिछले चार चुनाव से समाजवादी पार्टी यह सीट वापस पाने का प्रयास कर रही है तो दूसरी ओर बहुजन समाज पार्टी ने यहां पर युवा प्रत्याशी अंशय सिंह कालरा को उतारा है।

वह रात-दिन प्रचार कर रहे हैं और सर्व समाज को जोड़ने का दावा करते हुए अपनी जीत सुनिश्चित मान रहे हैं। यहां पर केंद्र सरकार की योजनाओं के साथ ही जातीय समीकरण भी बड़ा फैक्टर बनने वाला है। भाजपा को अपनी योजनाओं पर भरोसा है तो सपा और बसपा के प्रत्याशी भी पूरा दमखम लगाए हुए हैं।

फर्रुखाबाद संसदीय सीट पर राजपूत और ओबीसी समुदाय में लोध व यादव के साथ ही ब्राह्मण मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। भाजपा से दो बार से लगातार सांसद मुकेश राजपूत एक बार फिर चुनाव मैदान में हैं। समाजवादी पार्टी ने इनसे मुकाबले के लिए डॉ. नवल किशोर शाक्य को अपना उम्मीदवार बनाया है।

वहीं, बसपा ने ब्राह्मण चेहरे के रूप में क्रांति पांडेय को चुनावी मैदान में उतारकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, हालांकि चुनावी माहौल में पार्टी अभी रम नहीं पाई है। इस बार यहां केंद्र सरकार की योजनाओं और अनुच्छेद 370 व राम मंदिर निर्माण की चर्चा है। भाजपा के इस दांव से निपटने के लिए समाजवादी पार्टी ने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का नारा दिया है।

यहां भाजपा से राजेश वर्मा, बसपा से महेंद्र सिंह यादव और कांग्रेस से राकेश राठौर उम्मीदवार हैं। तीनों ही प्रत्याशी पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा में थे और इस बार आमने-सामने। राजेश वर्मा चार बार सांसद चुने जा चुके हैं। वह 1999 व 2004 में बसपा और 2014 व 2019 में भाजपा से सांसद चुने गए। उनके सामने इस बार हैट्रिक लगाने की चुनौती है। उन्हें मोदी की गारंटी, भाजपा के परंपरागत मतों का भरोसा है।

कांग्रेस प्रत्याशी राकेश राठौर को अपने सजातीय मतों के साथ ही सपा के यादव-मुस्लिम मत मिलने की उम्मीद है। बसपा प्रत्याशी महेंद्र सिंह यादव पार्टी के वोट बैंक के साथ यादव मतों के ध्रुवीकरण, मुस्लिम, पासी मतदाताओं के भरोसे जीत की उम्मीद जता रहे हैं।

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