आगरा
यूक्रेन युद्ध क्षेत्र में फंसे विद्यार्थियों को लेकर सुखद खबर आने लगी है। कीव और खारकीव में फंसे ज्यादातर विद्यार्थी अब सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचने लगे हैं। जिले के 76 विद्यार्थियों में से 22 की वापसी हो गई हैं। जबकि कुछ ने बार्डर पार कर लिया है। इससे स्वजन को उनकी जल्द ही सुरक्षित घर वापसी की उम्मीद जाग गई है।
शास्त्रीपुरम, ए ब्लाक निवासी अंजली पचौरी अब खारकीव से निकलकर वहां से 14 किमी दूर स्थित सुरक्षित स्थान पर अपने 500 साथी विद्यार्थियों के साथ पहुंच गई हैं। उनके पिता बृजगोपाल पचौरी ने बताया कि बेटी खारकीव के पास स्थित उस गांव में पहुंच गई है, जहां के लिए एडवाइजरी जारी की गई थी। वहां उन्हें किसी एंबेसी के रिसार्ट जैसे गेस्ट हाउस में रोका गया है। सभी को कमरों में रोका गया और उन्हें दोपहर में खाना भी दिया गया। सभी बच्चे रात को आराम से सोए भी थे। हालांकि विद्यार्थियों को यह नहीं पता कि वहां की पूरी व्यवस्था यूक्रेन सरकार ने की है या रूस की तरफ से, लेकिन सुरक्षा और व्यवस्था पूरी है। अब सभी वहां से निकाले जाने का इंतजार कर रहे हैं। वैसे वहां एक मैसेज वायरल हो रहा है कि रूस की तरफ से उन्हें निकालने के लिए बसों की व्यवस्था की जा सकती है, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक सूचना उन्हें नहीं भेजी गई है।
निखिल गार्डन, फेज वन निवासी भाव्या चौहान भी पिछले कई दिनों से खारकीव में फंसी थीं। लेकिन अब अपने कालेज के 100 विद्यार्थियों के साथ वह 14 किमी चलकर सुरक्षित ठिकाने पर पहुंच गई हैं। पिता डा. देवेंद्र चौहान ने बताया कि सभी बच्चों खारकीव से निकलकर सुरक्षित स्थान पर पहुंच गए हैं। यह भारत सरकार की बेहतरीन कूटनीति और राजनीति का ही असर है कि बच्चे इतने मुश्किल हालात से भी सुरक्षित निकलकर आने लगे हैं। सरकार अब भी लगातार कोशिश कर रही हैं, देर लग सकती है, लेकिन उम्मीद है सब सुरक्षित घर लौटेंगे।
बसेरा एंक्लेव, दयालबाग निवासी हर्षा भी पिछले कई दिनों से खारकीव में फंसी थी। उन्होंने हास्टल के बाहर ब्लास्ट होते देखे। पिता सभाजीत ने बताया कि बेटी से संपर्क का माध्यम सिर्फ वीडियो कालिंग ही थी, इसलिए वह उससे कनेक्ट रहते थे। बेटी ने साथियों के साथ बंकर में छुपकर अपनी जान बचाई। दोपहर में खाना लेने निकले एक विद्यार्थी पर फायरिंग भी हुई। इससे हम सभी खौफजदा थे। लेकिन बेटी काफी जिद्दोजहद के बाद 25 विद्यार्थियों के ग्रुप के साथ रेलवे स्टेशन से पोलैंड बार्डर तक जाने वाली ट्रेन में सवार हो गए हैं। हालांकि उसमें चढ़ने के लिए उन्हें काफी धक्कामुक्की और परेशानियां झेलनी पड़ी। उन्हें बाहर खींचा भी जा रहा था। पोलैंड बार्डर पहुंचने पर उम्मीद है कि बेटी अब जल्द ही सुरक्षित घर लौट आएगी।