Manu Bhaker से Vaibhav Suryavanshi को लेकर पूछा सवाल तो मचा बवाल, फैंस बोले- ऐसे नहीं बनते ‘स्पोर्टिंग नेशन’

Manu Bhaker Vaibhav Suryavanshi: भारत में जब भी खेल की बात की जाती है तो सबसे ज्यादा अहमियत क्रिकेट को दी जाती है। वैसे तो इंडिया के स्पोर्टिंग नेशन बनने को लेकर अक्सर चर्चाएं होती रहती हैं, लेकिन सच ये है कि यहां आज भी खेल में सिर्फ क्रिकेट का दबदबा है। उसके अलावा दूसरा कोई खेल देखने में लोग दिलचस्पी नहीं दिखाते।

हाल ही में एक ऐसा मामला सामना आया जहां दो बार की ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट मनु भाकर से एक मीडिया इंटरैक्शन के दौरान उनके खेल या उपलब्धियों के बजाय, युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी पर सवाल पूछा गया, जिससे सोशल मीडिया पर एक बहस छिड़ गई है। कई लोगों ने इसे मनु भाकर की उपलब्धियों के साथ अन्याय बताया है।

Manu Bhaker से वैभव को लेकर पूछा गया सवाल 

दरअसल, भारतीय शूटिंग संघ की 75वीं वर्षगांठ समारोह में मनु भाकर पहुंची थी, जहां शूटिंग लीग ऑफ इंडिया, ग्रासरूट प्रोग्राम और LA 2028 ओलंपिक से जुड़े एथलीट ऐप के अनावरण जैसे मुद्दों पर सवाल पूछे जा रहे थे। इसी दौरान पत्रकारों ने मनु भाकर से युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी पर राय मांगी। इस सवाल का जवाब देते हुए मनु ने कहा,

अगर वैभव सूर्यवंशी को सही मेंटरशिप मिले, उनके आसपास अच्छा माहौल हो और सही लोग मार्गदर्शन करें ,तो उम्र सिर्फ एक नंबर है। मुझे विश्वास है कि वह भारतीय खेलों का अगला बड़ा स्टार बन सकते हैं।”

फैंस भड़के

लेकिन सोशल मीडिया पर मनु भाकर से ऐसा सवाल पूछने की भारी आलोचना हो रही है। यूजर्स का कहना है कि एक ओलंपिक मेडलिस्ट शूटर से शूटिंग कार्यक्रम के दौरान क्रिकेटर से जुड़ा सवाल पूछना बिल्कुल गलत है। किसी दूसरे यूजर ने कहा कि तो इसलिए देश स्पोर्टिंग नेशन नहीं बन पा रहा है। केकेआर के पूर्व टीम डायरेक्टर जय भट्टाचार्या ने भी इस पर नाराजगी जताई और एक्स पर लिखा,

“दोस्तों, वह एक ओलंपिक पदक विजेता हैं। उनसे यह पूछना कि वो वैभव सूर्यवंशी के बारे में क्या सोचती हैं, उनकी उपलब्धियों और उनके खेल के साथ नाइंसाफी है। वैसे भी क्रिकेट देश का सबसे बड़ा जुनून है, आपके खेल संपादकों को सूर्यवंशी पर हेडलाइन बनाने के लिए किसी और सेलिब्रिटी के बयान की जरूरत नहीं है।वैकल्पिक तौर पर, अगली बार वैभव सूर्यवंशी से मनु भाकर के बारे में पूछकर देखिए और देखिए आपको कैसे जवाब मिलते हैं।”ऐसे में ये समझा जा रहा है कि अगर भारत को सही में स्पोर्टिंग नेशन बनना है तो उन्हें सबसे पहले सोच को बदलना होगा। एक शूटर को वही सम्मान मिलना चाहिए जो कि एक क्रिकेटर को मिलता है। एक शूटिंग विश्व कप की चर्चा उतनी होनी चाहिए, जितनी आईपीएल के मैच की होती है।

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