जाब के मोहाली से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां कौमी इंसाफ मोर्चे के संरक्षक और जगतार सिंह हवारा के पिता गुरचरण सिंह को निशाना बनाकर कथित तौर पर एक फर्जी अश्लील वीडियो तैयार किया गया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया। इस घटना के बाद कौमी इंसाफ मोर्चे ने नाराजगी जताई है। मोर्चे का आरोप है कि यह सब संगठन और उससे जुड़े लोगों की छवि खराब करने की कोशिश के तहत किया गया है।
जानकारी के मुताबिक, गुरचरण सिंह ने इस मामले में मोहाली साइबर पुलिस से शिकायत की है। उनका आरोप है कि कुछ अज्ञात लोगों ने AI तकनीक का इस्तेमाल करके उनकी पहचान से जुड़ा आपत्तिजनक वीडियो तैयार किया। इसके बाद वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किया गया, ताकि उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया जा सके।
गुरचरण सिंह ने अपनी शिकायत में फतेहगढ़ साहिब जिले के एक व्यक्ति पर भी संदेह जताया है। उनका कहना है कि उक्त व्यक्ति वर्ष 2022 से उनसे रंजिश रखता है और सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ आपत्तिजनक तथा भ्रामक पोस्ट डालता रहा है। हालांकि, इस व्यक्ति की कथित भूमिका की अभी पुलिस जांच कर रही है।
गुरचरण सिंह ने पुलिस से मांग की है कि फर्जी वीडियो को यूट्यूब सहित सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटवाया जाए। साथ ही, वीडियो बनाने, अपलोड करने और उसे आगे प्रसारित करने वाले लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
गौरतलब है कि गुरचरण सिंह 7 जनवरी 2023 से मोहाली में चल रहे कौमी इंसाफ मोर्चे से जुड़े हुए हैं। यह मोर्चा सजा पूरी कर चुके बंदी सिखों की रिहाई सहित सिख समुदाय से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर अपनी मांगें उठा रहा है। गुरचरण सिंह का आरोप है कि फर्जी वीडियो के जरिए उन्हें और मोर्चे को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मोहाली साइबर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 294, 352 और 356(3) के साथ आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अब वीडियो के डिजिटल स्रोत, सोशल मीडिया अकाउंट और इसे वायरल करने वाले लोगों की पहचान करने में जुटी है। फिलहाल इस मामले में किसी गिरफ्तारी की जानकारी सामने नहीं आई है।
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यह मामला एक बार फिर AI तकनीक के गलत इस्तेमाल और डीपफेक कंटेंट के बढ़ते खतरे को उजागर करता है। किसी व्यक्ति की तस्वीर या पहचान का इस्तेमाल करके फर्जी आपत्तिजनक सामग्री तैयार करना उसकी निजता और प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
अब देखना होगा कि मोहाली साइबर पुलिस इस मामले में वीडियो बनाने और प्रसारित करने वालों तक कब तक पहुंच पाती है।





