Agra University Convocation: आगरा यूनिवर्सिटी का दीक्षा समारोह कुछ ही देर में होगा शुरू, देख सकते हैं लाइव टेलीकास्‍ट, राज्‍यपाल रहेंगी मौजूद

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आगरा

डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के 87वें दीक्षा समारोह कुछ ही देर में शुरू होने जा रहा है। इसमें पहली बार कुलगीत गाया जाएगा। कुल 118743 छात्रों को आज डिग्रियां दी जाएंगी। पहली बार पीएचडी और डीलिट के छात्रों को मंच पर डिग्री दी जाएगी। आवासीय इकाई के छात्रों को भी डिग्रियां समारोह में मिलेंगी। इस बार 169 छात्रों को पदक प्रदान किए जाएंगे, जिसमें सर्वाधिक संख्या छात्राओं की हैं। राज्यपाल दो भवनों और चार आनलाइन कार्यों का लोकार्पण करेंगी। मथुरा के केडी कालेज की प्रिया ने सर्वाधिक स्वर्ण पदक बटोरे हैं।

संस्कृति भवन, छत्रपति शिवाजी मंडपम, वनव्यू साफ्टवेयर, जिओ टैगिंग, डिजी लाकर और काल सेंटर का लोकार्पण राज्यपाल आनंदी बेन पटेल करेंगी।

विश्वविद्यालय के डिजीलाकर में वर्ष 2015 से लेकर 2020 तक की 698857 डिग्रियां और 1185672 अंकतालिकाएं अपलोड कर दी गई हैं। सभी पर कुलपति और परीक्षा नियंत्रक के ई-हस्ताक्षर होंगे। छात्र एक क्लिक पर अपने प्रमाण पत्र देख सकता है और अपने नियोक्ता को आनलाइन दिखा भी सकेगा। अब उसे अपने प्रमाण पत्रों के सत्यापन की आवश्यकता नहीं रहेगी।

95 साल पुराने इस विश्वविद्यालय के 87वें दीक्षा समारोह में पहली बार कुलगीत समारोह में दीप प्रज्जवलन के समय गाया गया। इसे ललित कला संस्थान के संगीत शिक्षक देवाशीष गांगुली ने लिखा है। दो दिन पूर्व इस कुलगीत को विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया था और सुझाव आमंत्रित किए गए थे। कुलगीत पर कोई आपत्ति या सुझाव नहीं प्राप्त हुआ।

अब तक विश्वविद्यालय की वेबसाइट का डोमेन ओआरजी डाट इन था, जो अब एसी डाट इन हो गया है। इस वेबसाइट पर छात्रों को संबद्ध कालेजों और विश्वविद्यालय की गतिविधियों की नवीनतम जानकारी प्राप्त होगी।

दैनिक जागरण के कार्यक्रम प्रश्न पहर में कार्यवाहक कुलपति ने काल सेंटर शुरू करने की घोषणा की थी। यह सेंटर खंदारी परिसर में स्थापित होगा। फिलहाल टू सीटर सेंटर शुरू होगा। इसके स्थापित होने से आगरा और आगरा से बाहर के छात्रों को समस्या दर्ज कराने के लिए विश्वविद्यालय आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। किसी भी प्रकार की जानकारी भी काल सेंटर से प्राप्त हो सकेगी।

पहली बार 2015 से पूर्व के चार्टों का डिजिटाइजेशन शुरू कर दिया गया है। इस प्रक्रिया में सबसे पहले व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के चार्टों को डिजिटाइज किया जाएगा। इसके बाद बीएड के चार्टों का नंबर आएगा। सभी चार्टों का डिजिटाइजेशन पूर्ण होने के बाद किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े की आशंका समाप्त हो जाएगी।

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