आगरा में आटो चालक की मौत पर सवालों के घेरे में पुलिस की कहानी, कई सवाल अनसुलझे

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आगरा

आटो चालक की मौत पर पुलिस की कहानी सवालों के घेरे में है। आटो चालक की पत्नी और बेटी पुलिस की कहानी को फर्जी बता रही हैं। उन्होंने पुलिस की कहानी पर कई सवाल उठाए, जिनके सीधे जवाब पुलिस के पास नहीं हैं। पुलिस अपनी बेगुनाही के साक्ष्य प्रस्तुत कर रही है। पुलिस ने स्वजन को भगवान दास के भागते समय का वीडियो भी दिखाया। मगर, इन्हें स्वजन काफी नहीं मान रहे। उनका आरोप है कि पुलिस के डंडे से ही आटो चालक की मौत हुई है। उनकी कोई सुनवाई नहीं कर रहा है।

सवाल नंबर- एक

क्यों नहीं दी सूचना?

आटो चालक भगवान दास की बड़ी बेटी मुस्कान का कहना है कि अगर उसके पिता की हादसे में मौत हुई थी तो पुलिस ने उन्हें सूचना क्यों नहीं दी। जबकि पिता के पास मोबाइल और ड्राइविंग लाइसेंस भी था। पुलिसकर्मी आसानी से घर सूचना दे सकते थे।

सवाल नंबर- दो

आटो में वर्दी में क्यों नहीं गई पुलिस?

पुलिस की कहानी के मुताबिक, सायरन सुनकर भगवान दास भागे थे। तभी रोड पर गिरने से उनकी मौत हो गई। इस पर बेटी का कहना है कि चीता मोबाइल के सिपाहियों के सामने वे अचेत होकर रोड पर गिर पड़े। इसके बाद भी आटो में वर्दी वाले पुलिसकर्मी क्यों साथ में एसएन इमरजेंसी नहीं गए। जो आटो चालक उसके पिता को ले गया, उसने बताया है कि सादा कपड़ों में एक पुलिसकर्मी आटो में साथ था।

सवाल नंबर- तीन

सीने पर डंडे का निशान कैसे आया

भगवान दास के सीने पर डंडे का निशान है और हाथ पर खरोंच भी हैं। स्वजन ने सवाल उठाया है कि उनके सीने पर डंडे का निशान कैसे आया।

सवाल नंबर- चार

कहां गए जेब में रखे रुपये

मुस्कान का कहना है कि उसके पिता घर से आटो की किस्त जमा करने को रुपये जेब में रखकर लाए थे। ये रुपये उनकी जेब में नहीं मिले हैं। आखिर ये रुपये कहां गए।

सवाल नंबर- पांच

परिवार का बुरा हाल

भगवान दास की चार बेटियां और एक बेटा है। सबसे बड़ी बेटी मुस्कान है। उससे छोटी भूमि, अनन्या, डाली और सबसे छोटा भाई चिराग है। मुस्कान का कहना है कि दादी दिव्यांग हैं। पिता आटो चलाकर परिवार का खर्च उठाते थे। उन्होंने किसी का आटो चलाने को लिया था। उसकी किस्त पिता खुद ही भरते थे। अब पिता की मौत के बाद परिवार में कोई कमाने वाला नहीं बचा है। मौत होने के बाद परिवार का बुरा हाल है।

पुलिस वालों ने उठाकर आटो में रखा

एसएन इमरजेंसी तक भगवान दास को लाने वाले आटो चालक आवास विकास कालोनी निवासी कन्हैंया अग्रवाल थे। उन्होंने बताया कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें बुलाया था। वे जब पहुंचे तो एचडीएफसी बैंक के पास भगवान दास अचेत पड़े थे। कुछ लोग पानी के छींटे मुंह पर मार रहे थे, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं हो रही थी। पुलिसकर्मियों ने उन्हें उठाकर आटो में रख दिया। इसके बाद एक पुलिसकर्मी सादा कपड़ों के उनके साथ आटो में बैठ गया। वर्दी वाले पुलिसकर्मी वहीं रह गए थे।

इमरजेंसी से बस्ती तक सतर्कता

चुनावी समय पर पुलिस ने युवक की मौत के मामले में विशेष सतर्कता बरती। एसपी सिटी विकास कुमार पुलिस फोर्स के साथ एसएन इमरजेंसी पर रहे। पोस्टमार्टम हाउस से लेकर मंडी सईद खां तक पुलिस फोर्स तैनात कर दिया गया। देर रात तक पुलिस अपने बचाव के साक्ष्य जुटाती रही, जिनसे यह साबित हो कि पुलिस इस मामले में निर्दोष है। आटो चालक के साथ बैंक के सामने मैदान में बैठे लोगों को भी पुलिस खोज रही है। पुलिस के पास अभी सिर्फ आटो चालक के भागते समय का वीडियो है।यह पुलिस ने स्वजन को दिखाया है। अभी इसे सार्वजनिक नहीं किया है। पुलिस के पास अभी कोई चश्मदीद नहीं है जो यह बताए कि सायरन सुनकर आटो चालक ने वहां से भागा था।

एमजी रोड पर लगा जाम

एसएन इमरजेंसी पर भीड़ के चलते एमजी रोड पर वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई। इसके बाद जब आटो चालक का शव लेकर स्वजन राजामंडी चौराहा तक पहुंचे तो रोड जाम हो गया। काफी देर तक वाहनों की रफ्तार धीमी रही।

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