आगरा में पहले चरण में मतदान, प्रत्याशियों के कंधों पर ही चुनाव प्रचार का पूरा भार

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आगरा

निर्वाचन आयोग की सख्ती के चलते बहुजन समाज पार्टी (बसपा), समाजवादी पार्टी (सपा)-राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) गठबंधन का चुनाव प्रचार जोर नहीं पकड़ पा रहा है। तीनों ही पार्टियों के शीर्षक नेतृत्व का एक भी कार्यक्रम नहीं लग सका है। ऐसे में इन पार्टियों के प्रत्याशियों के कंधों पर ही चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी है। स्थानीय स्तर के पदाधिकारी ही प्रत्याशी के साथ प्रचार की जिम्मेदारी संभाले हुए हैं।

निर्वाचन आयोग ने 31 जनवरी तक रैलियों और सभाओं पर रोक लगा रखी है। मगर, भाजपा ने चुनाव प्रचार के लिए इसका तोड़ निकाल लिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता गली-गली घूमकर पार्टी के प्रचार के साथ ही प्रत्याशियों के लिए वोट मांग रहे हैं। उपमुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा और केशव प्रसाद मौर्य भी विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में भ्रमण कर प्रचार कर चुके हैं। उनके साथ ही कई मंत्री भी घर-घर जाकर वोट मांग रहे हैं। 2022 के चुनावी रण में भाजपा ने पूरी ताकत झोंक रखी है। पिछले दिनों पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कार्यकर्ताओं के साथ वृहत बैठक कर चुनावी रणनीति को गति दी। मगर, बसपा तथा गठबंधन प्रत्याशी अपने स्तर से ही चुनाव प्रचार में जुटे हैं। बसपा के प्रत्याशी संगठन की टीम के साथ प्रचार कर रहे हैं। दो फरवरी को पार्टी अध्यक्ष मायावती की सभा प्रस्तावित है। मगर, इससे पहले पार्टी का एक भी वरिष्ठ नेता वोट मांगने के लिए मैदान में नहीं उतरा है। यही स्थिति सपा-रालोद गठबंधन की है। इनके प्रत्याशी भी स्थानीय संगठन के साथ प्रचार कर रहे हैं। सपा और रालोद के नेताओं का हेलीकाप्टर भी आगरा की जमीन पर नहीं उतरा है।

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