मानसिक बीमारी से ग्रसित हर व्यक्ति पागल नहीं होता।

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हम जिस समाज में रहते हैं वहां एक धारणा है की अगर कोई व्यक्ति मनोरोग विशेषज्ञ से मिलने जाता है या उनसे किसी प्रकार की कोई सलाह मशवरा करता है तो उस व्यक्ति को लोग पागल की श्रेणी में समझ लेते हैं। काउंसलर और चिकित्सक के पास जाने के अन्य कई कारण हो सकते हैं। और आज कल इसी अवधारणा के चलते लोग अपनी मानसिक समस्याओं को डॉक्टर से साझा करने से बचते हैं और डिप्रेशन जैसी बीमारी की गिरफ्त में आजाते हैं। अगर हम ऐसी किसी समस्या से ग्रस्त हैं डॉक्टर राघवेंद्र से जानें की हमें ऐसी परिस्थिति में क्या करना चाहिए।

शर्म और झिजक के चलते नहीं करते चर्चा।

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