विश्व सिजोफ्रेनिया दिवस 2022: बड़ी-बड़ी बातें करना, अपनों से ही जान का खतरा, बेहद ही खतरनाक है ये बीमारी

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सिजोफ्रेनिया ऐसी मानसिक बीमारी है, जिसमें वास्तविकता से अलग काल्पनिक दुनिया में मरीज जीने लगते हैं। मानसिक रोगों में सात फीसदी मरीजों को ये बीमारी है।

विश्व सिजोफ्रेनिया दिवस आज 24 मई को है। बड़ी-बड़ी बातें करना, न होते हुए भी खुद को अमीर समझना, अपनों से ही जान का खतरा समझ अजीब व्यवहार करने लगना ये इस बीमारी के विशेष लक्षण हैं। कुल मानसिक रोगियों में सात फीसदी में ये परेशानी मिल रही है।
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान चिकित्सालय के प्रमुख अधीक्षक डॉ. दिनेश राठौर ने बताया कि हर साल 24 मई को विश्व सिजोफ्रेनिया दिवस मनाया जाता है। मानसिक स्वास्थ्य संस्थान की ओपीडी में रोजाना 230 मरीज आ रहे हैं। इसमें सिजोफ्रेनिया के करीब सात फीसदी मरीज हैं। इनकी उम्र 20 साल से अधिक की है।

इस बीमारी में मरीज वास्तविक दुनिया से अलग काल्पनिक जीवन जीने लगता है। भ्रम में रहते हैं। खुद को ताकतवर, अमीर तो कभी बड़ी-बड़ी बातें करने लगते हैं। हालत गंभीर होने पर ये अपनों से खुद को जान का खतरा महसूस करने लगते हैं। ऐसी स्थिति पर मरीज को चिकित्सक को दिखाना जरूरी है।

वरिष्ठ मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. यूसी गर्ग का कहना है कि शुरुआत में सिजोफ्रेनिया के मरीजों के लिए ही मानसिक रोग के अस्पताल खोले गए थे। ऐसे ही मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर उपचार किया जाता था। इसके बाद अन्य मानसिक बीमारियां भी लोगों में पनपने लगी, जिससे मरीजों की संख्या बढ़ने लगी। सिजोफ्रेनिया बीमारी के जेनेटिक और अज्ञात कारण हैं। व्यक्ति में लक्षण दिखने पर उसका मानसिक रोग विशेषज्ञ से उपचार करवाना चाहिए।

सिजोफ्रेनिया मेंटल हेल्थ से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है, जिसका असर व्यक्ति के व्यवहार और भावनाओं पर पड़ता है। इस बीमारी में मरीज अपने मन के भाव चेहरे पर प्रकट नहीं कर पाता है। आंकड़ों के मुताबिक, प्रति एक हजार लोगों में से तीन लोग इस बीमारी के शिकार होते हैं। इसमें व्यक्ति को लगता है कि कोई उसे मारना चाहता है। उसके खिलाफ कोई साजिश चल रही है और सभी लोग मिले हुए हैं। ऐसी ही कई अन्य लक्षण इन मरीजों में मिलते हैं।

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