वैशाली जिला के राघोपुर अंचल का उत्क्रमित मध्य विद्यालय सुकुमारपुर पटना सिटी के मालसलामी थाना अन्तर्गत अदरक घाट के समीप गंगा किनारे स्थित है।
कटाव के कारण लगभग डेढ़ दशक पहले जिला से अलग हुआ यह इकलौता विद्यालय एक बार फिर सुर्खियों में है। गंगा का जलस्तर बढ़ते ही विद्यालय के लगभग छह से आठ फीट गहरे और खुले भूतल में जल जमाव हो गया है।
वैशाली का विद्यालय पटना जिला में होने के कारण यहां शिक्षा विभाग एवं प्रशासनिक पदाधिकारी शायद ही पहुंच पाते हैं। इस कारण विद्यालय की व्यवस्था में कोई सुधार नहीं है।
दैनिक जागरण ने वर्ष 2024 के 31 अगस्त से कई खबरें प्रकाशित कर इस विद्यालय की बदहाल व्यवस्था को उजागर किया था। तब वैशाली के जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी से लेकर कई अन्य अधिकारी ने विद्यालय पहुंच कर स्थिति का जायजा लिया था।
उस समय भी विद्यालय परिसर में जमा पानी सड़ कर काला हो जाने और नीचे की कक्षाएं बंद हो जाने के कारण प्रथम तल की कक्षाओं में बच्चे बांस की खतरनाक सीढ़ियों से चढ़कर जाते थे।
जागरण में प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते हुए विभाग में बाहर से लोहे की सीढ़ी लगा कर बच्चों और शिक्षकों को सुरक्षित किया गया था। पटना जिला प्रशासन की पहल पर पानी निकालने के लिए नगर निगम द्वारा तीन सुपर सकर मशीनें लगायी गयी थीं।
विद्यालय की प्रभारी प्राधानाध्यापक रेखा कुमारी ने बताया कि 13 शिक्षक कार्यरत हैं। हर साल गंगा का जलस्तर बढ़ते ही भूतल में पानी भर जाता है। वर्षा का पानी जमा होकर सड़ने लगता है।
विद्यालय स्थानांतरित हो या पटना के अधीन
गुणवत्तापूर्ण पठन-पाठन और बेहतर व्यवस्था के लिए राघोपुर अंचल का उत्क्रमित मध्य विद्यालय सुकुमारपुर या तो वैशाली स्थानांतरित हो या पटना के अधीन।
बिहार अराजपत्रित प्रारंभिक शिक्षक संघ के प्रदेश महासचिव नेता डॉ. भोला पासवान ने कहा कि पटना में विद्यालय होने के कारण वैशाली के अधिकारियों का नियंत्रण नहीं है।
गंगा का जलस्तर बढ़ते ही स्कूल बंद कर दिया गया। शिक्षकों को कच्ची दरगाह में उपस्थिति बनानी पड़ रही है। बैठकों के लिए शिक्षकों को राघोपुर के जहांगीरपुर स्थित संकुल संसाधन केंद्र जाना पड़ता है।







